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हरिऔध साहित्य सेवा संस्थान द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में कवियों ने बांधा समां

 हरिऔध साहित्य सेवा संस्थान द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में कवियों ने बांधा समां

आइडियल इंडिया न्यूज़ 

संजय पांडेय सरस प्रमुख संपादक आजमगढ़ 

आजमगढ़। सरस्वती शिशु मंदिर कोलपांडेय में हरिऔध साहित्य सेवा संस्थान द्वारा हिंदी दिवस समारोह का आयोजन संस्थान के अध्यक्ष पं. सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन की अध्यक्षता और महामंत्री संजय कुमार पाण्डेय सरस के संचालन में संपन्न हुआ, जिसमें कवियों ने अपनी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओ को मंत्र मुग्ध कर दिया। 

                

         इस अवसर पर संस्थान ने प्रख्यात साहित्यकार प्रो. प्रभुनाथ सिंह 'मयंक' को 'हरिऔध सम्मान' से सम्मानित किया। फ्यूचर इंडिया वेलफेयर के अध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय, मुम्बई के समाजसेवी राजेन्द्र यादव , विद्यालय की प्रधानाचार्य शीला सिंह, संस्थान के संयुक्त मंत्री मनोज पांडेय,नेहा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के सचिव रवि जायसवाल और आर एस एस के नगर प्रचार प्रमुख गिरीश सेठ ने कवियों को अंगवस्त्रम और सम्मानपत्र भेंट किया।

             


 सुप्रसिद्ध कवि पं. सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन ने अपनी रचना ' है अनमोल धरोहर हिन्दी गर्व राष्ट्र को तुझपर हिन्दी , बनी राजभाषा भारत की मधुमय सरल मनोहर हिन्दी।' सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया।

          सफल संचालन से माहौल को खुशनुमा बना रहे संजय कुमार पांडेय सरस की रचना 'सारे विश्व में बोले जाने वाली भाषा है हिंदी , इसीलिए तो जन गण मन में गाने वाली भाषा है हिन्दी।'सराही गयी। हिन्दी पर ही विजयेंद्र प्रताप करुण की रचना ' है भाषा हिंदी अति प्यारी जिसे नमन शत बार,जिस भाषा ने मां के जैसा दिया है सबको प्यार। 'और कु. श्रेया दूबे की रचना 'हिन्दी से है हिन्दुस्तान और हिंदुस्तान है हिन्दी, मेरे वतन की शान और मान है हिंदी' ने भी वाहवाही लूटी। डॉक्टर रुद्रनाथ चौबे रूद्र ने अपनी पंक्तियां प्रस्तुत की, हिंदी भाषा हो हर जन की , बन जाए भाषा जन जन की सराही गई । दिनेश श्रीवास्तव दाहिर, ताज आजमी,रुद्रनाथ चौबे रुद्र, लालबहादुर चौरसिया लाल,राकेश पांडेय सागर, रत्नेश राय रत्न , संतोष पांडेय और देवेन्द्र तिवारी देव ने अपनी रचनाओं से श्रोताओ के दिलों को छू लिया।

          प्रो. प्रभुनाथ सिंह 'मयंक ' ने कहा कि 1949 में संविधान के अनुच्छेद 343 एवं 351 के तहत बने कानून में था कि हिन्दी को पूरे देश में 15 वर्ष में राजभाषा के रूप में लागू कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया। दिनेश श्रीवास्तव दाहिर ने कहा कि हिन्दी के सम्बन्ध में श्री भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनी समिति की अनुशंसा से 14 सितंबर 1949 को लेकर बने कानून का कोई सफल नतीजा नहीं रहा। अरविंद चित्रांश ने भोजपुरी को हिन्दी की बहन बताते हुए इसे ऋग्वेद से जोड़ा।

       अंत में कार्यक्रम के संयोजक रवि जायसवाल ने आभार व्यक्त किया। मौके पर हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, दीपक जायसवाल, राजेश रंजन, अनुज श्रीवास्तव, अशोक तिवारी, उमेश चंद्र पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव, विश्वदेव उपाध्याय, महंत संजय दास , राजनेत यादव, आलोक विश्वकर्मा, अभय त्रिपाठी, अजय पांडेय, अरुण यादव, विपिन कुमार, पूर्णमासी सोनकर, उमाशंकर पांडेय, संजय श्रीवास्तव, पूजा गुप्ता, आकांक्षा पांडेय, मंजू श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।दिनांक- 14/09/2026,(सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन)


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