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इथेनॉल 20 और सरकारी दावे -डॉ दिलीप कुमार सिंह

 इथेनॉल 20 और सरकारी दावे -डॉ दिलीप कुमार सिंह


आइडियल इंडिया न्यूज़ 
केदारनाथ सिंह समाचार सम्पादक जौनपुर 




            



वर्तमान समय में देश का सबसे चर्चित विषय ई20 है जिसके लिए रोज दावे पर दावे किए जा रहे हैं। एक तरफ जहां पर वाहन चालकों का कहना है कि इससे इंजन खराब हो रहा है और माइलेज बहुत कम हो रही है वही सरकारी दावे और सरकारी विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बिल्कुल ठीक है और इससे इंजन पर या माइलेज पर कोई भी अंतर नहीं पड़ता है तो इस बात पर निष्पक्ष विवेचन करके देखा जाना आवश्यक है की सरकारी तंत्र और जनता के बीच वास्तविकता क्या है 
इस समय भारत में 23 करोड़ से अधिक गाड़ियां पेट्रोल डीजल से चल रही है और बिना जनता की जानकारी के 10% इथेनॉल उसमें 2013-14 से ही मिलाया जा रहा है जो 2020-22 तक 10% हो गया और अब 20% हो गया है और अब इसे बढ़ाकर सरकार 85 प्रतिशत करने जा रही है इसी बात से चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है।

यहां पर यह जान लेना आवश्यक है कि इथेनॉल 20 क्या है और यह किन चीजों से बनता है वास्तव में एथेनॉल 20 एक प्रकार का इंधन है जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है या प्राकृतिक शर्करा और मंड से बनता है ‌ अंग्रेजी भाषा में शुगर और स्टार्च कहा जाता है सीधा चावल मक्का गेहूं चुकंदर ज्वार कृषि के अवशेष अर्थात बायोमास लकड़ी और बुरादा तथा भूसे से बनता है जिसे कई प्रक्रिया से गुजर कर द्रव रूप में बनाकर पेट्रोल में मिलाया जाता है सरकार का दावा है कि इससे प्राकृतिक डीजल गैस पर आयात होने वाले खर्च में भारी बचत होती है और किसानों को लाभ होता है। इस संदर्भ में हजार लेना आवश्यक है कि भारत में कुल 13 लाख करोड रुपए का पेट्रो पदार्थ आयात किया जाता है जबकि भारत का कुल निर्यात 72 लाख करोड रुपए है‌ इस प्रकार भारत के निर्यात का लगभग 1/5 भाग को केवल पेट्रोल और पेट्रोल पदार्थों पर ही खत्म हो जाता है जो देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है पेट्रोल पदार्थ के आयात को घटाने के लिए ही ई20 और एथेनॉल पचासी ईंधन को बेचा जा रहा है।

वैसे पेट्रोल डीजल और पेट्रोल पदार्थ में क्या-क्या मिलाया जा रहा है यह तो भगवान जाने या सरकार जानती है लेकिन इतना सच है कि मिलावट धीरे-धीरे इतनी बढ़ चुकी है कि उसे सारी गाड़ियां 20 वर्ष की जगह 7 8 वर्ष में ही कबाड़ हो जा रही है‌ और जितना पेट्रोल डीजल बच रहा है उससे ज्यादा माइलेज घटना के कारण लग रहा है यहां तक की मिलने वाला मिट्टी का तेल अर्थात केरोसिन तेल पूरा का पूरा पेट्रोल में मिलाया जा रहा है तब भी पूरा नहीं हो रहा है तो सरकार का यह दावा बिल्कुल निरर्थक है ‌ एथेनॉल के प्रयोग से ‌ पेट्रोल और पेट्रोल पदार्थ में बचत होगी और सरकारी घाटा कम होगा या तो ऐसा ही होगा कि शॉर्टकट के चक्कर में अच्छी सड़क छोड़कर उबड़-खाबड़ सड़क पकड़ लिया जाए जिससे माइलेज और भी खराब हो जाएगा।

यदि सरकारी दावे में सच है और सरकार एथेनॉल पचासी का प्रयोग सचमुच करना चाहती है तो उसे देशवासियों को और 25 करोड़ वाहन स्वामियों को अपने विश्वास में लेना होगा‌ इसके लिए जितने सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और शीर्ष अधिकारी हैं धन कुबेर और राजनेता हैं उन सब को केवल और केवल इथेनॉल पचासी मिश्रित पेट्रोल पदार्थ की गाड़ियों से ही जाने दिया जाए यह अनिवार्य नियम बनाया जाए ऐसा करने से बाकी लोग धीरे-धीरे अपने आप इसका प्रयोग करेंगे और सरकार को पेट्रोल समाप्त करके एथेनॉल 100 का प्रयोग करना देश के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो उसका उद्देश्य और आशय ‌ दोनों ही गड़बड़ और संदेहास्पद है। यदि इतना ही अच्छा है तो पहले उसका प्रयोग उपयुक्त वर्ग को करना चाहिए जो देश की सबसे अच्छी चीजों पर अपना अधिकार समझते हैं।

सरकार एक और काम कर सकती है एक तरफ शुद्ध 100% पेट्रोल के पंप लगाए जाएं और इस पेट्रोल पंप पर 100% एथेनॉल बचा जाए जिसको जो पसंद आवे वह अपने हिसाब से अपनी गाड़ी में भरा ले ‌ कुछ महीने या साल के बाद अपने आप अच्छी चीज अपना कर लोग बेकार चीजों को छोड़ देंगे और सरकारी दावा भी पोस्ट हो जाएगा‌ जब गाड़ी और पैसा जनता का है तो सरकार धोखा देकर ऐसा काम क्यों कर रही है पहले ही पेट्रोल पदार्थ में और डीजल तथा प्राकृतिक गैस में अनगिनत मिलावट हो रही है और कमतौली की समस्या पूरे देश में है‌ तो फिर सरकार अनावश्यक चल पर पांच करके जनता को भयभीत करके उसे ई20 अथवा एथेनॉल 85 खरीदने को क्यों बाध्य कर रही है ‌ सरकार को दूध का दूध और पानी का पानी उसे जनता के लिए करना चाहिए जो पहले ही महंगाई बेरोजगारी लाल फीता शाही संवेदनहीनता भ्रष्टाचार और घूसखोरी से बहुत बुरी तरह त्रस्त है 

इसलिए सरकार को समय रहते ऐसी चीजों को हाथ से नहीं निकलने देना चाहिए देश पहले ही तमाम ‌ समस्याओं आतंकवाद नक्सलवाद विदेशी षड्यंत्र पर बुरी तरह से घिरा हुआ है और ऐसे में जबरदस्ती जनता को इथेनॉल का विकल्प देकर जनता को परेशान नहीं करना चाहिए‌ क्योंकि एक सीमा से अधिक भर कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

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