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बेहद अफसोसजनक। कृष्ण मोहन सिंह का सुसाइड नोट, खोलती शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की पोल

 बेहद अफसोसजनक। कृष्ण मोहन सिंह का सुसाइड नोट, खोलती शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की पोल

 बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं बाबू पर 16 लाख रुपए ऐठने का लगा आरोप 
 सुसाइड करने वाले व्यक्ति द्वारा सुसाइड नोट में सीबीआई जांच की मांग 

आइडियल इंडिया न्यूज़
लवकुश पाण्डेय कुशीनगर

               




 कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगा ली इसमें देवरिया शिक्षा विभाग के अधिकारी और बाबू पर 16 लख रुपए एठने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं कृष्ण मोहन शिवपुर शहबाजगंज नहर रोड गोरखपुर स्थित मकान में अपने पत्नी गुड़िया 8 वर्ष की बेटी आस्था और 6 वर्षीय बेटे आदित्य के साथ रहते थे । स्वजन के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे कृष्ण मोहन ने कमरे में फंदे से लटक कर जान दे दी। कमरे से चार पेज का सुसाइड नोट ,मोबाइल से वीडियो बरामद हुआ। कृष्ण मोहन ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और बाबू पर रुपया लेकर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्नी गुड़िया ने बताया की कृष्ण मोहन गौरी बाजार के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे ।  करीब 5 साल पहले मुकदमा होने के चलते नौकरी चली गई । दोबारा नौकरी दिलाने के नाम पर शिक्षा विभाग के अधिकारी रुपए मांग रहे थे। पति ने गहना गिरवी रखकर और बैंक से कर्ज लेकर 16 लाख रुपए उनको दिए।  लेकिन ना तो नौकरी मिली और नहीं रुपया वापस हुआ । विभाग की प्रताड़ना से प्रताड़ित होकर शुक्रवार को भी देवरिया शिक्षा विभाग के कार्यालय बुलाया गया । वहां उन्हें अपमानित करते हुए पुनः रुपया देने का दबाव बनाया गया।इस आघात को सहन न कर पाने की वजह से वह  आत्महत्या को विवश हुए। 

 27 अक्टूबर वर्ष 2023 को दी गई थी पहली किस्त।


 रविवार को ही रुपए लेता था बाबू । सुसाइड नोट में बयां किया दर्द । दो किस्तों में दिए रुपए, फिर भी नहीं मिला छुटकारा।  नोट के मुताबिक तीन शिक्षकों कृष्ण मोहन सिंह, अर्पण तिवारी और ओंकार सिंह से 16-16 लाख यानी कुल 48 रुपए की मांग की गई थी जो दो किस्तों में वसूल भी लिए गए । इसके बावजूद उनका पीछा नहीं छोड़ा गया।  सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने लिखा है कि उनके अलावा अर्पणा तिवारी और ओंकार सिंह भी कृष्णा लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन गौरी बाजार देवरिया में कार्य थे।  उनकी नियुक्ति वर्ष 2016 में हुई थी। वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए देवरिया संतोष राय द्वारा कराई गई जांच में कई अनियमितायें पाई गई।  जिसके बाद एसटीएफ ने तत्कालीन वित्त एवं लेखा अधिकारी समेत कई लोगों को जेल भेज दिया था। इस केस में कृष्ण मोहन सिंह सहित कई शिक्षकों पर भी मुकदमा दर्ज हुआ।  5 वर्ष तक इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी ।जब देवरिया के नए बीएसए के बाबू संजीव सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने तीनों से 20-20 लख रुपए की मांग की।  इसके बाद तीनों को पूर्व प्रधानाध्यापक अनिल सिंह बीएसए ऑफिस ले गए यहां 16, 16 लाख कुल 48 लाख में तय कराया गया। अखबार में विज्ञापन निकलवाने के लिए भी अलग से ₹50, 000 लिए थे।   27 अक्टूबर 2023 को तीनों शिक्षकों ने देवरिया में बीएसए ऑफिस के सामने पेंशनल्यालय के पास पहली किस्त में सात -सात लाख यानी कुल 21 लख रुपए दिए कृष्ण मोहन के साथ उनके भांजे राजेश भी गए थे ।अर्पणा तिवारी खुद गई थी 14 अगस्त को तीनों को बीएससी ऑफिस में सुनवाई के लिए बुलाया गया कुछ दिनों बाद फिर से 9,9 लाख कुल 27 लाख की मांग कि गई पैसे ना होने के कारण ओंकार सिंह को अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े और दो बीघा जमीन बेचनी पड़ी कृष्ण मोहन ने 17 नवंबर 2023 को एसबीआई की पादरी बाजार शाखा से 7 लख रुपए निकाले जिसके लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने चार लाख 24000 में गिरवी रखने पड़े इसके अलावा ₹200000 कैश घर से ले गए कुल ₹9 लाख रुपए की दूसरी किस्त 23 नवंबर रविवार को दी गई सुसाइड नोट में लिखा है कि बीएससी ऑफिस का बाबू संजीव सिंह हर रविवार को ही कृपया लेता था इसलिए कृष्ण मोहन को भी 23 नवंबर रविवार को ही पैसे देने के लिए बुलाया था अनिल सिंह पूर्व अध्यापक से वह व्हाट्सएप्प कॉल पर बात करता था ताकि कोई सबूत ना बच्चे सुसाइड नोट के अंत में कृष्ण मोहन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रार्थना की है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए और बेईमानों को बख्शा ना जाए उन्होंने लिखा मेरी मृत्यु की जिम्मेदार बी यस ए के बाबू संजीव सिंह तथा वहां के अधिकारीगण हैं स्कूल में नहीं है एक भी बच्चा सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने लिखा है कि जिस स्कूल में वह तैनात हैं वह कोई बच्चा नहीं है माध्यमिक विद्यालय मदरसन गौरी बाजार देवरिया बहुत ही विवादित स्कूल है जिसके कुछ वीडियो व्हाट्सएप पर भी मौजूद हैं उन्होंने मांग की है कि इस स्कूल की गहन जांच होनी चाहिए प्रधानाध्यापक अनिल सिंह को बेहद प्रश्न बताया है उन्होंने लिखा है कि इसी ने पैसे केउनकी पहचान बीएसए ऑफिस में करने वाले शख्स था और उसी ने रुपए लेने के लिए बातचीत कराया था लालच में हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी अनिल सिंह ही उनकी पहचान बीएसए ऑफिस में करने वाले शख्स था और उसी ने रुपए लेने के लिए बातचीत कराया था।

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