पुरानी सेवा शर्तों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं, टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने भरी हुंकार
श्रावस्ती के शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट तक किया पैदल मार्च, प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा
आइडियल इंडिया न्यूज़
सीताराम गुप्ता,श्रावस्ती बहराइच
श्रावस्ती | 26 फरवरी, 2026 , टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर जबरन टीईटी (TET) अनिवार्यता थोपे जाने के विरोध में आज जनपद श्रावस्ती के शिक्षकों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज अपराह्न 1:00 बजे से भारी संख्या में शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर एकत्रित हुए और वहां से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय है कि यह आंदोलन बीते कई दिनों से चरणबद्ध तरीके से चल रहा है:
22 फरवरी: ट्विटर पर #जस्टिस_फॉर_टीचर हैशटैग के साथ दोपहर 2:00 से शाम 6:00 बजे तक देशव्यापी टॉप ट्रेंड चलाकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया। 23 से 25 फरवरी: जनपद के समस्त शिक्षकों ने अपने दाहिने हाथ पर काला फीता बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षण कार्य करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया बीएसए कार्यालय पर आयोजित धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आरटीई एक्ट भारत में 1 अप्रैल 2010 और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 को लागू हुआ। इससे पूर्व जारी विज्ञप्ति और शासनादेशों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर नई सेवा शर्तें थोपना पूर्णतः असंवैधानिक है। विनय पांडेय (जिला अध्यक्ष, श्रावस्ती) मैं धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "साथियों, यह न्याय की लड़ाई है। जब हम सेवा में आए थे, तब टीईटी जैसी कोई शर्त हमारे नियुक्ति पत्र में नहीं थी। खेल के बीच में नियम बदलना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि असंवैधानिक भी है। हम सरकार को स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि पुरानी सेवा शर्तों के रक्षक के रूप में हम इस 'टीईटी थोपने' की नीति के विरुद्ध अंतिम सांस तक लड़ेंगे। जब तक पुरानी विज्ञप्ति के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को मुक्ति नहीं मिलती, हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।" राम नरेश यादव (जिलाध्यक्ष, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ) मैं धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के नाम पर उन शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है जिन्होंने दशकों तक शिक्षा व्यवस्था को अपने कंधों पर ढोया है। आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक टीईटी की परिधि से पूर्णतः बाहर हैं। हम किसी भी सूरत में अपनी वरिष्ठता और सेवा शर्तों से समझौता नहीं करेंगे। टीईटी छूट हमारा विधिक अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे।" बीनू राजपूत (संयोजिका, महिला शिक्षक संघ) ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "शिक्षण कार्य के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाली हमारी महिला शिक्षिकाओं पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। वर्षों के अनुभव के बाद अब टीईटी की परीक्षा थोपना हास्यास्पद है। यह हमारी गरिमा और अधिकारों पर प्रहार है। महिला शिक्षक संघ इस दमनकारी नीति के विरुद्ध एक स्वर में खड़ा है और हम अपनी पुरानी सेवा शर्तों की बहाली के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।" हरीश कुमार (जिला उपाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ) ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "टीईटी विसंगति ने हमारे मान-सम्मान को चोट पहुँचाई है। जो शिक्षक स्वयं हजारों छात्रों को पढ़ाकर योग्य बना चुके हैं, उनसे योग्यता का नया प्रमाण मांगना तर्कहीन है। हम यहाँ केवल अपनी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि शिक्षक सम्मान की रक्षा के लिए एकत्रित हुए हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि शासनादेशों का सम्मान किया जाए और टीईटी की यह बेजा अनिवार्यता तुरंत वापस ली जाए।" सत्य प्रकाश वर्मा (जिला मंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ) ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "कानून की दृष्टि में कोई भी नियम पिछली तिथि (Retrospective effect) से लागू नहीं हो सकता। 2010 और 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों पर यह कानून जबरन लादा जा रहा है। हम विधिक न्याय के रणनीतिकार के रूप में स्पष्ट कर रहे हैं कि हमारे पास संवैधानिक ढाल है। सरकार को हमारी जायज मांगें माननी ही होंगी, अन्यथा यह आंदोलन कलेक्ट्रेट से लेकर न्यायालय और संसद तक गूँजेगा। "अनुप श्रीवास्तव (ब्लॉक अध्यक्ष, हरिहरपुर रानी): ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "हरिहरपुर रानी के शिक्षक साथी आज हुंकार भर रहे हैं कि हम किसी भी असंवैधानिक थोपी गई शर्त को स्वीकार नहीं करेंगे। जो शिक्षक दशकों से राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें आज टीईटी के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। आरटीई एक्ट के आने से पहले की नियुक्तियों पर यह नियम लागू करना सरासर गलत है। हम ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक इस तानाशाही का पुरजोर विरोध करेंगे और अपनी पुरानी सेवा शर्तों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हैं।" अंकित श्रीवास्तव (जिला संयुक्त मंत्री): मैं धरने को संबोधित करते हुए कहा कि "यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान और कानूनी अधिकारों की है। उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले जारी विज्ञापनों और शासनादेशों के तहत नियुक्त शिक्षक टीईटी की परिधि से पूर्णतः बाहर हैं। एक जिला संयुक्त मंत्री के नाते मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हम विधिक रूप से इस प्रकरण को लड़ने के लिए तैयार हैं। सरकार को हमारी जायज मांगों को सुनना होगा, वरना यह आंदोलन श्रावस्ती की सड़कों से शुरू होकर पूरे प्रदेश में दावानल की तरह फैलेगा। " पैदल मार्च के पश्चात जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व की विज्ञप्तियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए और उनकी सेवा शर्तों को यथावत अक्षुण्ण बनाए रखा जाए।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में यह आंदोलन प्रदेश और देश स्तर पर और उग्र रूप धारण करेगा। इस अवसर पर नंद कुमार पाठक राममिलन यादव वीरेंद्र प्रताप सिंह अनूप श्रीवास्तव संतोष मिश्रा संजीव गौतम राकेश श्रीवास्तव मुनव्वर मिर्जा बीनू राजपूत संतोष सोनी सुनीता यादव अभिनव पाठक दिवाकर प्रताप सिंह विजय प्रकाश चौधरी रामनरेश यादव धर्मेंद्र चौधरी राकेश चौधरी देवेंदु त्रिपाठी सहित सैकड़ो शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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