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सीतापुर: बेहटा व परसेंडी में मनरेगा घोटाले का खुलासा, कागज़ों में सैकड़ों मजदूर—मौके पर सन्नाटा, सरकारी धन की खुली लूट

 सीतापुर: बेहटा व परसेंडी में मनरेगा घोटाले का खुलासा, कागज़ों में सैकड़ों मजदूर—मौके पर सन्नाटा, सरकारी धन की खुली लूट

आइडियल इंडिया न्यूज़ पुनीत यादव, सीतापुर


सीतापुर जनपद के विकासखंड बेहटा और परसेंडी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्रामीणों को रोजगार देने के उद्देश्य से चलाई जा रही यह महत्वाकांक्षी योजना इन इलाकों में केवल कागज़ों तक सीमित होकर रह गई है।

विकासखंड बेहटा की ग्राम पंचायतें— बहियाबहरामपुर, औरंगाबाद, बिठियाजालेपुर, धनपुरिया, मिदनिया, करमूडीह दतूनी एवं शेखनापुर, जबकि विकासखंड परसेंडी की ग्राम पंचायतें— अमौरामोतीसिंह, देना, धिमौरा, हुसैनपुर बहादुरपुर, खंदहलिया, महुद्दिनपुर, मिर्जापुर, रखौना, समैसा व उदयमालपुर कला में मनरेगा कार्यों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। कार्यस्थलों पर कहीं भी अपेक्षित संख्या में मजदूर मौजूद नहीं मिले, जबकि सरकारी अभिलेखों और ऑनलाइन पोर्टल पर दर्जनों से लेकर सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है। इसी फर्जी हाजिरी के आधार पर लाखों रुपये की मजदूरी निकालकर सरकारी धन का बंदरबांट किए जाने के आरोप हैं।

सूत्रों के अनुसार, कुछ ग्राम प्रधानों और संबंधित अधिकारियों की आपसी मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। मनरेगा के नियमों और दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर वास्तविक मजदूरों के हक पर डाका डाला जा रहा है, जिससे जरूरतमंद ग्रामीण रोजगार और मजदूरी दोनों से वंचित रह जा रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना अब रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है। काम मांगने पर उन्हें टाल दिया जाता है, जबकि उनके नाम पर फर्जी उपस्थिति दिखाकर भुगतान निकाल लिया जाता है।

ब सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस कथित मनरेगा घोटाले पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर सरकारी धन की यह लूट यूं ही जारी रहेगी?

ग्रामीणों को अब केवल कार्रवाई का इंतजार है।

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