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प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सड़क नहीं, गड्ढों का राज: असवारी गांव व मौर्या बस्ती के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर

 प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सड़क नहीं, गड्ढों का राज: असवारी गांव व मौर्या बस्ती के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर

आइडियल इंडिया न्यूज़
 धीरज पांडे मिर्जामुराद वाराणसी

(राजातालाब)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी अंतर्गत आराजी लाइन ब्लॉक के असवारी गांव और उससे जुड़ी मौर्या बस्ती में वर्षों से जर्जर पड़ी मुख्य सड़क को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गांव और मौर्या बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली लगभग एक किलोमीटर लंबी यह सड़क दर्जनों बस्तियों के आवागमन का एकमात्र साधन है, लेकिन बदहाली के चलते यह सड़क अब लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क करीब 10–12 वर्ष पूर्व पत्थर की ईंटों (खड़ंजा) से बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ ईंटें उखड़कर इधर-उधर हो गई हैं। आज हालत यह है कि ईंटें अपनी जगह से खिसक चुकी हैं और सड़क गहरे गड्ढों, उभरी ईंटों व ठोकरों में तब्दील हो गई है। साइकिल और मोटरसाइकिल चलाना तो दूर, कार और चारपहिया वाहनों का निकलना लगभग असंभव हो गया है।
इस सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर असवारी गांव और मौर्या बस्ती के नौनिहालों की शिक्षा पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल वाहन इस मार्ग पर आने से साफ मना कर देते हैं। मजबूरी में बच्चों को सड़क के एक सिरे पर उतार दिया जाता है, जहां से उन्हें खराब रास्ते पर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब कीचड़, जलभराव और गहरे गड्ढों के बीच बच्चों को जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है।
आपातकालीन स्थिति में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीमार, बुजुर्ग या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई बार एंबुलेंस मौर्या बस्ती या असवारी गांव तक पहुंच ही नहीं पाती, ऐसे में मरीजों को चार-पांच लोगों के सहारे उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। रात के समय यह स्थिति और भयावह हो जाती है।
बरसात के मौसम में यह चक रोड दलदल में तब्दील हो जाती है। जगह-जगह जलभराव और फिसलन के कारण गिरकर चोटिल होने की घटनाएं आम हो गई हैं। वहीं किसानों को कृषि कार्य, खाद-बीज और फसल ढुलाई में भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक स्तर के अधिकारी, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। ग्राम प्रधान जियालाल ने भी ग्रामीणों से बातचीत में साफ कहा कि यह कार्य उनके स्तर का नहीं है और उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से लेकर सेवापुरी विधायक नीलरतन पटेल उर्फ नीलू तक अपनी पीड़ा पहुंचाई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में अगर गांव और मौर्या बस्ती की सड़कें इस हालत में हैं, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी
ने कहा ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई है। सड़क की स्थिति का शीघ्र ही स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर मरम्मत अथवा नए निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, ताकि असवारी गांव व मौर्या बस्ती के लोगों को राहत मिल सके। इस कार्य को प्राथमिकता में लिया जाएगा।”
वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र सड़क निर्माण या मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए, अन्यथा वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासनिक स्तर पर कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं और असवारी गांव व मौर्या बस्ती के ग्रामीणों को वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या से कब निजात मिलती है।



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