हृषीकेश पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति,
14 जनवरी रात्रि में सूर्य का मकर राशि प्रवेश से अगले दिन मिलेगा पूर्ण पुण्य फल
आइडिया इंडिया न्यूज़
धीरज पांडे मिर्जामुराद वाराणसी
राजातालाब - “हृषीकेश पंचांग” (वाराणसी) एवं प्राचीन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को ही मानना शास्त्रसम्मत एवं फलदायी है। इस संबंध में पंडित रमेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पंडित रमेश उपाध्याय ने बताया कि धर्मशास्त्रों में यह स्पष्ट विधान है कि यदि सूर्य का राशि में प्रवेश रात्रि काल में होता है, तो उस राशि का पुण्य फल अगले दिन माना जाता है। इसी कारण इस वर्ष मकर संक्रांति का वास्तविक पुण्यकाल 15 जनवरी को प्रातःकाल से दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दिन किए जाने वाले पवित्र स्नान, तिल-गुड़ का दान, वस्त्रदान ,जप-तप एवं सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। यदि यह सभी कर्म 15 जनवरी को ही किया जाएगा तो श्रद्धालुओं को पूर्ण पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 14 जनवरी को रात्रि में सूर्य संक्रमण होने के कारण उस दिन संक्रांति मानना शास्त्रीय दृष्टि से उपयुक्त नहीं है।
पंडित उपाध्याय ने श्रद्धालुओं से अपील किया कि वे भ्रम में न पड़ें और हृषीकेश पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाएं, जिससे धार्मिक कर्मों का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्रसम्मत तिथि पर पर्व मनाने से ही परंपरा और धर्म दोनों की रक्षा होती है।

0 टिप्पणियाँ