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विश्व हिन्दी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई द्वारा कारगिल विजय दिवस पर सैनिक सम्मान एवं ओजस्वी कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन

विश्व हिन्दी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई द्वारा कारगिल  दिवस पर सैनिक सम्मान एवं ओजस्वी कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन

आइडियल इंडिया न्यूज़ 

संजय पांडेय सरस प्रमुख संपादक आजमगढ़ 

आजमगढ़। कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर विश्व हिन्दी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आजमगढ़ इकाई के तत्वावधान में प्रतिभा निकेतन इंटर कॉलेज में एक भव्य सम्मान समारोह एवं शानदार कवि गोष्ठी का आयोजन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, साहित्य और सैनिक सम्मान का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

                


कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कवि देवेन्द्र तिवारी 'देव' ने किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र' ने तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि सुरेन्द्र सिंह 'चांस' उपस्थित रहे।

                    


समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में भारतीय सेना के गौरव रिटायर्ड सूबेदार एवं वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय हरिहर पाठक जी तथा रिटायर्ड सूबेदार आदरणीय दिनेश चौबे जी को राष्ट्रसेवा एवं समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं धूप-दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्था के पदाधिकारियों—अध्यक्ष डॉ. रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र', वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी 'देव', उपाध्यक्ष महेन्द्र 'मृदुल', महामंत्री लाल बहादुर चौरसिया, संगठन मंत्री घनश्याम यादव, कोषाध्यक्ष महेन्द्र मौर्य, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी सरोज यादव तथा मीडिया प्रभारी रोहित बारी ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। सरोज यादव की मधुर सरस्वती वंदना ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

स्वागत भाषण में अध्यक्ष डॉ. रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र' ने कहा कि "कारगिल विजय दिवस भारतीय वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान का स्मृति-पर्व है। साहित्य समाज को जागृत करने का सशक्त माध्यम है और साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी लेखनी से राष्ट्रभक्ति, संस्कार और मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ।"

सम्मान प्राप्त करने के उपरांत वरिष्ठ साहित्यकार एवं रिटायर्ड सूबेदार हरिहर पाठक जी ने कहा कि "देश की सेवा करना प्रत्येक सैनिक का सर्वोच्च धर्म है। आज मिला यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि भारतीय सेना के प्रत्येक सैनिक के त्याग, समर्पण और बलिदान का सम्मान है।"

रिटायर्ड सूबेदार दिनेश चौबे जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि "कारगिल के वीरों का बलिदान हमें सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। युवा पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।"

कवि गोष्ठी में संध्या निगम 'भूषण' (झाँसी), अनीता राज (आजमगढ़), महेन्द्र 'मृदुल', अनुपम पांडे 'अनहद', शत्रुघ्न चौहान, महेन्द्र मौर्य, अंबरीष श्रीवास्तव, राकेश पाण्डेय 'सागर', लाल बहादुर चौरसिया, देवेन्द्र तिवारी 'देव', डॉ. रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र', घनश्याम यादव, चंद्रमा राम (लालगंज), रिया गौतम (लालगंज), रोहित बारी, सुरेन्द्र सिंह 'चांस' तथा आदरणीय हरिहर पाठक सहित अनेक कवियों ने कारगिल के अमर शहीदों, राष्ट्रभक्ति एवं मातृभूमि-प्रेम पर आधारित ओजपूर्ण रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

लालगंज से पधारी बाल कवयित्री नेहा भारती ने अपनी आकर्षक, ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति पर सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा और उपस्थित साहित्यकारों ने उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन घनश्याम यादव ने किया।

अंत में आयोजन सचिव देवेन्द्र तिवारी 'देव' ने सभी अतिथियों, सम्मानित सैनिकों, साहित्यकारों, कवियों, पत्रकार बंधुओं, विद्यालय परिवार तथा उपस्थित श्रोताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "कारगिल विजय दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व हमें वीर शहीदों के त्याग और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं। विश्व हिन्दी शोध एवं संवर्धन अकादमी भविष्य में भी साहित्य और राष्ट्रचेतना को समर्पित ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करती रहेगी।"

समारोह राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, साहित्य-साधना और सैनिक सम्मान की भावधारा निरंतर प्रवाहित होती रही, जिससे उपस्थित सभी जनों के हृदय में देशप्रेम और हिंदी के प्रति नई ऊर्जा एवं प्रेरणा का संचार हुआ।

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