तिलक जी सच्चे अर्थों में भारत निर्माता थे: प्रो. संजीव कुमार
ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के तत्वावधान में मनाई गई बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती
आइडियल इंडिया न्यूज़
संजय पांडेय सरस, प्रमुख संपादक आजमगढ़
आजमगढ़। ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के तत्वावधान में गुरुवार की देर शाम भदुली स्थित साईं इंटरनेशनल स्कूल में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोकमान्य पंडित बाल गंगाधर तिलक एवं अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर आजाद की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इसके पूर्व प्रातःकाल हर्रा की चुंगी पहुंचकर आजाद जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार, विशिष्ट अतिथि संयुक्त विकास आयुक्त राम बाबू त्रिपाठी तथा अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन जे.एन. झा ने महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. संजीव कुमार कुलपति ने कहा कि तिलक जी सच्चे अर्थों में भारत के निर्माता थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा में समर्पित कर दिया। उनके नारे 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' ने स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा और अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाया।
वही राम बाबू त्रिपाठी एवं जे.एन. झा ने कहा तिलक जी स्वदेशी आंदोलन के जनक थे। उन्होंने देशवासियों के मन में यह विश्वास जगाया कि कर्म का राष्ट्रीय फल ही स्वराज्य है।भाजपा के वरिष्ठ नेता अखिलेश मिश्रा गुड्डू ने कहा महापुरुषों के बताए रास्तों पर चलकर देश और समाज के कल्याण के लिए तत्पर रहना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के अध्यक्ष ब्रजेश नंदन पांडेय ने कहा अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था। काकोरी ट्रेन एक्शन और सांडर्स वध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका भारतीय इतिहास में अमर है परिषद के संरक्षक तारकेश्वर मिश्र ने बताया कि तिलक जी द्वारा सन् 1916 में होमRule लीग की स्थापना उनके राजनीतिक जीवन की महान उपलब्धि थी। कार्यक्रम का संचालन कर रहे महामंत्री मनोज कुमार त्रिपाठी ने कहा कि तिलक जी एक आदर्श शिक्षक, सफल पत्रकार, दूरदर्शी राजनेता और महान समाज सुधारक थे।कार्यक्रम के दौरान आचार्य अवनीश पांडेय के मार्गदर्शन में जिंदोपुर संस्कृत पाठशाला के छात्रों ने सुमधुर स्वस्ति वाचन प्रस्तुत किया। वहीं शिक्षक एवं कवि देवेंद्र कुमार त्रिपाठी 'देव' ने अपनी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से दोनों विभूतियों को नमन किया।
जिसके बाद अध्यक्ष महामंत्री सहित संरक्षक तारकेश्वर मिश्र, इंजीनियर कैलाश नाथ चतुर्वेदी, संस्था प्रबन्धक भागवत प्रसाद तिवारी, गिरीश चतुर्वेदी, विश्व देव उपाध्याय, कृष्ण कुमार पाण्डेय, उपेन्द्र दत्त शुक्ला ने अतिथियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम संयोजक व युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष शशांक तिवारी ने अंत में आए हुए सभी अतिथियों व आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर उमाकांत तिवारी, अवधेश त्रिपाठी, कृष्ण कुमार पाण्डेय, गोविन्द दुबे, कृष्ण कांत पाण्डेय, जगदम्बा प्रसाद पाण्डेय, ओम प्रकाश मिश्रा आदि ने विचार व्यक्त किया तथा शिक्षक एवं कवि देवेंद्र कुमार त्रिपाठी देव ने अपनी स्व रचित रचना के माध्यम से देश के दोनों महान विभूतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान विश्वदेव उपाध्याय,सतीश मिश्र, माहेश्वरी कांत पाण्डेय, उपेन्द्र दत्त शुक्ला, रागिनी तिवारी, वीरेंद्र मिश्रा, डॉ सहजानन्द पाण्डेय, अरुण पाठक, वेद पाण्डेय, गणेश पाण्डेय, अखिलेश त्रिपाठी, सुभाष पाण्डेय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, शुभम उपाध्याय, डॉ डी एस त्रिपाठी, अवधेश कुमार मिश्रा, मनोज त्रिपाठी, डा उमेश चंद्र पाण्डेय, सुबास पाण्डेय, धनंजय पाण्डेय, मनीष त्रिपाठी, हरि राम उपाध्याय, अशोक पाण्डेय, सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय,राजन पाण्डेय, अवधेश उपाध्याय, विजय प्रकाश मिश्र, सौरभ उपाध्याय, अमित पाठक, अजय तिवारी, राकेश उपाध्याय, जितेन्द्र मिश्र, राधे श्याम मिश्र, गणेश शंकर मिश्रा, राजेश कुमार पाण्डेय, अरविन्द उपाध्याय, गौरव तिवारी, राजीव कुमार त्रिपाठी, अनिल तिवारी, कन्हैया पाण्डेय, मनोज पाण्डेय, गिरीश दत्त मिश्रा, डॉ एस एस दुबे, राहुल देव पाठक, उपेन्द्र नाथ दुबे, रवि तिवारी सहित सैकड़ों ब्राह्मण उपस्थित थे। भवदीय मनोज कुमा
र त्रिपाठी महामंत्री


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