फरियाद
(एक भावनात्मक कविता)ईश्वर से एक ही है फरियाद,
आती हैं मुझे जिसकी याद,
लौटा दो मुझे उसे,
उसके बिना जीवन है बिन
श्वास के एहसास,
वो रूठ गया है मुझसे,
वो भूल गया है मुझे,
पर मै कैसे रूठूं
और कैसे भूलू उसे
वो तो है मेरी श्वास,
काश,काश मै पल भर को
उनसे मिल पाती,
गले लग कर रो पाती
कह पाती बिन तुम्हारे
जीवन है बेकार,
है एक अंधकार,
मुझे भी ले जाओ संग अपने,
खोलो, खोलो द्वार।
वो ना आती है ना बुलाती है,
जाने से उनके
ऐसे हो गए है हम,
जैसे बिन आत्मा के जीवन।
जानते है हम
ना लोटोगे तुम,
पर है हमारा स्वयं से वचन
न भूलेंगे हम,
न भूलेंगे हम,न भूलेंगे हम,
प्रियंका भोर, गाज़ियाबाद

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