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मां विंध्यवासिनी की तरह भव्य बनेगा जौनपुर स्थित चौकिया धाम ,ग्रेनाइट की जगह की जाएगी स्टोन सेंटिंग

  मां विंध्यवासिनी की तरह भव्य बनेगा जौनपुर स्थित चौकिया धाम ग्रेनाइट की जगह की जाएगी स्टोन सेंटिंग 

आइडियल इंडिया न्यूज़ 

डा आर पी विश्वकर्मा जौनपुर 

                   


पूर्वांचल में आस्था का केंद्र शीतला धाम चौकिया भी काशी विश्वनाथ मंदिर और मां विंध्यवासिनी धाम की तर्ज पर नव्य-भव्य नजर आएगा। इसके लिए इसी महीने काम शुरू किया जाएगा। मां का दरबार भव्य बनाने की तैयारी है। इसके लिए डिजाइन भी तैयार कर ली गई है। हालांकि इसमें मामूली फेरबदल भी की जा सकती है।

शीतला धाम चौकिया में सुंदरीकरण और पर्यटन विकास के लिए शासन से करीब छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। दो दिन पहले ही अधिकारियों की टीम ने धाम क्षेत्र का निरीक्षण किया। सर्वे के बाद धाम का डिजाइन फाइनल कर लिया गया है। सर्वे टीम में शामिल जिम्मेदारों के मुताबिक धाम क्षेत्र का विकास भविष्य को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा रहा है। 

                  


धाम का मुख्य द्वार नए लुक में नजर आए, इसके लिए विशेष डिजाइन तैयार की गई है। धाम के मुख्य हिस्से में दोनों तरफ मां शीतला की तस्वीर होगी। जबकि मुख्य द्वार पर माता रानी की ही छोटी-छोटी तस्वीरें होंगी। इसी तरह प्रवेश द्वार पर गणेश जी विराजमान रहेंगे। यही नहीं, चौकिया धाम के आसपास के हॉल तोड़कर नए और आकर्षक बनाए जाएंगे, जिससे धाम के सामने से लुक भव्य नजर आए। 

मंदिर के पीछे कुंड में दो और फव्वारे लगाए जाएंगे, जबकि मौजूदा फव्वारों की मरम्मत की जाएगी। ग्रेनाइट की जगह आकर्षक स्टोन की सेटिंग की जाएगी। दीवारों पर भी डिजाइनिंग स्टोन सेटिंग की जाएगी। जगह-जगह कूड़ेदान की भी व्यवस्था की जाएगी। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वारा का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। जबकि इसके अलावा बाहर दो और नए प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। इनमें एक मुख्य गेट शाहगंज मार्ग तो दूसरा पचहटिया से चौकिया धाम आने वाले रास्ते पर बनाया जाएगा। पर्यटन विकास के दौरान तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।


 *ये है मान्यता*


मान्यता है कि चौकिया स्थित माता शीतला धाम के दर्शन के बाद विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोरखपुर के खासकर दर्शनार्थी मत्था जरूर टेकने आते हैं। यहां सोमवार और शुक्रवार को काफी अधिक भीड़ होती है। जबकि सामान्य दिनों में करीब 10 हजार भक्तों की भीड़ होती है। यहां भक्तजन कढ़ाई करते हैं। हलवा और पूड़ी चढ़ाने की परंपरा है।

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