सीतापुर: सकरन ब्लॉक में भ्रष्टाचार का साया, मुरथना पंचायत में बिना काम लाखों का भुगतान
बीडीओ संरक्षण के आरोप, 9 जनवरी को जांच तयआइडियल इंडिया न्यूज ,पुनीत यादव सीतापुर
जनपद सीतापुर के विकासखंड सकरन से एक बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत मुरथना में विकास कार्यों के नाम पर भारी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। आरोप है कि खंड विकास अधिकारी सकरन के संरक्षण में पंचायत सचिवों को खुली छूट मिली हुई है, जिसके चलते पंचायत स्तर पर फर्जीवाड़ा धड़ल्ले से चल रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत मुरथना में खंड विकास अधिकारी स्वयं मौके पर निरीक्षण कर चुके हैं, इसके बावजूद किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे खंड विकास अधिकारी सकरन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि उमाकांत सहित कई पंचायत सचिवों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मामले के अनुसार पंचायत में हियूम पाइप कार्य को कागजों में पूर्ण दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पाइप आज भी बिना उपयोग के मौके पर पड़ी हैं। इसी तरह नल रिबोर के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, लेकिन मानकों के अनुरूप बोरिंग न होने से आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
नाली निर्माण कार्य में भी केवल औपचारिकता निभाते हुए पूरे कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि गुणवत्ता और वास्तविक निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं मुख्य मार्ग से पुलिया तक खड़ंजा निर्माण को भी अभिलेखों में पूरा दर्शाया गया है, जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य मौजूद नहीं है।
इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायत मुरथना में शैलेन्द्र दीक्षित ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में तैनात हैं।
सबसे अहम बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक बीडीओ सकरन और डीपीआरओ सीतापुर की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि अब मामला और गंभीर हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव प्रवीन कुमार सिंह द्वारा 20 नवंबर 2025 को दिए गए शिकायती पत्र पर जिला विकास अधिकारी ने सीधे जांच बैठा दी है।
जिला विकास अधिकारी संतोष नारायण गुप्त के आदेशानुसार 9 जनवरी 2026 को पूर्वान्ह 11 बजे सकरन ब्लॉक कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराए गए कार्यों की विस्तृत जांच की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 1 अप्रैल 2025 से 15 नवंबर 2025 के बीच कराए गए सभी कार्यों से जुड़े अभिलेख, बिल, वाउचर एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौके पर उपस्थित रहेंगे। साथ ही बीडीओ सकरन की उपस्थिति भी जांच में अनिवार्य की गई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंटरलॉकिंग सहित कई विकास कार्यों में बिना फर्म, बिना मटेरियल विवरण के केवल कागजों पर भुगतान कर दिया गया और कार्य मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शिरीष गुप्ता पूर्व में महमूदाबाद में मनरेगा मटेरियल भुगतान घोटाले में दोषी पाए जा चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें पुनः सकरन में तैनाती दे दी गई।
अब 9 जनवरी को होने वाली जांच से यह तय होगा कि यह कार्रवाई महज कागजी खानापूरी साबित होती है या फिर सादे बाउचरों के पीछे छिपा करोड़ों का खेल सच में उजागर होगा। पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हुई हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत मुरथना में खंड विकास अधिकारी स्वयं मौके पर निरीक्षण कर चुके हैं, इसके बावजूद किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे खंड विकास अधिकारी सकरन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि उमाकांत सहित कई पंचायत सचिवों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मामले के अनुसार पंचायत में हियूम पाइप कार्य को कागजों में पूर्ण दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पाइप आज भी बिना उपयोग के मौके पर पड़ी हैं। इसी तरह नल रिबोर के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, लेकिन मानकों के अनुरूप बोरिंग न होने से आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
नाली निर्माण कार्य में भी केवल औपचारिकता निभाते हुए पूरे कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि गुणवत्ता और वास्तविक निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं मुख्य मार्ग से पुलिया तक खड़ंजा निर्माण को भी अभिलेखों में पूरा दर्शाया गया है, जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य मौजूद नहीं है।
इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायत मुरथना में शैलेन्द्र दीक्षित ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में तैनात हैं।
सबसे अहम बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक बीडीओ सकरन और डीपीआरओ सीतापुर की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि अब मामला और गंभीर हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव प्रवीन कुमार सिंह द्वारा 20 नवंबर 2025 को दिए गए शिकायती पत्र पर जिला विकास अधिकारी ने सीधे जांच बैठा दी है।
जिला विकास अधिकारी संतोष नारायण गुप्त के आदेशानुसार 9 जनवरी 2026 को पूर्वान्ह 11 बजे सकरन ब्लॉक कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराए गए कार्यों की विस्तृत जांच की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 1 अप्रैल 2025 से 15 नवंबर 2025 के बीच कराए गए सभी कार्यों से जुड़े अभिलेख, बिल, वाउचर एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौके पर उपस्थित रहेंगे। साथ ही बीडीओ सकरन की उपस्थिति भी जांच में अनिवार्य की गई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंटरलॉकिंग सहित कई विकास कार्यों में बिना फर्म, बिना मटेरियल विवरण के केवल कागजों पर भुगतान कर दिया गया और कार्य मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शिरीष गुप्ता पूर्व में महमूदाबाद में मनरेगा मटेरियल भुगतान घोटाले में दोषी पाए जा चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें पुनः सकरन में तैनाती दे दी गई।
अब 9 जनवरी को होने वाली जांच से यह तय होगा कि यह कार्रवाई महज कागजी खानापूरी साबित होती है या फिर सादे बाउचरों के पीछे छिपा करोड़ों का खेल सच में उजागर होगा। पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हुई हैं।

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