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राजमाता सुमित्रा देवी की पुण्य तिथि पर राजा साहेब डॉ सन्तोष कुमार मिश्रा ने सैकड़ों गरीबों को बाटे कंबल और हुआ रक्त दान

 राजमाता सुमित्रा देवी की पुण्य तिथि पर राजा साहेब डॉ सन्तोष कुमार मिश्रा ने सैकड़ों गरीबों को बाटे कंबल और हुआ रक्त दान

आइडियल इंडिया न्यूज़
संजय पांडेय सरस, प्रमुख संपादक,आजमगढ़


बिंद्रा बाजार,। ठेकमा ब्लॉक के बालपुर ख़रैला में एम एस डी पॉलिटेक्निक कैंपस में एम एस डी ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन डॉ सन्तोष कुमार मिश्रा राजा साहेब ने अपनी माता, राज माता सुमित्रा देवी के द्वितीय पुण्य तिथि 2 जनवरी को 556 गरीब महिला व पुरुष को कंबल वितरण किया। इस अवसर पर ब्लड कैम्प में दर्जनों की संख्या में लोगों ने रक्त दान किया। सर्व प्रथम राजा साहब ने राजमाता सुमित्रा देवी व महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। उसके बाद पूरा कैंपस राजमाता सुमित्रा देवी और महराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा अमर रहे की नारे से गूंज उठा। इस कार्यक्रम में गांव क्षेत्र के हजारों लोग आए थे।

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 कार्यक्रम का संचालन अवधेश शर्मा एडवोकेट ने किया। उसके बाद वक्तागण में अरुण पाठक, अर्जुन राय, डॉ राजेश उपाध्याय, राकेश तिवारी व्यास, रविन्द्र कुमार मिश्रा, चंद्रजीत राजभर, अभिषेक उपाध्याय, विंध्यवासिनी तिवारी, रविकांत तिवारी ने विचार रखे। डॉ सन्तोष कुमार मिश्रा राजा साहब ने अपने माता व पिता के बारे में बोलते हुए कहा कि मेरी माता कभी भी पक्षपात नहीं की, चाहे घर का विवाद हो , चाहे बाहर का, चाहे अपने बच्चों का हो, चाहे भाई भतीजा का । वो सबके साथ एक समान दृष्टि से समझाती थी। मेरी माता बहुत ही निडर और साहसी थी। कितना भी संकट हो कभी विचलित नहीं होती। मैने उनके गुण का अनुसरण किया। और उनके नाम से 2010 में एम एस डी पॉलिटेक्निक कॉलेज, एम एस डी आदर्श होम्योपैथी कॉलेज, मां विंध्यवासिनी सुमित्रा देवी एजुकेशनल ट्रस्ट और पिता के नाम पर भी पंo त्रिपुरारी मिश्रा महाविद्यालय और पंडित त्रिपुरारी मिश्रा फार्मेसी कॉलेज की स्थापना किया। मेरे पिता भी आज से 40 साल पहले कलंदरपुर में जूनियर हाई स्कूल की स्थापना कर समाज को शिक्षित करने का कार्य किए । और मैं भी उनके पद चिन्हों पर चल कर शिक्षा और समाज के लिए कार्य कर रहा हूं।
मेरे बाबा रामनाथ जी भी ब्रिटिश काल में चार भाषा हिंदी संस्कृत अंग्रेजी उर्दू के प्रकांड विद्वान थे जो रेलवे विभाग में सरकारी सेवा किए, उनके चार पुत्र हुए स्व गौरी शंकर मिश्रा, स्व रामप्यारे, महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा और राम उग्रह मिश्रा,जिनका यह रिकॉर्ड है कि ये चारों भाई सरकारी सेवा में थे।और हम दोनों भाई भी सरकारी सेवा में है।
मैं अपने माता पिता को भगवान मानता हूं उनका साथ छूट गया है लेकिन उनका आशीर्वाद सदैव मेरे ऊपर बना है।उनकी स्मृति में मूर्ति स्थल का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी और सभी लोगों से यह निवेदन करता हूं कि आप अपने माता पिता का आदर और सम्मान जरूर करें। अंत में राजा साहब ने सभी लोगों को आभार प्रकट किए। कंबल वितरण और मिष्ठान वितरण के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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