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हज़रत बड़े मखदूम साहब के पिता हज़रत काज़ी बदरुद्दीन शाह उर्फ बुड्ढन मियां उन्नाव के सज्जादा नशीन सैय्यद ज़िया अलवी एक साहिबे दीवान शायर का निधन, शोक संवेदनाओ का सिलिसला जारी, जिया अलवी एक शख्सियत के मालिक थे

हज़रत बड़े मखदूम साहब के पिता हज़रत काज़ी बदरुद्दीन शाह उर्फ बुड्ढन मियां उन्नाव के सज्जादा नशीन सैय्यद ज़िया अलवी एक साहिबे दीवान शायर का निधन, शोक संवेदनाओ का सिलिसला जारी, जिया अलवी एक शख्सियत के मालिक थे


आइडियल इंडिया न्यूज़ 
काजिम हुसैन ,खैराबाद सीतापुर

खैराबाद की ऐतिहासिक पवन धरती पर सूफी घराने में सात जून उन्नीस सौ चौसठ को जन्मे खैराबाद की अदबी साहित्यिक संस्था खैराबाद फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य, अध्यक्ष तथा हज़रत बड़े मखदूम साहब के पिता क़ाज़ी बदरउद्दीन उर्फ बुड्ढन मियां उन्नाव के सज्जादानशीन तथा बड़े मखदूम साहब की दरगाह कमेटी के सदस्य तथा अपने जमाने के प्रसिद्ध शायर स्वर्गीय जुंबिश खैराबादी के शिष्य सैय्यद ज़िया अलवी  जिनकी प्रारंभिक शिक्षा क़स्बा खैराबाद में ही हुई उसके बाद बड़ी मेहनत मशक्कत करके काम किया और उसके बाद नौकरी की तलाश में दिल्ली गए वहां पर कस्बे के ही साथी मजाज़ सुल्तानपुरी और वासिफ सिद्दीकी से मुलाक़ात हुई सभी साथ में रहते उठते बैठते और इसके बाद दिल्ली की मशहूर दवा कम्पनी हिमालया ड्रग्स कम्पनी में बड़े ओहदे पर फ़ायज़ हुए और तीन साल क़ब्ल 2022 में वहां से 58 साल की आयु में सेवा निवृत हो कर खैराबाद चले आए और यहां पर अदबी महफिलों को आयोजित करना शुरू किया जिससे बहुत से लोग जुड़ गए फिर अचानक वो चराग बुझ गया और दिनांक 18 जनवरी 2026 को अचानक हार्ट अटैक से निधन से हो गया, जिससे क़स्बा खैराबाद के अलावा दूर दूर तक आपके सोग में लोग डूबे हुए हैं तथा बहुत सी खानकाहों दरगाहों साहित्यिक संस्थाओं में मदरसों तथा शायरी के मैदान में एक बहुत बड़ी कमी पैदा हो गई जिसका हर स्तर पर शोक मनाया जा रहा है और एक ही बात सभी की ज़ुबान पर है कि खैराबाद में अदब और साहित्य को आगे बढ़ाने वाले इंसान का अचानक चले जाना निहायत रंजो गम की बात है, सैय्यद ज़िया अलवी के सुपुत्र सैय्यद लारैब अलवी और उनके छोटे भाई सैय्यद मोईन अलवी जो इंकलाब उर्दू अख़बार के मार्केटिंग हेड हैं ने कहा कि मुझे तो यक़ीन ही नहीं हो रहा कि मेरे अब्बा और मेरे भाई इतनी जल्दी छोड़कर चले जाएंगे, ज्ञात हो कि स्वर्गीय श्री अल्वी एक साहिबे दीवान शायर के अलावा साहित्य प्रेमी और हिंदी उर्दू शायर व कवियों का हृदय से सम्मान करने वाले व्यक्त थे जिन्होंने गंगा जमुनी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ही खैराबाद फाउंडेशन का गठन किया, आपने कई किताबें भी लिखीं जिन्हें हर मैदान में सराहा गया बल्कि आपने जब 2012 में अपनी शायरी की एक पुस्तक तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को पेश किया तो आपने बहुत सराहते हुए प्रशंसा की और उज्जवल भविष्य की कामना की साथ ही फिल्मी दुनिया के डायरेक्टर सैय्यद मुजफ्फर अली जिनसे आपकी दोस्ती भी थी उन्होंने भी बहुत सराहा।

           

         तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को पुस्तक पेश करते हुए सैय्यद ज़िया अलवी, फिल्म डायरेक्टर मुजफ्फर अली के साथ सैय्यद ज़िया अलवी,
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61 वर्षीय सैय्यद ज़िया अलवी के निधन से जो कमी आई है वो बहुत जल्द पूरी होने वाली नहीं है, 18 जनवरी को शाम 8 बजे दिल्ली में उनके निज निवास में हुआ जहां से उनके पार्थिव शरीर को खैराबाद लाया गया जहां पर सुबह से शाम तक दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा और सायंकाल 4 बजकर 45 मिनट पर दरगाह हज़रत बड़े मखदूम साहब में नमाज़ जनाज़ा आपके बेटे के ससुर मौलाना सैय्यद एहसानुल्लाह सफ़वी ने अदा कराई और वहीं आपको सुपुर्दे ख़ाक किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न दरगाहों को सज्जादा नशीन में रुदौली के सैय्यद सुबबू मियां,मझगांवा शरीफ़ के सैय्यद आतिफ मियां दानिशी, शाह मीना लखनवी के राशिद अली मीनाई, सफीपुर के नवाज़िश मोहम्मद फारूकी समदी मियां, अफजाल मियां फारूकी, बांसा शरीफ़ के सैय्यद उमर रज्जाकी, बड़े मखदूम साहब के शोएब मियां, छोटे मखदूम साहब के मदनी मियां, मजा शाह क़लन्दर लहरपुर के सैय्यद गयास मियां,तीर गांव बाराबंकी के हाजी सूफी सैय्यद इजहार अली, फर्रुखाबाद के कारी सैय्यद फसीह मुजीबी, दरगाह हज़रत असलम मियां के सैय्यद फरजान मियां सैय्यद सलमी मियां, मदरसा आरिफिया सैय्यद सरावां इलाहाबाद के मौलाना सैय्यद एहसानुल्लाह सफ़वी,मौलाना हसन सफवी,खीरी के सैय्यद मुमताज़ मियां,आसीवन के सैय्यद जीलानी मियां, शुजा मियां, खानकाह अलीमिया सफीपुर के सैय्यद शोएब अलीम बक़ाई, सैय्यद तरीक मियां, खीरी के मुश्ताक अहमद मुश्शन मियां, एजाज़ अहमद एडवोकेट, आदि उपस्थित हो कर पुरनम आंखों से रुखसत किया जबकि सियासी तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि बबलू अभिषेक गुप्ता, बिसवा के समाजवादी प्रत्याशी अफजाल कौसर, साबिक एम एल ए अनूप गुप्ता, सतीश जायसवाल लहरपुर एम एल ए अनिल कुमार वर्मा जबकि पत्रकारों में नया दौर के पूर्व संपादक सोहेल वहीद, वरिष्ठ शिक्षक लेखक सैय्यद फरीद बिलग्रामी,राम सुमिरन शर्मा ,खुशतर रहमान, शरद कपूर,नीरज श्रीवास्तव, जयमल सिंह,अरुण मिश्रा,अंकित गुप्ता, काज़िम हुसैन,मोहम्मद अफजल, दानिश अली, सरकार आलम, जीशान कदीर, के अलावा शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार लेखक शिक्षक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित जमीयत उलमाए हिंद सीतापुर तथा बज़्म उर्दू सीतापुर के अध्यक्ष मस्त हफीज़ रहमानी ने शोक संवेदना में कहा कि ज़िया अल्वी का बचपन हमारे सामने गुजरा वो बहुत ही अच्छे और सादा मिज़ाज के व्यक्ति थे उर्दू हिंदी शायरी और साहित्य प्रेमी थे उन्हें दिल की गहराइयों से खिराजे अकीदत पेश करता हूं इसके अलावा दरगाह हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के सैय्यद यामीन हाशमी साहब और महबूब इलाही निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के सैय्यद फरीद निजामी, सैय्यद फ़खर अहमद, फिल्म डायरेक्टर मुजफ्फर अली ने गहरे रंजो ग़म का इज़हार किया ।

          


इसके अलावा शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में सैय्यद फरहान वास्ती, फैज़ खुमार बाराबंकी, फना रिज़वी हैदर, वरिष्ठ शायर वासिफ फारूकी, शायरा व कवित्री कविता सेठ, इसके अलावा क़स्बा की शाही ईदगाह के मुतवल्ली इकराम हुसैन, डॉक्टर सैय्यद आसिफ अली,चिश्तिया सूफी दर के कारी इस्लाम आरफी, मौलाना मुफ्ती आफताब आलम नदवी,मुफ्ती इलियास अहमद, मुफ्ती मुजाहिद कासमी, मुफ्ती बहाउद्दीन कासमी, सैय्यद साबीक किरमानी, वरिष्ठ शायर डॉक्टर अब्दुल अज़ीज़ अर्चन,महबूब आलम,निसार अहमद अंसारी,सैय्यद लईक किरमानी आदि ने गहरे रंजो ग़म का इज़हार करते हुए अफ़सोस व्यक्त किया है। यह भी ज्ञात रहे कि सैय्यद ज़िया अलवी ने कई किताबें भी लिखीं जो प्रकाशित भी हो चुकी थीं एक किताब जो सुल्तान सैय्यद मोहम्मद आरिफ मियां भईया के जीवन चरित्र पर आधारित है आरिफ़ ए इरफा यह भी प्रकाशित होने वाली थी परंतु क़ुदरत को कुछ और ही मंजूर था उसने इस 61 साला सैयद ज़िया अलवी को अपने पास बुला लिया और एक तारीख का हिस्सा बन गए

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