आगामी विधानसभा के लिए अयोध्या में दिग्गजों की दावेदारी ने भाजपा के सियासी गलियारे का बाजार गर्म कर दिया है
कैडर के नेता विनय कटियार, लल्लू सिंह और ऋषिकेश की दावेदारी से शीर्ष नेतृत्व पर रहेगा दबाव
आइडियल इंडिया न्यूज़
राजेश कपूर, अयोध्या
अयोध्या। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विनय कटियार की अयोध्या विधानसभा से दावेदारी ने भाजपा में सियासी गलियारे का बाजार गर्म कर दिया है। विनय कटियार 3 बार लोकसभा और 2 बार राज्य सभा से सांसद, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव का सफर तय कर चुके वही लल्लू सिंह 5 बार विधानसभा 2 बार लोकसभा की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। दोनों खाटी की उपज है ।इनकी गिनती पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप मे होती हैं। वही ऋषिकेश उपाध्याय विद्यार्थी परिषद से होकर भाजपा के प्रथम महापौर रह चुके
अगर नेतृत्व ने दी कैडर को तरजीह तो वेद प्रकाश गुप्ता के लिए कठिन हो सकता है विधानसभा का सफर।
राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व गुटबाजी और आयातित नेताओं के ठप्पे से बचने के लिए और विनय कटियार के कद को देखते हुए कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी। उनकी दावेदारी से नेतृत्व पेशोपेश में हो सकता है। वही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अयोध्या प्रथम आगमन पर विनय कटियार के दिखने के बाद उनके स्वागत स्थल तक पहुंचना मंच साझा करना और सीनियर जूनियर की तरफ शिष्टाचार से भेंट करना कटियार के वर्चस्व को दिखा रहा। वही अन्य स्वागत स्थल पर पंकज चौधरी केवल माला पहनकर, फोटो खिंचाते निकल गए।
2017 में लल्लू सिंह के सांसद होने के बाद उनकी सहमति पर मिला था वेद को टिकट
पार्टी के पदाधिकारी का कहना कि 2014 में लल्लू सिंह के सांसद होने के कारण 2017 में लल्लू सिंह की सहमति पर व्यापारी नेता के रूप में वेद प्रकाश गुप्ता को टिकट मिला था। 2017 में विनय कटियार ने विधानसभा की कोई दावेदारी नहीं की थी तो वहीं लल्लू सिंह के सांसद होने के कारण वेद प्रकाश गुप्ता को मौका मिला।
विनय कटियार और लल्लू सिंह के इस बार की दावेदारी से वेद प्रकाश गुप्ता के लिए रास्ता कांटो भरा हो सकता है। लोगों का आरोप है कि वेद के विधायक बनने के बाद महानगर और पार्टी में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। लल्लू की दावेदारी को नेतृत्व के लिए टालना कैडर को हाशिए पर रखना होगा। वही ऋषिकेश उपाध्याय संगठन में अच्छी पैठ रखते हैं और आरएसएस के चहेते है। भाजपा की उपज से निकले ऋषिकेश उपाध्याय की दावेदारी प्रबल होगी। ऋषिकेश को नगर निगम अयोध्या के चुनाव में नेतृत्व ने उनको सम्मान देने का भरोसा दिया था। विधानसभा का उम्मीदवार बना कर शीर्ष नेतृत्व अपनी बातों पर खरा उतर सकता है। पार्टी के लोगों का मानना महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव के कार्यकाल में बढ़ी गुटबाजी।
अयोध्या महानगर के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का इतना बड़ा कार्यक्रम अवध विश्वविद्यालय में रखा गया लेकिन महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव की तरफ से पदाधिकारियों तक को कोई सूचना नहीं दिलवाई गई जिससे महानगर कमेटी के गिनती के पदाधिकारी बैठक में पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष के आगमन पर कार्यकर्ता किस नेता के स्वागत स्थल पर रहे पेशोपेश में रहे। माना जा रहा है कि कार्यकर्ता स्वागत स्थलो पर अलग अलग जगह जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते दिखे वही कार्यकर्ताओं के अंदर यह भी भय था कि हमारा स्वागत स्थल पर खड़ा रहना किसी गुट में न गिन लिया जाए।
राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व गुटबाजी और आयातित नेताओं के ठप्पे से बचने के लिए और विनय कटियार के कद को देखते हुए कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी। उनकी दावेदारी से नेतृत्व पेशोपेश में हो सकता है। वही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अयोध्या प्रथम आगमन पर विनय कटियार के दिखने के बाद उनके स्वागत स्थल तक पहुंचना मंच साझा करना और सीनियर जूनियर की तरफ शिष्टाचार से भेंट करना कटियार के वर्चस्व को दिखा रहा। वही अन्य स्वागत स्थल पर पंकज चौधरी केवल माला पहनकर, फोटो खिंचाते निकल गए।
2017 में लल्लू सिंह के सांसद होने के बाद उनकी सहमति पर मिला था वेद को टिकट
पार्टी के पदाधिकारी का कहना कि 2014 में लल्लू सिंह के सांसद होने के कारण 2017 में लल्लू सिंह की सहमति पर व्यापारी नेता के रूप में वेद प्रकाश गुप्ता को टिकट मिला था। 2017 में विनय कटियार ने विधानसभा की कोई दावेदारी नहीं की थी तो वहीं लल्लू सिंह के सांसद होने के कारण वेद प्रकाश गुप्ता को मौका मिला।
विनय कटियार और लल्लू सिंह के इस बार की दावेदारी से वेद प्रकाश गुप्ता के लिए रास्ता कांटो भरा हो सकता है। लोगों का आरोप है कि वेद के विधायक बनने के बाद महानगर और पार्टी में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। लल्लू की दावेदारी को नेतृत्व के लिए टालना कैडर को हाशिए पर रखना होगा। वही ऋषिकेश उपाध्याय संगठन में अच्छी पैठ रखते हैं और आरएसएस के चहेते है। भाजपा की उपज से निकले ऋषिकेश उपाध्याय की दावेदारी प्रबल होगी। ऋषिकेश को नगर निगम अयोध्या के चुनाव में नेतृत्व ने उनको सम्मान देने का भरोसा दिया था। विधानसभा का उम्मीदवार बना कर शीर्ष नेतृत्व अपनी बातों पर खरा उतर सकता है। पार्टी के लोगों का मानना महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव के कार्यकाल में बढ़ी गुटबाजी।
अयोध्या महानगर के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का इतना बड़ा कार्यक्रम अवध विश्वविद्यालय में रखा गया लेकिन महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव की तरफ से पदाधिकारियों तक को कोई सूचना नहीं दिलवाई गई जिससे महानगर कमेटी के गिनती के पदाधिकारी बैठक में पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष के आगमन पर कार्यकर्ता किस नेता के स्वागत स्थल पर रहे पेशोपेश में रहे। माना जा रहा है कि कार्यकर्ता स्वागत स्थलो पर अलग अलग जगह जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते दिखे वही कार्यकर्ताओं के अंदर यह भी भय था कि हमारा स्वागत स्थल पर खड़ा रहना किसी गुट में न गिन लिया जाए।


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