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सनातन धर्म के विनाशक , कौन? हम आप या कोई और? डॉ दिलीप कुमार सिंह

 सनातन धर्म के विनाशक , कौन?  हम आप या कोई और?

डॉ दिलीप कुमार सिंह 

                        


राजनेताओं के साथ अनेक कलमकारों ने भी सनातन धर्म के साथ जमकर विश्वासघात किया है तमाम फालतू रचनाएं लिखकर जिन्हें खूब बढ़ाया गया जैसे चिमटा ईदगाह ठाकुर का कुआं और न जाने कितनी अनगिनत कहानी कविताएं नौटंकी नाच गाने सनातन धर्म और सवर्ण विरोधी कांग्रेस वामपंथी और अंग्रेजो तथा कुछ अन्य लोगों के इशारों पर आयोजित हुए। ‌ एक कालखंड ऐसा भी आया जिसमें जितने भी गलत और बुरे काम थे उन सभी में केवल ठाकुरों और ब्राह्मणों को ही लिफ्ट दिखाया गया बचपन में हम लोग नाच गाने नौटंकी और अन्य चीज ऐसी ही चीजों से भरा होता था सोने की चिड़िया बनाने वाले ठाकुर ब्राह्मण लाला और बनिया को अत्यंत ही नीच सिद्ध किया गया था क्योंकि विदेशी जानते थे कि बिना इनको नष्ट किया भारत पर हम अधिकार नहीं कर सकते हैं। 

          

वे जानते थे कि जिन लोगों ने पूरी दुनिया को नष्ट बर्बाद करके करने वाले इस्लाम धर्म को 15 00वर्ष तक भारत में रोक कर रखा उनको छल कपट धोखे और आपस में लड़ा कर ही अपना राज्य स्थापित किया जा सकता है।सोचो एक गांव में ठाकुर का एक ही कुआं था हजारों लोग रहते थे ठाकुर साहब किसी को पानी नहीं लेने देते थे इसका अर्थ यह है किया तो गांव में ठाकुर के कई कुए थे या अन्य लोगों के भी हुए थे या लोग पूरे साल भर बिना पानी पिए हवा पीकर रह जाते थे और इस तरह के वाहियात साहित्यकारों को महान कहा जाता है। जिस समाज में बिना सबके सम्मिलित हुए विवाह पूरा ही नहीं होता था उसमें इस प्रकार की छुआछूत और भेदभाव की मनगढ़ंत कहानी लिखना यह दिखाता है कि पैसों के लिए राजनेता ही नहीं भारत के साहित्यकार कुछ ऐसे थे जो कुछ भी कर सकते थे । मान सम्मान पैसा के लिए जन गण मन जैसी रचना लिख दी गई।ऐसा कोई भी विवाह समारोह बता दो या कोई भी शुभ काम जिसमें पत्तल दोना वाले मुसहर बाल बनाने वाला नई और सूप दउरी देने वाला धरिकार भोजन बनाने वाले कुम्हार पानी भरने वाले कर और पत्तल दोना साफ करने वाले लोग नहीं आते थे और खाते भी थे घर भी ले जाते थे। चूड़ी वाले से लेकर कहीं-कहीं ऐसी जातियां थी जिनके बिना आए तो विवाह आगे बढ़ ही नहीं सकता था नाई की स्त्री भी उसमें से एक थी जो आधा पंडित होती थी ।कुछ लोग आक्षेप लगाते हैं कि सबसे पहले ब्राह्मण उसके बाद अन्य लोग खाते थे तो इसमें कौन सी बुरी बात है । पहले में शुद्धता से और नियम कानून से ‌ सच्चरित्र थे आज उनकी ‌ पहले वाली स्थिति नहीं है।क्या सांसद विधायक मंत्री और बड़े अधिकारियों के चेंबर या राज्यसभा विधानसभा में निम्न या उच्च वर्ग के लोग जाकर उनके साथ खा सकते हैं ‌ और सदन के कार्यवाही में भाग ले सकते हैं।यह एक व्यवस्था थी इससे अधिक कुछ नहीं सबका अपना-अपना कर्म था इसलिए समाज लाखों वर्षों तक चलता रहा और हर विदेशी आक्रमण का सामना किया और कभी भी भारत नष्ट बर्बाद नहीं हुआ। आप अपने ही जाति बिरादरी के धनी और अधिकारियों के हैं जाकर देखो क्या जाति के नाम पर आपका उचित मान सम्मान होता है। लेकिन अंग्रेजों के और मुगलों के समय में अपने ही देश के गद्दारों ने अपना ही देश नष्ट करने के लिए फालतू काम करने शुरू कर लिए जिसका फल है कि देश बर्बादी के पगार पर आ गया है ।‌ अंग्रेजों ने भारत के देशद्रोही गद्दारों को मिलाकर गलत इतिहास लिखा गलत व्याख्या किया और बदले में ऐसे लोगों को बड़ी-बड़ी जागीर और सुविधा दिया उन्हें काला अंग्रेज बना दिया और वह अपने ही लोगों से घृणा करने लगे जिस तरह मुस्लिम बना हुआ सनातनी सनातन धर्म को बर्बाद करने के लिए पूरा की जान लगा देता है।जो लोग यह कहते हैं कि अनुसूचित जाति जनजाति दलित पिछड़े लोग और वनवासी लोग भारत में हर अधिकार से वंचित थे तो उनसे पूछना चाहता हूं कि वैदिक ऋचाओं को लिखने वाले ग्रित्जमद वाल्मीकि ऋषि वेदव्यास व सम्मान सूतजी सौनक जी काग भूसुंडी मातंग शबरी रविदास मलूक दास जैसे महान ऋषि मुनि संत महात्मा कैसे हो गए जिनका बड़े-बड़े सम्राट पैर छूते थे और भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी सीता को पूरे पृथ्वी पर ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि आश्रम में ही छोड़ना उचित समझा जबकि एक से बढ़कर एक उच्च वर्ग के ऋषि मुनि विद्यमान थे ।जो लोग कहते हैं कि भारत में महिलाओं के अधिकार नहीं थे उनको शिक्षा से वंचित किया जाता था उनके सफेद झूठ को मैं पूछना चाहता हूं अपाला घोषा विश्ववारा मैत्रेई सीता अनसूया सावित्री नर्मदा ‌ अरुंधति उर्वशी ऐसी नारियां थे जिन्होंने बड़े-बड़े वेद और पुराण लिखे यमराज को पराजित कर दिया समय की गति रोक दिया जब पूरी पृथ्वी के विद्वान राजा जनक की सभा में उपस्थित हुए तो गार्गी ने उन सभी को हरा दिया था जितने भी महान लोग हुए हैं वह स्त्रियों के कारण हुए हैं आधुनिक काल में वीर माता जीजाबाई से लेकर लक्ष्मीबाई अनगिनत उदाहरण है ।‌ आज जब सारी सुविधाएं हैं तब कोई नई क्यों नहीं इनकी तरह महान बन रहे हैं क्योंकि राजनेता ऐसी शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था कर दिए हैं जहां महिलाओं के शोषण के अलावा कुछ नहीं होने वाला है प्राचीन काल में कहा गया था यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता। यह सब सफेद झूठ हमारे राजनेताओं द्वारा अपनी कुर्सी और धन कमाने के लिए आज भी फैलाया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि आज भी इन्हीं नेताओं के कारण 95% दलित लोग और 100% दलित लोग अपने अधिकारों से वंचित होकर मारे -मारे फिर रहे हैं और सनातन धर्म आपस में ही लड़कर नष्ट होने के कगार पर आ गया है इसलिए दिमाग लगाकर सोचकर ही कुछ काम करना चाहिए। आज हमारे राजनेताओं सांसदों विधायक को मंत्रियों प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को जनता की अनुसूचित जाति जनजाति दलित पिछड़े जंगल वासी के लिए इतनी ही चिंता है तो अपना वेतन भत्ता एक चौथाई करके उसे विशाल धनराशि को उनके उपयोग के लिए क्यों नहीं लगते हैं अरबों का अपना गाड़ी बंगला छोड़कर क्यों नहीं झोपड़ी और टिन शेड में रहकर सारा पैसा दलित और निम्न वर्ग के उद्धार के लिए लगाते हैं सरकारी तंत्र का वेतन आधा करके इनका उद्धार क्यों नहीं करते हैं । प्रधानमंत्री सहित सभी राजनेताओं के केवल विदेश यात्रा का खर्चा ही अगर इनके उद्धार में लगाया जाए तो 10 साल में सब सही हो जाएगा यह उद्धार नहीं कर रहे हैं समाज को जाति में लड़ा कर अपनी रोजी-रोटी सेक रहे हैं और कुर्सी तोड़ रहे हैं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं करेंगे केवल समाज में जहर पैदा करके किसी को चैन से रहने नहीं देंगे और खुद भी भी मौत मरेंगे जितना इनका एक दिन का रसमलाई रबड़ी अश्वगंधा शिलाजीत यौन शक्ति वर्धक दवाओं केसर बादाम पिस्ता का नाश्ता भोजन होता है उतने में एक उच्च वर्ग का परिवार पूरे महीने में किसी तरह गुजर बसर करता है। यदि आज की बात देखी जाए तो 90% उच्च वर्ण के लोग और 50 प्रतिशत निम्न वर्ग के लोग रोटी रोजी को मोहताज हैं लेकिन कभी किसी ने इन उच्च वर्ग के ठाकुर ब्राह्मण लाल और बनिया वर्ग की परेशानी दयनीय दशा नहीं देखी कि ऐसे में संविधान मानवता और मानव मूल्यों का क्या महत्व है । असम में व्यवस्था परिवर्तित करके आरक्षण समाप्त करके ‌ शिक्षा में सबको पूरी सुविधा दिया जाए पर नौकरी में कोई भी आरक्षण ना रहे सब कुछ आर्थिक आधार पर किया जाना उचित है। सबसे दुख और कष्ट की बात है कि अधिकांश दलित पिछड़ी अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ी जातियों के वे लोग ही आगे बढ़े हैं ‌ 99% लोग इन्हीं के घर के सरकारी नौकरी से लेकर राजनीति में सक्रिय हैं और उसमें भी कुछ जातियों के लोग जैसे कि यादव मीणा सबसे अधिक लाभ प्राप्त किए हैंजिनका घराना पहले से ही हर प्रकार से संपन्न था और व्यवहार में आप देख सकते हैं कि एक निम्न वर्ग का सांसद विधायक मंत्री और अधिकारी अपने उच्च वर्ग के अधीनस्थ लोगों से उससे कई गुना अधिक पूरा व्यवहार करते हैं जितना ठाकुर ब्राह्मण लाला और बनिया लोग अपने अधीन निम्न वर्ग के लोगों से करते हैं । प्राचीन भारत में वर्ण व्यवस्था इस तरह थी जैसे आज पुलिस प्रशासन न्याय और अन्य व्यवस्था अलग-अलग है इससे यह फायदा होता था कि पीडिया तक शताब्दियों तक लगातार काम करते-करते व्यक्ति पूरी तरह अपने व्यवसाय में पारंगत हो जाता था जैसे लड़ने वाले लड़ाई में पढ़ने वाले वेद पुराण में कृषि करने वाले कृषि में और व्यापार करने वाले दुनिया के सबसे सफल व्यापारी बनते थे इससे अधिक कुछ नहीं था विराट भारत देश में जाति व्यवस्था एक पहचान और वैवाहिक संबंध के लिए बनी और जैसे-जैसे यह जाति व्यवस्था कमजोर होती गई देश विदेशी शक्तियों का गुलाम बांटा गया आज देश के राजनेता ही इसे तोड़कर 2047 तक भारत को मुस्लिम देश बनाने का भीषण षड्यंत्र कर रहे हैं।


और अंत में मैं यह कहना चाहूंगा कि उच्च वर्ग और निम्न वर्ग जातियां अगड़े और पिछड़े का भेद सब काल्पनिक है और पहले अंग्रेजों और मुसलमानों फिर उनकी पीढ़ी को आगे ले जाने वाले राजनेताओं द्वारा फैलाया गया है पूरे समाज में घूम कर देख लो जो दलित पिछड़ा अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य जातियों का व्यक्ति सांसद विधायक अधिकारी नेता मंत्री है उसका कहीं से कोई अपमान नहीं है बल्कि वह सवर्ण लोगों को तो छोड़ो अपने ही वर्ग के लोगों को गंदी नाली नाबदान का कीड़ा समझता है भगवान राम ने तो शबरी के झूठे बेर सार्वजनिक रूप से खाए थे जरा किसी सांसद विधायक मंत्री प्रधानमंत्री से कह दो कि किसी दलित महिला के झूठी थाली में बैठकर खाकर दिखा दे बाकी मैं आप लोगों के ऊपर छोड़ देता हूं।‌ यह मक्कार नेता किसी दलित के घर भोजन का नाटक करके उसको बाहर से बनवा कर खाते हैं और दिखाते हैं कि हमने दलित के घर भोजन खा लिया मानो कोई एहसान कर दिए हैं यह नहीं देखे कि वह उन्हीं के कारण दीन हीन गरीब और निर्धन है।इसलिए राजनेताओं के चक्कर में मत पड़ो जिसके पास पैसा धन पद प्रतिष्ठा जमीन जायदाद या प्रतिभा विशेष होगी उसी का मान सम्मान आदर होगा चाहे वह उच्च वर्ग का हो चाहे निम्न वर्ग का हो ‌ नहीं तो आज के जमाने में विवाह भी होना मुश्किल है किसी निर्धन का चाहे वह उच्च वर्ग हो या निम्न वर्ग हो अन्यथा इसी तरह आपस में लड़ाई करके नेताओं और अधिकारियों का घर भरते रहो किसी का क्या जाता है‌ यह बताओ कि किसी भी उच्च निम्न वर्ग के वे लोग जो दीन-हीन गरीब निर्धन हैं उनके घर कितने सांसद विधायक नेता प्रधानमंत्री सुख या दुख के समारोह में सम्मिलित होते हैं-डॉ दिलीप कुमार सिंह

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