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बिना वैकल्पिक व्यवस्था ट्रेनिंग पर भेजा डॉक्टर, मरीज लौटे खाली हाथ

 बिना वैकल्पिक व्यवस्था ट्रेनिंग पर भेजा डॉक्टर, मरीज लौटे खाली हाथ

आइडियल इंडिया न्यूज़ 

मो अनवर खान, बहराइच 

                   


बहराइच। विकास खण्ड नवाबगंज अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाबागंज में डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला अब केवल एक डॉक्टर की गैरहाजिरी का नहीं, बल्कि सीएमओ बहराइच और प्रभारी अधीक्षक की सीधी प्रशासनिक विफलता का बन चुका है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब स्थानीय मीडिया कर्मियों की टीम पीएचसी बाबागंज पहुंची, तो मौके पर डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली। न कोई चिकित्सक, न कोई सूचना, और न ही मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना नियंत्रण और निरीक्षण के छोड़ा गया था। आयुष चिकित्सक डॉ. सुरेश गुप्ता ने फोन पर बताया कि वह बहराइच में ट्रेनिंग पर हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि

क्या सीएमओ और प्रभारी अधीक्षक की अनुमति के बिना कोई डॉक्टर ट्रेनिंग पर जा सकता है? और यदि अनुमति दी गई थी, तो बाबागंज पीएचसी में वैकल्पिक डॉक्टर की तैनाती क्यों नहीं की गई? डॉक्टर की खाली कुर्सी की तस्वीर जब सीएमओ बहराइच और प्रभारी अधीक्षक को व्हाट्सएप पर भेजी गई, तब जाकर विभाग हरकत में आया। इसके बावजूद मरीज देवेंद्र मिश्र, ए.के. पाठक, बंधना और रामनवमी सहित कई लोग घंटों इंतजार के बाद बिना इलाज के वापस लौट गए। यह दृश्य सीएमओ कार्यालय से की जा रही निगरानी के दावों पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। सूचना मिलने के लगभग आधे घंटे बाद डॉक्टर विवेक कुमार स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन तब तक मरीज जा चुके थे।सवाल यह उठता है कि यदि मीडिया न पहुंचता, तो क्या डॉक्टर कभी आते?क्या स्वास्थ्य सेवाएं केवल अधिकारियों के फोन कॉल से संचालित होती हैं?

स्थानीय पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले में केवल अधीनस्थ डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। सीएमओ और प्रभारी अधीक्षक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, क्योंकि पीएचसी की दैनिक मॉनिटरिंग, डॉक्टरों की उपस्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी सीधी जिम्मेदारी है।मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि बाबागंज पीएचसी किसके आदेश पर और किसकी लापरवाही से डॉक्टर विहीन छोड़ा गया। जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजों तक सीमित रहेंगी।

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