मुख्यमंत्री योगी जी का सीतापुर की पावन धरा आना कोई अनायास नहीं,दे गया एक साथ कई संदेश
आइडियल इंडिया न्यूज
शरद कपूर समाचार संपादक
सीतापुर । बीते दिवस मा मुख्यमंत्री जी का सीतापुर के तपोधाम आश्रम मे आना अनायास ही नही है ,इसके पीछे के कई सियासी और प्रशासनिक निहितार्थ भी है। जिसको लेकर शहर से लेकर दूर दराज क्षेत्र तक में चर्चाओं का दौर जारी है, कल तक जो लोग सदर विधायक जी का भाजपा में कद कमतर आंक रहे थे माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अचानक सीतापुर आने और उनके संबोधन ने लोगों को अपनी राय बदलने पर मजबूर कर दिया है।
तकरीबन 70 बरस पहले शहर के लोनियनपुरवा में करीब 5 एकड़ के विस्तृत भू भाग पर फैला ये आश्रम आज भले ही संकरी गलियों के बीच हो, बाहर से देखने पर इसकी विशालता का अंदाजा भले ही न होता हो लेकिन अंदर जाने पर आपको इसकी विशालता का अंदाजा होता है ,शहर के मध्य के इस भू भाग की आज की कीमत कई सौ करोड़़ में है।यही कारण है कि अरसे से ये जगह भू माफियाओं और शहर के प्रभवशाली लोगों की बड़ी पसंद रही है, कभी एक माननीय का यहीं पर चुनाव कार्यालय हुआ करता था। उनकी गाड़ियों का अरसे तक गैराज भी रहा है। 2017 मे सरकार बदलने के बाद यहां के कर्ता धर्ता लोगों ने इसको कब्जेदारों से मुक्त कराने के प्रयास किए लेकिन स्थानीय स्तर पर नये लोगों की दृष्टि इस भूमि पर लग जाने से वो मुमकिन न हो सका , हालांकि बाद के सालो मे दुबारा सरकार बनने और शहर विधायक के रूप मे गुरुजी के निर्वाचित होने के बाद मामला मुख्यमंत्री जी के संज्ञान तक पहुंचा था। इसके बाद यहाँ के कब्जेदार स्वतः भाग लिए ,इस तरह से इस स्थान को बचाने मे सदर विधायक और मंत्री गुरूजी की बड़ी भूमिका रही। पिछले कुछ दिनों मे शहर मे जिस तरहसे टाउन हाल , रम्पा महल और लाल कपड़ा कोठी को लेकर नगर पालिका ने खेल खेला ,उसके बाद मंदिर से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ गई थीं। जिसके बाद आयोजको और मंत्री जी ने मुख्यमंत्री जी को यहां बुलाकर ये साफ संदेश दे दिया कि भू माफियाओं या इस भूमि पर नजर गड़ाए लोगों को यहां से दूर ही रहना होगा।
ये सच है कि इस स्थल को बचाने मे मंत्री गुरूजी की बड़ी भूमिका रही ,लेकिन मुख्यमंत्री जी ने गुरूजी की प्रसंशा कर इस बात का साफ संकेत दे दिया कि जनपद मे अन्य ओबीसी सियासत खास तौर से तेली समाज मे उनकी पहली पसंद गुरूजी ही हैं। जनपद के ही कुछ माननीयों का एक खेमा जो तेली बिरादरी के ही गुरूजी के नामाराशि को बीजेपी मे लाने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है उसको मुख्यमंत्री जी का साफ संदेश है कि वो न तो 2017 से 22के उनके रवैये को भूले हैं और न ही वायरल ऑडियो को। उन्होंने मंत्री राकेश राठौर "गुरु" के कद को जनपद में सबसे बड़ी लकीर के तौर पर स्थापित कर अपने और विपक्षी दोनों दलों के महत्वकांक्षी नेताओं को धरातल पर लाने का काम किया है।
27 का चुनाव भले ही अभी दूर हैं लेकिन मुख्यमंत्री जी के उदबोधन ने ये साफ कर दिया कि अगर कोई मंत्रिमंडल विस्तार चुनाव के पहले हुआ तो गुरूजी को कोई खतरा नहीं है।
और जो लोग कल तक गुरूजी को किस विषय का गुरु पूँछ रहे थे उनको भी जवाब मिल गया कि जिले की सियासत के गुरु तो गुरूजी ही हैं, और राकेश राठौर नाम के ब्रांड के साथ ही पूरे सूबे मे अति पिछड़ा वर्ग के तेली समाज का बीजेपी का प्रतिनिधि चेहरा भी। विपक्षी दलों के नेताओं सहित सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को भी यह स्पष्ट समझ में आ गया है कि भारतीय जनता पार्टी ने जिले में पिछड़े वर्ग के एक और नेता को कद्दावर नेता बनाने का पूरा मन बना लिया है।


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