खेजड़ी कटाई के खिलाफ उबाल, काशीपुर, उत्तराखण्ड से बीकानेर तक गूंजा आक्रोश
आइडियल इंडिया न्यूज़
डा अर्चना मेडेवार, काशीपुर, उत्तराखंड
उत्तराखंड की पावन धरती काशीपुर से विश्नोई सभा सेवक दल एवं राष्ट्रीय जंगल एवं प्रकृति बचाओ अभियान भारत से जुड़े पर्यावरण प्रेमियों का प्रतिनिधिमंडल 2 फरवरी को राजस्थान के बीकानेर स्थित खेजड़ली/खेजड़ी कटाई आंदोलन के महापड़ाव में पहुँचा। इस ऐतिहासिक आंदोलन को देश के लगभग 8 राज्यों से व्यापक समर्थन मिला, जिसमें उत्तराखंड भी मजबूती से शामिल रहा।
उल्लेखनीय है कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर यह आंदोलन एवं धरना 18 जुलाई 2024 से लगातार जारी है। सोलर प्लांटों की स्थापना के नाम पर रेगिस्तानी जीवन रेखा माने जाने वाले खेजड़ी वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने विश्नोई समाज के सब्र का बांध तोड़ दिया है। खेजड़ी वृक्ष केवल पेड़ नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन, पशुपालन और विश्नोई समाज की आस्था का प्रतीक है।
धरनास्थल पर वक्ताओं ने तीखे शब्दों में कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का संहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। खेजड़ी वृक्षों की कटाई ने न केवल पर्यावरणीय संकट खड़ा किया है, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर तत्काल रोक नहीं लगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। महापड़ाव के माध्यम से सरकार को यह साफ संदेश दिया गया कि पर्यावरण के विनाश पर आधारित विकास मॉडल को किसी भी हालत में मंजूरी नहीं दी जाएगी। आंदोलन में अनुराग विश्नोई, ओमप्रकाश विश्नोई, संजीव विश्नोई, विवेक विश्नोई, रवि विश्नोई आदि टीम आंदोलन महापड़ाव बीकानेर में सम्मिलित हुई।डॉ कु अर्चना मेडेवार महाराष्ट्रा प्रदेश अध्यक्ष



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