प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूल विद्यालय कल्याण एसोसिएशन वाराणसी ने डी एम को दिया पत़क
आइडियल इंडिया न्यूज़ वाराणसी जी पी गुप्ता
वाराणसी प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूल विद्यालय कल्याण एसोसिएशन वाराणसी ने आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 121 (1)ग के अंतर्गत अध्यनरत बच्चों के बैक खाते में सुधार करते हुए बच्चों को मिलने वाली सहायता राशि का शत् -प्रतिशत भुगतान एवं शत् प्रतिशत अपार आईडी जेनरेट करने हेतु यूं डायस पोर्टल पर विद्यालय स्तर से संशोधन करने की डी एम,सी,डी,ओ,से किया मांग एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि में वृद्धि के साथ समय से भुगतान करने के संबंध में जिलाधिकारी बाराणसी को दिया पत्रक।
संगठन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि सत्र 2024 -25 में आर टी ई के अंतर्गत अध्ययन रत बच्चों का शासन द्वारा मिलने वाला सहायता राशि शासन के द्वारा शत् प्रतिशत आवंटित होने के पश्चात भी बैंकों के आपसी मर्ज के कारण बदले हुए आई .एफ. एस .सी .कोड, बंद खातों के कारण शत् प्रतिशत भुगतान बच्चों को नहीं मिल रहा ।
विद्यार्थी हित को ध्यान में रखते हुए विद्यालय स्तर पर शत् प्रतिशत संशोधन करने हेतु यु डायस पोर्टल को विद्यालय स्तर से निम्नलिखित बिंदुओं पर संशोधन के लिए छूट देना नितांत आवश्यक है। आधार के अनुरूप बच्चों के नाम के आगे सर नेम जोड़ने वह हटाने तथा कम से कम चार वर्ण विद्यालय स्तर पर संशोधन की सुविधा एस आर के अनुरूप हो।व संशोधन विद्यालय स्तर पर हो।
यु डायस के प्रारंभिक दौर में प्री प्राइमरी ,1,2,3 कक्षाओं में भ्रम की स्थिति के कारण यूं डायस पोर्टल पर विद्यालयो द्वारा गलत कक्षा दर्ज हो गया था। इसलिए कक्षा शिफ्ट करने की सुविधा विद्यालय स्तर पर हो। आर टी ई अधिनियम 2009 लागू होने से अब तक विद्यालयों को मिलने वाला शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि 450/ रुपए प्रतिमाह की भुगतान होता आया है ।जबकि विगत 15 वर्षों से बढ़ती हुई महंगाई के कारण विद्यालयों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।जबकि उत्तर प्रदेश को छोड़कर अन्य प्रदेश में यह धनराशि बढ़कर अधिक हो चुकी है । अतः महंगाई को देखते हुए शुल्क प्रतिपूर्ति ₹2500/- प्रतिमाह करने की कृपा की जाय।
पत्रक देते समय संगठन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता के साथ मातादीहल पांडे ,रविकांत, अजय कुमार गुप्ता,दीपक कुमार गुप्ता, रविंद्र नाथ, अंजनी यादव, अमरनाथ यादव, अशोक सिंह, बंशीलाल चौधरी,गोपाल प्रसाद गुप्ता एडवोकेट इत्यादि सैकड़ों की संख्या में थे।

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