आयुर्वेद के अनुसार वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन: शरीर को बचाने और सशक्त बनाने का स्वर्णकाल!
इन दिनों क्या करें, क्या न करें
आइडियल इंडिया न्यूज़
डा कमल कुमार कश्यप समाचार सम्पादक, रांची
जब शीत ऋतु अपने चरम पर होती है, तब आयुर्वेद इसे केवल ठंड का मौसम नहीं, बल्कि शरीर की अग्नि, बल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा का समय मानता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्ष के सबसे ठंडे 14 दिन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। यह समय प्रायः पौष–माघ संधि (जनवरी के आसपास) आता है, जब सूर्य की उष्णता न्यूनतम और वातावरण में शीत अधिकतम होता है। 8 जनवरी से 21 जनवरी तक -️ यह तिथियाँ हर वर्ष 1–2 दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, लेकिन यही काल सबसे अधिक ठंड वाला माना जाता है।
आयुर्वेद क्या कहता है इन 14 दिनों के बारे में?
आयुर्वेद के अनुसार, जब बाहरी ठंड बढ़ती है, तब शरीर की जठराग्नि स्वाभाविक रूप से प्रबल हो जाती है, क्योंकि शरीर अंदर की गर्मी को बचाने का प्रयास करता है। यही कारण है कि इन दिनों भारी, स्निग्ध और पौष्टिक आहार पचाने की क्षमता बढ़ जाती है।
आयुर्वेदिक श्लोक
“शिशिरे वर्धते वह्निः पवनश्च प्रकोप्यते।”
— चरक संहिता
अर्थ: शीत ऋतु में पाचन अग्नि प्रबल होती है, परंतु वात दोष भी बढ़ने लगता है। इसलिए संतुलन आवश्यक है।
इन 14 दिनों में शरीर के भीतर क्या परिवर्तन होते हैं?
जठराग्नि तीव्र होती है
वात दोष का प्रकोप बढ़ता है
त्वचा शुष्क होने लगती है
जोड़ और नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं
ठंड से कफ जमने लगता है
इसी कारण आयुर्वेद इन दिनों को सावधानी और साधना का काल मानता है।
इन 14 सबसे ठंडे दिनों में क्या करें?
1. उष्ण, स्निग्ध और पौष्टिक आहार लें
घी, तिल का तेल
मूंग दाल, उड़द दाल
गेहूं, बाजरा, ज्वार
गुड़, तिल, मूंगफली
श्लोक
“स्निग्धोष्णं गुरु चान्नं शिशिरे हितमिष्यते।”
अर्थ: शीत ऋतु में स्निग्ध, उष्ण और भारी भोजन हितकारी होता है।
2. अभ्यंग (तेल मालिश) को
🌿*योग से करें मौसम का मुकाबला*-
सर्दी के मौसम में जुखाम और खांसी बहुत आम समस्या है लेकिन योग और प्राणायाम की मदद से आप अपने शरीर को अंदर से मजबूत बनाकर इन परेशानियों से बच सकते हैं।
अगर जुखाम/खांसी के साथ कफ बन रहा हो तो रोज प्राणायाम ज़रूर करें। इसमें लंबी गहरी सांस नाक से लें और धीरे-धीरे मुंह से छोड़ें। ऐसा लगभग 10 से 15 बार करना फायदेमंद होता है। सूर्य नमस्कार करने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे ठंड का असर कम होता है।
*लाभकारी योगासन:-*
•त्रिकोणासन
•भुजंगासन
•कपालभाती
•अनुलोम-विलोम
यदि बीपी या अन्य कोई समस्या हो तो अपनी क्षमता के अनुसार ही योग करें। भुजंगासन पेट के अंदरूनी हिस्सों को एक्टिव करता है और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
*नियमित योग अपनाएँ – स्वस्थ रहें*

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