अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन के नेतृत्व में राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की नई गाइडलाइंस के खिलाफ देशभर के होम्योपैथिक डॉक्टरों का विरोध, रद्द करने की जोरदार मांग
डॉ. ए. के. गुप्ता
आइडियल इंडिया न्यूज़
द्वारका मोड़,नई दिल्ली
नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग) द्वारा हाल ही में जारी अनैतिक एवं कदाचारपूर्ण प्रथाओं की रोकथाम संबंधी गाइडलाइंस के खिलाफ देशभर के होम्योपैथिक डॉक्टरों में भारी रोष और असंतोष व्याप्त है।अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन बैठक में चिकित्सकों ने एक स्वर में इन गाइडलाइंस को पूरी तरह दमनकारी, अव्यावहारिक और होम्योपैथी विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रद्द करने की मांग की। यह बैठक डॉ. डी. सी. प्रजापति के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में वरिष्ठ एवं अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सकों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की गाइडलाइंस संदर्भ में बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होम्योपैथी में कई गतिविधियों को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। इनमें झूठे, भ्रामक, अतिशयोक्तिपूर्ण अथवा गारंटी वाले इलाज के दावे करना एवं ऐसे दावों का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार करना, अस्वीकृत दवाओं, तथाकथित गुप्त नुस्खों अथवा तर्कहीन औषधीय संयोजनों का उपयोग करना तथा होम्योपैथिक दवाओं में अघोषित घटक मिलाना, औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के अंतर्गत प्रतिबंधित दवाओं या विषैले पदार्थों का विक्रय करना, बिना वैध पंजीकरण, मान्यता अथवा प्राधिकरण के क्लिनिक, अस्पताल अथवा जांच केंद्र संचालित करना, लंबी अवधि के उपचार पैकेज बेचकर गंभीर अथवा असाध्य रोगियों का आर्थिक शोषण करना तथा तथाकथित “लास्ट-चांस क्योर” का आश्वासन देना, रोगी द्वारा मांगे जाने पर 72 घंटे के भीतर प्रिस्क्रिप्शन उपलब्ध न कराना, फर्जी डिग्री या पहचान के आधार पर स्वयं को अनुसंधान संस्थान या विशेषज्ञ के रूप में प्रस्तुत करना, वैज्ञानिक आंकड़ों के स्थान पर भावनात्मक रोगी कथाओं, पहले-बाद की तस्वीरों, व्हाट्सएप फॉरवर्ड का उपयोग करना तथा बिना लिखित सहमति के रोगियों की पहचान सहित केस-रिपोर्ट प्रकाशित करना, बिना स्पष्ट जानकारी दिए अन्य चिकित्सा पद्धतियों की दवाएँ लिखना तथा बायोकेमिक साल्ट, जड़ी-बूटी या स्टेरॉयड मिलाना, बिना आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त विशेष योग्यता के स्वयं को विशेषज्ञ बताना, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग से मान्यता प्राप्त न होने वाले प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा, फेलोशिप, क्रैश, ब्रिज या ऑनलाइन पाठ्यक्रम संचालित करना, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निर्धारित टेली-मेडिसिन मानकों का पालन किए बिना रोग का निदान अथवा उपचार करना, सोशल मीडिया पोस्ट, रील, टिप्पणियों, डीएम अथवा लाइव सत्रों के माध्यम से सामान्य या विशिष्ट उपचार सलाह देना, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग, सरकार अथवा किसी विदेशी संस्था से मान्यता या संबद्धता का झूठा दावा करना तथा ऐसा कोई भी अन्य आचरण शामिल है जिसे राज्य चिकित्सा परिषद या राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अंतर्गत होम्योपैथी हेतु नैतिकता एवं पंजीकरण बोर्ड द्वारा कदाचार की श्रेणी में माना जाता है।
डॉ. डी. सी. प्रजापति, अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ने कहा कि नैतिकता के नाम पर बनाई गई यह गाइडलाइन वास्तव में होम्योपैथिक डॉक्टरों के लिए दमन का माध्यम बन गई है। अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन की स्पष्ट मांग है कि इस गाइडलाइन को पूरी तरह रद्द किया जाए। डॉ. नवल कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान गाइडलाइंस के कारण जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे होम्योपैथिक चिकित्सकों को अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नैतिकता और पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन ऐसे नियम भी होने चाहिए जो वास्तविक क्लीनिकल परिस्थितियों और रोगियों की जरूरतों के अनुरूप हों, ताकि चिकित्सक बिना भय के स्वतंत्र रूप से अपने पेशे का निर्वहन कर सकें और समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें।
डॉ. अनुपमा ने कहा कि यह गाइडलाइन अस्पष्ट, एकतरफा और पूरी तरह दंडात्मक है। ऐसे नियमों में सुधार की नहीं बल्कि उन्हें समाप्त करने की आवश्यकता है।डॉ. विकास सिंघल ने कहा कि जब कोई नियम पूरे होम्योपैथिक समाज को असंतुष्ट कर दे, तो उसका लागू रहना ही उचित नहीं है। यह गाइडलाइन डॉक्टरों में डर और भ्रम पैदा कर रही है।डॉ. नेहा काथुरिया ने कहा कि इन सभी प्रावधानों के कारण होम्योपैथिक प्रैक्टिस की स्वतंत्रता प्रभावित होती है और डॉक्टरों के बीच भय व असुरक्षा का वातावरण बन रहा है।
ज्ञापन सौंपने का निर्णय
ऑनलाइन बैठक में निर्णय लिया गया कि अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन तैयार कर राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग एवं संबंधित मंत्रालय को सौंपा जाएगा, जिसमें गाइडलाइंस को पूरी तरह रद्द करने की मांग दर्ज होगी।
ऑनलाइन बैठक में उपस्थित चिकित्सक
डॉ. डी. सी. प्रजापति, डॉ. नवल कुमार वर्मा, डॉ. विकास सिंघल, डॉ. तुषार, डॉ. अनुपमा, डॉ. नेहा, डॉ. धिमिशा,डॉ. ए. के. गुप्ता, डॉ. रश्मि, डॉ. नितिका बंसल, डॉ. हाशित, डॉ. हरप्रीत, डॉ. पूजा वर्मा सहित अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन के सभी कोर टीम सदस्य एवं देशभर के अनेक सम्मानित होम्योपैथिक चिकित्सक ऑनलाइन बैठक में उपस्थित रहे।

0 टिप्पणियाँ