राष्ट्रीय सखी सुलेखनी साहित्य मंच द्वारा महिला दिवस के उपलक्ष में "साहित्य वर्णिता सुलेखनी सम्मान"
आइडियल इंडिया न्यूज़
डा संजीदा खानम शाहीन, जोधपुर
*डा.गीता विश्वकर्मा 'नेह' अध्यक्ष*
राष्ट्रीय सखी सुलेखनी साहित्य मंच द्वारा दिनांक 12-3-2026 को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सभी राज्यों की 15 महिला साहित्यकारों ने भाग लिया । उनकी महिलाओं पर केंद्रित पुस्तकों का अवलोकन कर नारी सशक्तिकरण की दिशा में साहित्यिक और सामाजिक योगदान के लिए "साहित्य वर्णिता सुलेखनी सम्मान" से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन संयोजन सम्मान पत्र का अलंकरण स्वयं संस्था की अध्यक्षा डॉ गीता विश्वकर्मा 'नेह' ने किया। साथ में सह संचालन संंस्था की सह संस्थापिका ,उपाध्यक्षा आ. सीमा गर्ग 'मंजरी' ने किया। कार्यक्रम को बहुत ही अनुशासित ढंग से ढाई घंटे में सफलता पूर्वक पूर्ण किया गया।
सबसे पहले पुस्तक परिचय के साथ आगा़ाज़ किया आ.शिखा पोरवाल जी, बैंकूवर कनाडा से अपनी "मनस्विनी" पुस्तक की रचना पाठ के साथ गद्य और पद्य का अनूठा प्रयोग समझने को मिला। उसके बाद डॉ शिप्रा मिश्रा जी, बेतिया, चम्पारण बिहार की ने अपनी "नहीं रहना मुझे पिंजरबद्ध" पुस्तक से रचना सुनायी। आ.पूनम जैन अग्रवाल 'चांदनी' ,अहमदाबाद ने "नारी न हारी" पुस्तक से रचना पाठ किया । आ.पवनेश कुमार मिश्रा जी, छतरपुर ने अपनी "प्रतिशोध" पुस्तक से रचना सुनाया। वरिष्ठ कवयित्री 18 पुस्तकों की रचयिता आ. ऊषा सक्सेना जी, मुंबई ने "सीतायन" से कुछ अंश प्रस्तुत किये। इसके पश्चात वरिष्ठ कवयित्री संस्था की शान 32 पुस्तकों की मालकिन डॉ सुदेश भाटिया विद्यासागर दिल्ली की "भारत की सिसकती मैना" से रचनापाठ किया जो निर्भया काण्ड पर आधारित पुस्तक है।
इसके बाद डॉ मधु स्वामी, गाजियाबाद ने "ज़िन्दगी की धूप छाँव" से रचनापाठ किया ।
वरिष्ठ कवयित्री डॉ नीरजा मेहता 'कमलिनी' गाजियाबाद ने "ओढ़नी" पुस्तक से सुंदर रचना सुनायी। आ. मीनाक्षी अवस्थी 'छाया', बिलासपुर छग ने अपनी पुस्तक "बिना रुके चलती रही" से खूबसूरत ग़ज़ल सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉ मंजुला साहू 'निर्भीक'जी कोरबा छग ने अपनी पुस्तक "प्रतिबिंबन" से रचना पाठ किया। जो नारी के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित है।इसके बाद आ.वर्षा रावल जी, मुंबई ने "पंखों वाली औरतें" से बहुत ही मीठा गीत सुनायी।
आ. रीना धीमान 'स्वर्ण',नवी मुंबई, "किचन से कार्पोरेट तक" से कविता पढ़ नारी की उड़ान को आसमान तक पहुंचायी। डॉ मोनिका रूसिया,भिलाई,छग ने "महाभारत की जानी अनजानी नायिकाएँ" से अपनी रचना सुनायी जो गद्य और पद्य का अनूठा संगम है।
आ.सीमा गर्ग 'मंजरी' मेरठ कैंट, उप्र ने "त्रिवेणी" पुस्तक जो उन्हीं पर केंद्रित है में से अपनी रचना सुनायी । संस्था में ऐसे शख़्सियत भी हैं जिनके जीवन और साहित्यिक योगदान पर पुस्तक त्रिवेणी लिखी गई है।
अंत में संस्था की अध्यक्षा डॉ गीता विश्वकर्मा 'नेह' बालोद छत्तीसगढ़ कलंगपुर निवासी "वीरांगना बिलासा देवी" पर आधारित पुस्तक से घनाक्षरी दोहे और आल्हा के संयोजन की रचना पाठ किया।
सभी साहित्यकार दो मिनट पुस्तक परिचय 4 मिनट रचना पाठ किए। सभी ने समय के महत्व और अनुशासन को बखूबी निभाया। राष्ट्रीय सखी सुलेखनी साहित्य मंच की सदस्य कवयित्री बहनें श्रोताओं के रूप में पूरे मनोयोग से सबकी रचनाएं सुनी, सराहना किया। और बाद में अपने विचार भी प्रगट किए। जिसमें प्रो लता चौहान बैंगलोर, सविता कुमारी पटना बिहार, सरस्वती मल्लिक मधुबनी बिहार, कविता जैन 'कुहुक' कोरबा छत्तीसगढ़, डॉ ऋतु अग्रवाल मेरठ, डॉ कमलेश मलिक सोनीपत उपस्थित रही। संस्थापिका,अध्यक्ष डॉ गीता विश्वकर्मा 'नेह' को इस नये अनूठे प्रयोग के लिए सभी ने बधाईयां दी। अंत में सह संस्थापिका आ. सीमा गर्ग 'मंजरी' जी आभार व्यक्त कर समापन किया ।


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