BREAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

IDEAL INDIA , IJA

IDEAL INDIA , IJA

ताक रात में इबादत की, आज चौथे जुम्मे की नमाज : सुहेल चिश्ती साहब अजमेर तालीम, अंधेरी रातों में ही सबसे अधिक चमकते हैं सितारे, बोलने का तरीका बताता - कैसे हैं हम

 ताक रात में इबादत की, आज चौथे जुम्मे की नमाज : सुहेल चिश्ती साहब अजमेर

तालीम, अंधेरी रातों में ही सबसे अधिक चमकते हैं सितारे, बोलने का तरीका बताता - कैसे हैं हम 

डॉ कमल कुमार कश्यप समाचार सम्पादक 

दरगाह अजमेर से खास रिपोर्ट 

                 


दरगाह, अजमेर। रमजान में गुरुवार को 22 रोजे मुकम्मल हो गए। तक रात को देखते हुए रोजेदारों ने पूरी रात इबादत की अब शुक्रवार को इस मुबारक महीने में चौथे जुम्मे की नमाज अदा की जाएगी 

दरगाह में शाम को इफ्तार के वक्त रोजगारों की खासी भीड़ नजर आई शाहजहानी मस्जिद परिसर सहित दरगाह के अरकाट का दलान, वजीर अली दलान, अहाता ए नूर और अंजुमन के सामने वाले दलान में रोजगारों के लिए इफ्तार का इंतजाम किया गया था। इधर दरगाह में शुक्रवार को चौथे जुम्मे की नमाज अदा की जाएगी दोपहर में धूप अधिक रहेगी इसे देखते हुए शाहजहानी मस्जिद परिसर और आसपास के एरिया में दरगाह कमेटी में समियाने लगवाए गए हैं शहर काजी मौलाना तौसीफ अहमद सिद्दीकी दरगाह की शाहजहानी मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा कर आएंगे अकबरी मस्जिद में मौलाना गफूर नमाज अदा कराएंगे ।

              



शहर के उन मस्जिदों में भी जुम्मे की नमाज होगी। इसी दरमियान दुर् दराज से आए मेहमान के तौर पर लोगों का दरगाह के मुजावर सुहेल चिश्ती साहब भी अपनी जिम्मेवारी निभाते हुए दरगाह के हर काम में व्यस्त दिख रहे थे। जिनकी जितना भी तारीफ की जाए वह कम ही होगी। सुहेल साहब ने भेंट के क्रम में कहा कि यह तो मालिक का दरबार है इसमें जितना ही हम लोग करें वह काम ही होगा लॉकडाउन के दौरान यहां कोई नहीं आता था लेकिन परवरदिगार के द्वारा यहां जितने गरीब तपके के लोग थे या जितने सम्मानित मुजावर छोटे बड़े भाई थे उन्हें किसी तरह की कमी महसूस नहीं हुई यह ख्वाजा साहब का ही रहमो करम था। 

इसी दरमियान उन्होंने यह भी बताया कि हजरत अली इब्न अबी तालिब इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक है हजरत अली इब्न अबी तालिब का जन्म 13 रजब को हजरत से लगभग 23 वर्ष पहले मक्का में पवित्र काबा के अंदर हजरत अबू तालिब और हजरत फातिमा बिंत असद के यहां हुआ था। 21 रमजान को उन्होंने अंतिम सांस ली इसलिए 21 में रमजान को उनकी शहादत का दिन मनाते हैं । उन्होंने तालीम दी कि आईना नहीं ,इंसान के बोलने का तरीका उसकी असली तस्वीर दिखाती हैं । जिस क्षण मूर्ख के साथ बहुत बात शुरू करते हैं, उसी क्षण हम हार चुके होते हैं । कठिनाइयों को अपने मन में चिंता पैदा न करने दे , सबसे घनी अंधेरी रातों में ही तारे सबसे अधिक चमकते हैं । आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है। इसी दरमियान दरगाह में बैठे रोजदारों में महिला पुरुष सदस्यों ने कहा कि देश के बाहर लगे युद्ध की शांति के लिए भी मालिक से दुआ,आरजू, विनती कर रहे हैं। जिससे पूरे विश्व में अमन शांति कायम हो। क्योंकि इस रमजान के महीने में ब बेगुनाह बच्चों महिलाओं आम जनों को मौत के घाट उतारा जा रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ