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13 देशों के विद्वानों के बीच आजमगढ़ का मान बढ़ाएंगे राम मणि तिवारी और ममता तिवारी

 13 देशों के विद्वानों के बीच आजमगढ़ का मान बढ़ाएंगे राम मणि तिवारी और ममता तिवारी 


सम्मेलन में प्रधानमंत्री, पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू, विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित हिंदी विद्वान होंगे शामिल  

आइडियल इंडिया न्यूज़ 

संजय पांडेय सरस प्रमुख संपादक आजमगढ़ 


             


            श्री राम मणि तिवारी प्रोडक्ट निदेशक 

             बहरीन सरकार, दूरसंचार विभाग

आजमगढ़/मेहनाजपुर। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मेहनाजपुर क्षेत्र के बरवा निवासी स्वर्गीय श्री देवेंद्र तिवारी के पुत्र श्री राम मणि तिवारी और उनकी पत्नी, प्रख्यात साहित्यकार, लेखिका एवं हिंदी विदुषी श्रीमती ममता तिवारी को 30 और 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में सम्मानित किया जाएगा। विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘भारतरत्न अटल: हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों की उपलब्धियों से आजमगढ़, मेहनाजपुर और पूर्वांचल में हर्ष का माहौल है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री, पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू, विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित हिंदी विद्वानों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

                


प्रख्यात साहित्यकार लेखिका एवं हिंदी विदुषी 
श्रीमती ममता तिवारी

इस भव्य आयोजन में विदेश से प्रमुख रूप से भाग लेने वाले अतिथियों में बहरीन से श्री राम मणि तिवारी एवं श्रीमती ममता तिवारी, अमेरिका से डॉ. मृदुल कीर्ति एवं डॉ. दुर्गा सिन्हा उदार, जापान से डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा, ऑस्ट्रेलिया से श्रीमती पूजा भारद्वाज एवं डॉ. मधु खन्ना, कतर से श्रीमती विनीता कंवर, लंदन से श्रीमती वंदना खुराना, मॉरीशस से श्रीमती कल्पना लाल एवं डॉ. भानु लाल तथा इंडोनेशिया से श्रीमती इंदु नांदल प्रमुख रूप से प्रतिभाग करेंगी।


मेहनाजपुर के बरवा निवासी स्वर्गीय श्री देवेंद्र तिवारी के पुत्र राम मणि तिवारी ने बहरीन सरकार के दूरसंचार क्षेत्र में निदेशक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, तकनीकी विकास और डिजिटल प्रौद्योगिकी में व्यापक अनुभव रखने वाले तिवारी ने फाइबर ब्रॉडबैंड, 4G और 5G सेवाओं के साथ-साथ क्लाउड एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उत्पाद विकास के क्षेत्रों में खाड़ी देशों और भारत में योगदान दिया है। कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में वे विजिटिंग प्रोफेसर और एमबीए मेंटर भी हैं।


एक कुशल दूरसंचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी निदेशक होने के साथ-साथ वे हिंदी में काव्य एवं लेखन का कार्य भी करते हैं।वहीं, श्रीमती ममता तिवारी एक प्रतिष्ठित लेखिका, साहित्यकार, हिंदी विदुषी, फैशन डिजाइनर और उद्यमी हैं। वे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी हैं तथा हिंदी भाषा, साहित्य और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दे रही हैं। साहित्यिक अभिरुचि, रचनात्मकता और उद्यमशीलता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की विशेषताएं हैं।


विश्व हिंदी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. डी.पी. मिश्रा ने कहा कि अटल जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हिंदी के वैश्विक नायक और सुशासन के पर्याय थे। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण आज भी राष्ट्रवाद की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से अटल जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर हिंदी को विश्व मंच पर और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा। विज्ञान भवन का यह आयोजन हिंदी के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।


विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह ने कहा कि यह सम्मेलन अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। विज्ञान भवन में देश-विदेश के विद्वानों का संगम हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन की तैयारियां पूर्ण हैं।


सम्मेलन में हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार, राष्ट्रवाद, सुशासन, साहित्य, पत्रकारिता और शोध जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इस अवसर पर राम मणि तिवारी और ममता तिवारी को उनके योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया जाएगा।


अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक एवं हिंदी जगत में राम मणि तिवारी और हिंदी साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में ममता तिवारी की उपलब्धियां आजमगढ़, मेहनाजपुर और व्यापक पूर्वांचल के लिए गौरव का विषय हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि अपनी जड़ों, भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशिष्ट पहचान बनाई जा सकती है।



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