रमजान एक ऐसा चंद्रमा, जो अंधेरे को रोशन करता, व दिलों को जोड़ने मैं अहम भूमिका : सुहेल चिश्ती साहब अजमेर
आइडियल इंडिया न्यूज़
डॉ कमल कुमार कश्यप समाचार संपादक
दरगाह, अजमेर। रमजान इस्लाम धर्म का सर्वाधिक पवित्र महीना है ।यह हिजरी कैलेंडर का नौंवा महीना होता है, इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास यानी रोजा रखते हैं यह केवल शारीरिक भूख प्यास का त्याग नहीं बल्कि आध्यात्मिक शुद्ध और अल्लाह की इबादत का प्रतीक है ।
धार्मिक दृष्टि से रमजान का महत्व अत्यंत गहरा है, इसी महीने पैगंबर मोहम्मद साहब पर कुरान शरीफ का अवतरण हुआ था । यह महीना कुरान की लिलावत, तराबीह की नमाज और विशेष इबादतों से भरा होता है। लैलतुल कद्र, जिसे 'शब -एक - कद्र" कहा जाता है । उक्त बातें दरगाह अजमेर के सुहेल साहब ने भेंट वार्ता के क्रम में आइडियल इंडिया न्यूज़ के समाचार संपादक से कहीं। इस महीने की एक रात है जो हजार महीनों से उत्तम मानी जाती है।
इसमें दुआएं कबूल होती है रोजा रखने से इंसान अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण सीखना है। गुस्सा, झूठ ,और बुराइयों से दूर रहता है। जकात और सदका देना इस महीने का अनिवार्य हिस्सा है।जो अल्लाह की राह में दान को प्रोत्साहित करता है, रमजान सामान्य भाईचारे और सहानुभूति का उत्सव है।अमीर गरीब सभी एक साथ रोजा रखते हैं जिससे गरीबों की पीडा समझ में आती है। सामूहिक इफ्तार व नमाज से सामाजिक एकता मजबूत होती है। रमजान वास्तव में एक ऐसा चंद्रमा है, जो अंधेरे को रोशन करता है वह दिलों को जोड़ता है।
माह, ए, रमजान में मुस्लिम महिलाएं इबादत, और, रियासत, में पुरुषों से पीछे नहीं है रोज पांच वक्त की नमाज और कुरान पाक की लीलावत के साथ हुए घर परिवार की जिम्मेदारियां को भी वह खूबी निभा रही है। भोर में उठने से लेकर देर रात तक उनकी दिनचर्या इबादत और घरेलू कामकाज में व्यस्त रहती है। दरगाह परिसर अजमेर में उपस्थित सुहेल चिश्ती साहब का परिवार के साथ संयुक्त रूप से मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि रमजान का महीना इबादत और आध्यात्मिक शुद्धि का समय होता है ऐसे में वह इबादत के साथ घर परिवार की जिम्मेदारियां को निभाते हुए इस पवित्र रमजान महीने की अहमियत को पूरी श्रद्धा के साथ निभाती है।



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