जनपद के जनप्रिय डीआईजी और एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी जी के स्थानांतरण का समाचार सुनकर पत्रकारों , शुभेच्छुओं एवं बुद्धिजीवियों में मायूसी का माहौल व्याप्त हो गया । - Ideal India News

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जनपद के जनप्रिय डीआईजी और एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी जी के स्थानांतरण का समाचार सुनकर पत्रकारों , शुभेच्छुओं एवं बुद्धिजीवियों में मायूसी का माहौल व्याप्त हो गया ।

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Mohd Kamran Monu
प्रयागराज 
 जनपद के  जनप्रिय डीआईजी और एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी जी के स्थानांतरण का समाचार सुनकर पत्रकारों , शुभेच्छुओं एवं बुद्धिजीवियों  में मायूसी का माहौल व्याप्त हो गया ।ऐसा लगने लगा जैसे कोई उनका बहुत बड़ा हितैषी ,मददगार और संरक्षक उसे दूर होता जा रहा है ।




उल्लेखनीय है कि  सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी जी का कार्यकाल जनपद प्रयागराज में  लगभग 16 महीनों का ही रहा ।इस अल्पकालीन अवधि में उन्होंने जनता और पुलिस के बीच का संबंध मधुर और पारदर्शी बनाने का पूरा प्रयास किया। जनपद को अपराध मुक्त बनाने में पूरी क्षमता से लगे रहे और क्राइम ग्राफ 16 से  घटाकर 9. 2 पर ले आने का सफल प्रयास किया। आम शांत प्रिय नागरिक उन्हे अपना संरक्षक मानता था ।इसी के उलट अपराधी प्रवृति के लोग उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझते थे ।यह सत्य है कि सरकारी सेवाओं में रहने वाले अधिकारी का पद ट्रांसफरेबल होता है, बावजूद  इसके कुछ अधिकारीं ऐसे भी होते हैं लोगों के दिल में अपना स्थान बना लेते हैं और लोग उन्हे लंबे समय तक याद रखते हैं। भुलाए से भी नहीं भूल पाते। यथा नाम तथा गुण के परंपरा अनुरूप सर्वश्रेषठ त्रिपाठी जी एक अच्छे अधिकारी के साथ-साथ एक अच्छे इंसान व मानवता की प्रतिमूर्ति कहे जा सकते हैं ।

आइडियल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव मोहम्मद कामरान मोनू महेवा ने श्री त्रिपाठी जी के स्थानांतरण उपरान्त  पुष्प गुच्छ  एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया तथा कहा कि आपके सत्कृत्य सदैव याद रखे जाएंगे ।

इसी क्रम में आइडियल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रमोद वाचस्पति ने भी श्री त्रिपाठी जी के स्थानांतरण होने तथा लखनऊ जाने के साथ-साथ उन्हेे शुभकामनाएं और बधाई  दिया।

 सम्मान में उनके कुछ पंक्तियां

मेरे शहर से आप किनारा न कीजिए।

 दिल तोड़ने की ज़हमत गवारा न कीजिए।।
 
आते नहीं तो जाने का फिर ग़म नहीं होता,

 दिल के करीब आपके मेरा दिल नहीं होता।

मन और हृदय को ठेस करारा न दीजिए। 

मेरे शहर से आप किनारा न कीजिए।।

हर काम में है आगे, व्यवहार में भी श्रेष्ठ।

 भूलेंगे कैसे आपको भाई  ऐ सर्वश्रेष्ठ ।।

नम हो रही है आंखें नजारा तो कीजिए।

 मेरे शहर से आप किनारा न कीजिए।।

                                     प्रस्तुति/रचना






                     डा प्रमोद वाचस्पति राष्ट्रीय अध्यक्ष

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