फर्जी मुकदमा समाप्त करने के बदले बीस हजार की मांग, ना देने पर पुनः फंसाने की धमकी - Ideal India News

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फर्जी मुकदमा समाप्त करने के बदले बीस हजार की मांग, ना देने पर पुनः फंसाने की धमकी

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फर्जी मुकदमा समाप्त करने के बदले बीस हजार की मांग, ना देने पर पुनः फंसाने की धमकी

Monu Mahewa




बहरिया प्रयागराज। थाना बहरिया अंतर्गत क्षेत्र ग्राम सभा पतुलकी में एक वर्ष पूर्व हीना पुत्री नन्हे गौरिया के द्वारा छेड़छाड़ का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसके संबंध में दिनांक 10 जनवरी 2021 दिन सोमवार को गाँव के ही एक दुकान पर पीड़ित पत्रकार सरफराज अहमद बैठा था। कि इतने में नन्हे गौरिया पुत्र स्वर्गीय मुसाफिर निवासी उपरोक्त साइकिल से आकर खड़ा हो गया। और पीड़ित पत्रकार से बोला तो पीड़ित पत्रकार ने बैठने के लिए कुर्सी दी। जिस पर वह बैठा और हाल खबर पूछने लगा। जिस पर पीड़ित पत्रकार ने कहा सब सही है। बस वही फर्जी जो मुकदमा दर्ज कराए हो। उसी के चक्कर में परेशान हूँ। इतने पर नन्हे गाली देते हुए कहा कि कौन कह रहा है। मुकदमा दर्ज कराया हूँ। तो पीड़ित ने कहा कि घर पर पता कर लो नही तो थाने पर जाकर पता कर लो। इतने में नन्हे गौरिया ने कहा कि मुकदमा लिखाने में खर्च लगता है। पैसा खर्च किया हूँ। पैसा चाहिए। तो पीड़ित ने पूछा कि कितना लोगे। तो नन्हे गौरिया ने कहा कि बीस हजार रूपया चाहिए। जिस पर पीड़ित पत्रकार ने कहा कि इतना हमारे पास पैसा नही है कि मैं दे सकूँ। बगैर पैसा लिए मुकदमा खत्म नही करवाओगे। तो उसने कहा कि पहले सौ रूपया दो और एक शीशी पी लूं तो फिर बात करेंगे। पीड़ित ने कहा कि हमारे पास अभी कुछ नहीं है। मैं नही दे सकता। जिस पर नन्हे गौरिया अभद्रता से पेश आने लगा। इसके बावजूद पीड़ित ने सुना और बर्दाश्त किया। लेकिन एक घंटे के बाद नन्हे गौरिया अपने पत्नी के साथ हमारे सहन दरवाजे पर आकर गाली गलौज करने लगे। साथ में मौजूद डायल 112 पीआरवी 115 के पुलिस कर्मी मौजूद रहे। जिसके सामने अभद्रता से पेश आते रहे। और घर में घुसकर मारने की धमकी दी जा रही थी। नन्हे गौरिया की लड़की का भूमाफियाओं से नाजायज संबंध है। ऊंची पकड़ होने के कारण पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बनवा कर बेकसूरों को फंसाने का कार्य किया जाता है। फंसाने के बाद धन उगाही करने का काम किया जा रहा है। पीड़ित पत्रकार का जनपद के पुलिस प्रशासन से निवेदन है कि मामले को संज्ञान में लेकर जांच उपरांत बाद न्यायोचित कार्यवाही करना न्याय संगत है।

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