बुढेनाथ मंदिर के भक्तों की आस्था के साथ हो रहा खिलवाड़ - डॉ.योगानंद गिरी - Ideal India News

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बुढेनाथ मंदिर के भक्तों की आस्था के साथ हो रहा खिलवाड़ - डॉ.योगानंद गिरी

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बुढेनाथ मंदिर के भक्तों की आस्था के साथ हो रहा खिलवाड़ - डॉ.योगानंद गिरी
अखिलेश मिश्र "बागी"





मीरजापुर  शहर के मध्य बूढ़ेनाथ मोहल्ले में प्राचीन काल से विराजमान बाबा बूढ़ेनाथ भक्तों के आस्था के केंद्र बिंदु हैं । मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ रात्रि विश्राम इसी मंदिर में करते हैं । फिर भी यह मंदिर सरकारी उपेक्षा का शिकार बना है । जिस मंदिर में भक्तगण आस्था के साथ बाबा भोलेनाथ का गंगाजल और दूध से अभिषेक करते हैं । सन 2018 से थोड़ी सी भी बारिश होने पर सड़क के नाली का पानी प्रभु के कुण्ड में भर कर बाबा की पिंडी को डूबों देता हैं । यह जन प्रतिनिधियों की उदासीनता, सरकारी उपेक्षा और नगर पालिका परिषद की घोर लापरवाही का परिणाम है । जिसकी जितनी निंदा की जाए वह उतनी ही कम है । लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाना समाज और कानून की दृष्टि से भी अपराध है । विकास के नाम पर तमाम योजनाओ के बावजूद इस समस्या का समाधान न किया जाना जिम्मेदार लोगों के नक्कारेपन को दर्शाता है । वर्षों से बाबा के मंदिर में चढ़ने वाले जल को गंगा नदी में मिलाने की मांग की जा रही है । उस पर भी ध्यान नहीं दिया गया । क्या यह हिंदुओं की आस्था के साथ किया जा रहा अक्षम्य अपराध नहीं है । उक्त बातें भोलेनाथ मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान महंत डॉ. योगानंद गिरी ने व्यक्त किया । 
महंत डा. गिरी ने कहा कि देवों के देव महादेव किसी राजनीतिक दल के आराध्य नहीं, भारतीय नागरिकों, संस्कार, संस्कृति एवं आस्था के बीच देवों के देव महादेव है । उन महादेव की उपेक्षा के कारण बाबा के कुंड में वर्षा के कारण नालिया जाम हों जाती हैं तब नाले का मल-मूत्र युक्त गंदा पानी मंदिर में घुसकर बाबा के कुंड को भर देता है । यह देख हमारा कलेजा फट पड़ता है । चाह कर भी हम बाबा की जलहरी में गंदा पानी और मल जाने से नहीं रोक पाते । अपने हाथों से कई बार हमने मल मूत्र को निकाला है । इसके लिए वर्षों से नगर पालिका और जिला प्रशासन का ध्यान विभिन्न माध्यमों से आकर्षित कराया गया । लेकिन आज तक कोई काम नहीं किया गया । इस मोहल्ले में सीवर पाइप तक नहीं डाली गई है । जो समस्या का मूल कारण बन गया है । आखिर इतनी उपेक्षा किसकी की जा रही है । जनहित के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट मिलने और उसका ऊलजलूल खर्च किया जा रहा है यह हिंदुओ की आस्था के साथ किया जा रहा खिलवाड़ है या कोई साजिश है  उन्होंने पूछा कि इन समस्याओं का उत्तर कौन देगा । आखिर हम किस से कहें, कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले संविधान की अर्थी उठा रहे हैं महंत डॉ योगानन्द ने कहा कि मन्दिर में भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला जल व दूध गंगा नदी मिलाने की बात को भी दरकिनार किया जा रहा है । जर्जर हो चुके अति प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु भी चर्चायें हो चुकी हैं जिस पर आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं कि गईं। मन्दिर का मुख्य प्रवेश द्वार त्रिमुहानी पर वर्तमान नगर विधायक व लालडिग्गी पर वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ने बनवाने के लिये संकल्प लिया था किंतु उदासीन रहे।  उन्होंने कहा कि अगर जिला स्तर का नेतृत्व हमारी समस्याओं का निराकरण नहीं कर सकता तो मैं आमरण अनशन करने हेतु विवश हूं और प्रदेश के मुखिया के आश्वासन के पश्चात ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी । भारतीय जनमानस अपने मंदिरों के रख रखाव उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम है । बस इसमें कोई रोड़ा जिला प्रशासन, जन प्रतिनिधि नहीं लगायेंगे । जनता अपने आराध्य का अपमान बर्दास्त नहीं कर सकती पत्रकार वार्ता के दौरान आचार्य जगदीश द्विवेदी,गोभक्त  राज माहेश्वरी, विन्ध्यवासिनी प्रसाद केसरवानी, अश्विनी गुप्ता, नितिन अवस्थी, समीर वर्मा, संदीप जड़िया, जलज नेत सहित सम्मानित पत्रकार बन्धु उपस्थित थे ।

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