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विधानसभा चुनाव पर एनबीटी की पहल ,कर्मचारी नेताओ से किया संबाद,

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विधानसभा चुनाव पर एनबीटी की पहल ,कर्मचारी नेताओ से किया संबाद,

अखिलेश मिश्र "बागी" 




राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद मिर्जापुर शाखा के जिलाध्यक्ष नारायणजी दुबे ने  लखनऊ में एनबीटी समाचार पत्र के वरिष्ठ समाचार संवाददाता अविरल आनंद के द्वारा कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के साथ ऑनलाइन जूम पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किये जाने का स्वागत किया है  जिसमें उत्तर प्रदेश  विधानसभा  चुनाव में कर्मचारियों के मुद्दे जानने का प्रयास किया गया ।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने एनबीटी की इस पहल का स्वागत करते हुए अवगत कराया कि कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली, नई पेंशन में लगातार हो रहे संशोधनों को लागू किया जाना, प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों का नगर प्रतिकर भत्ता बहाल किया जाना, मुख्य सचिव समिति के माध्यम से विभिन्न वर्गों की वेतन विसंगतियों पर निर्णय कराया जाना, आउट सोर्स व्यवस्था बंद किया जाना, वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों पर नीतिगत फैसला करते हुए उनके समायोजन की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना, संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाना, विभिन्न विभागों में पड़े हुए रिक्त पदों को भरा जाना, वह को न्यूनतम 15000 का मानदेय दिया जाना, जैसे मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इन्हें चुनावी मुद्दा बनाने का दावा किया।
 उन्होंने अवगत कराया कि हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री  एवं मुख्य सचिव के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी है लेकिन अभी भी आदेश नहीं हो पाया हैं।जे. एन. तिवारी ने पहले ही कहा था कि सरकार का रवैया कर्मचारियों को वार्ताओं में उलझा कर समय व्यतीत करने का है और यही हुआ ।मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी हुई विभिन्न कमेटियों ने कर्मचारियों के साथ वार्ता कर काफी समय बर्बाद किया लेकिन मांगों पर निर्णय नहीं लिया,15 जनवरी के बाद राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद मंडल /जनपद स्तर पर सम्मेलनों के माध्यम से कर्मचारियों के बीच यह सारे मुद्दे ले जाएगी । कर्मचारियों से शत प्रतिशत मतदान करने की अपील की जाएगी तथा उनसे यह कहा जाएगा कि मतदान में अपने विवेक का इस्तेमाल करें तथा एक ऐसी सरकार बनाने में मदद करें जो कर्मचारियों की जायज मांगों पर निर्णय ले सके। विभागीय स्तर पर कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ विभागीय अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए जो विभागीय कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करें जिससे अनावश्यक रूप से कर्मचारियों का पैसा न्यायालय में खर्च न हो  और समस्याएं विभागीय स्तर पर ही निस्तारित हो जाए।

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