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बिना दरोगा बने सेवानिवृत्त हो गए 250 जमादार ,1700 एएसआई को प्रोन्नति का इंतजार

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बिना दरोगा बने सेवानिवृत्त हो गए 250 जमादार ,1700 एएसआई को प्रोन्नति का इंतजार

कमल कुमार कश्यप 
रांची झारखंड बिहार 




झारखंड के 1700 एसआई की प्रोन्नति नियमावली में संशोधन नहीं होने के कारण करीब डेढ़ साल से लटकी हुई है| विभागीय मंत्री की सहमति के बावजूद विभाग में नियमावली संशोधन की फाईल की धीमी रफ्तार उन्नति में बाधक बनी है| वर्ष 2016 के बाद किसी भी जमादार को दरोगा में प्रोन्नति नहीं मिली इस पाच साल की अवधि में बिना दरोगा बने करीब ढाई सौ जमादार सेवानिवृत्त हो गए| जबकि 17 साल जमादरों को प्रोन्नति का इंतजार है, यह एसआई 35 से 37 वर्ष तक की ड्यूटी पूरी कर चुके हैं| लेकिन प्रोन्नति नहीं होने से दरोगा नहीं बन पा रहे हैं ,जबकि दूसरे राज्यों में इसे जूनियर भी दरोगा बन चुके हैं| सिपाही हवलदार से सीधे दरोगा में प्रोन्नति के लिए पूर्व की रघुवर सरकार में वर्ष 20 सोलह में नियमावली में संशोधन कर सीमित विभागीय परीक्षा का प्रोग्राम शुरू किया गया था| इस नियमावली के तहत दरोगा के रिक्त पदों में से 50% पद सीधी बहाली पर दरोगा बनाने व शेष 50% में से 25% सिमित परीक्षा को 25% रिक्त पद पर एएसआई के प्रति देकर दरोगा बनाने का प्रावधान किया गया था| इस नियमावली के पूर्व सिमित परीक्षा का प्रधान नहीं था| 50% पद पर एसआई दरोगा में प्रोन्नत होते थे रघुवर सरकार की इस नियमावली में संशोधन का तब से ही विरोध हो रहा है| सिमित परीक्षा को समाप्त करने के लिए पुलिस एसोसिएशन लगातार सरकार से पत्राचार करता रहा| इस नियमावली से एक बार नियुक्ति व पदोन्नति हो चुकी है| वर्ष 2018 19 के नियमावली से दरोगा के पद पर सीधी बहाली से 2123 पद भरे गए सीमित विधा विभागीय परीक्षा के माध्यम से 1544 रिक्त पदों को भरने के लिए परीक्षा हुई |लेकिन इस परीक्षा के माध्यम से 395 सिपाही हवलदार ही दरोगा के पद पर प्रोन्नत हुए 1149 पद रिक्त रह गए थे| पुलिस मुख्यालय से भी हो चुकी है, अनुशंसा एएसआई से दरोगा में प्रोन्नति के लिए वर्क 2016 के पूर्व भी व्यवस्था को ही लागू करने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से गत वर्ष फरवरी 2020 में सरकार से की गई थी| झारखंड पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नियमावली में संशोधन का आग्रह किए थे| जिसे सही मांगते हुए सीएम ने उस पर अपनी सहमति बनीथी |लेकिन संबंधित फाइल विभाग से उन तक नहीं पहुंचने के कारण इस पर अब तक विचार नहीं हो सका| नियमावली में संशोधन नहीं होने से एएसआई से दरोगा में प्रोन्नति पर विचार नहीं हो पा रहा है|

झारखंड के 1700 एसआई की प्रोन्नति नियमावली में संशोधन नहीं होने के कारण करीब डेढ़ साल से लटकी हुई है| विभागीय मंत्री की सहमति के बावजूद विभाग में नियमावली संशोधन की फाईल की धीमी रफ्तार उन्नति में बाधक बनी है| वर्ष 2016 के बाद किसी भी जमादार को दरोगा में प्रोन्नति नहीं मिली इस पाच साल की अवधि में बिना दरोगा बने करीब ढाई सौ जमादार सेवानिवृत्त हो गए| जबकि 17 साल जमादरों को प्रोन्नति का इंतजार है, यह एसआई 35 से 37 वर्ष तक की ड्यूटी पूरी कर चुके हैं| लेकिन प्रोन्नति नहीं होने से दरोगा नहीं बन पा रहे हैं ,जबकि दूसरे राज्यों में इसे जूनियर भी दरोगा बन चुके हैं| सिपाही हवलदार से सीधे दरोगा में प्रोन्नति के लिए पूर्व की रघुवर सरकार में वर्ष 20 सोलह में नियमावली में संशोधन कर सीमित विभागीय परीक्षा का प्रोग्राम शुरू किया गया था| इस नियमावली के तहत दरोगा के रिक्त पदों में से 50% पद सीधी बहाली पर दरोगा बनाने व शेष 50% में से 25% सिमित परीक्षा को 25% रिक्त पद पर एएसआई के प्रति देकर दरोगा बनाने का प्रावधान किया गया था| इस नियमावली के पूर्व सिमित परीक्षा का प्रधान नहीं था| 50% पद पर एसआई दरोगा में प्रोन्नत होते थे रघुवर सरकार की इस नियमावली में संशोधन का तब से ही विरोध हो रहा है| सिमित परीक्षा को समाप्त करने के लिए पुलिस एसोसिएशन लगातार सरकार से पत्राचार करता रहा| इस नियमावली से एक बार नियुक्ति व पदोन्नति हो चुकी है| वर्ष 2018 19 के नियमावली से दरोगा के पद पर सीधी बहाली से 2123 पद भरे गए सीमित विधा विभागीय परीक्षा के माध्यम से 1544 रिक्त पदों को भरने के लिए परीक्षा हुई |लेकिन इस परीक्षा के माध्यम से 395 सिपाही हवलदार ही दरोगा के पद पर प्रोन्नत हुए 1149 पद रिक्त रह गए थे| पुलिस मुख्यालय से भी हो चुकी है, अनुशंसा एएसआई से दरोगा में प्रोन्नति के लिए वर्क 2016 के पूर्व भी व्यवस्था को ही लागू करने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से गत वर्ष फरवरी 2020 में सरकार से की गई थी| झारखंड पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नियमावली में संशोधन का आग्रह किए थे| जिसे सही मांगते हुए सीएम ने उस पर अपनी सहमति बनीथी |लेकिन संबंधित फाइल विभाग से उन तक नहीं पहुंचने के कारण इस पर अब तक विचार नहीं हो सका| नियमावली में संशोधन नहीं होने से एएसआई से दरोगा में प्रोन्नति पर विचार नहीं हो पा रहा है|

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