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देशवासियों को कब तक मिलने की उम्मीद, कितनी कारगर है बूस्टर डोज,

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देशवासियों को कब तक मिलने की उम्मीद, कितनी कारगर है बूस्टर डोज,


डॉक्टर मिथिलेश श्रीवास्तव- स्वास्थ्य



-】भारत के वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल के मुताबिक फिलहाल लोगों को एक नियत अंतराल के बाद टीके की दो खुराक देने का नियम है। अब तक देश में 138 करोड़ से अधिक लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट पर बूस्टर डोज कितनी असरदार हो सकती है, साथ ही कब तक इसके देशवासियों को मिलने की उम्मीद है, आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में जानते हैं।

भारत बायोटेक ने तीसरे चरण के अध्ययन मांगी अनुमति
भारत के संदर्भ में बात करें तो आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत बायोटेक ने दवा नियामक डीजीसीआई से इंट्रा-नेजल कोविड -19 वैक्सीन के बूस्टर शॉ के तीसरे चरण के अध्ययन की अनुमति मांगी है। हैदराबाद स्थित कंपनी द्वारा विकसित इंट्रानैसल वैक्सीन BBV154 के उपयोग को भारत ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि देश में जिन लोगों को कोविशील्ड या कोवाक्सिन के टीके लगे हैं उनको इसका बूस्टर डोज दिया जा सकेगा। कंपनी के मुताबिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत में फिलहाल बूस्टर डोज को लेकर सरकार की तरफ से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।


भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसपर कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है, खतरा उन लोगों के लिए भी बना हुआ है जिनको वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है। ऐसे में बूस्टर डोज यानी कि वैक्सीन की तीसरी खुराक को लेकर एक बार फिर से देश में चर्चा तेज हो गई है। कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि बूस्टर डोज देकर लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके उन्हें कोरोना के इस संकट से सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि देशवासियों के लिए बूस्टर डोज कब तक उपलब्ध हो सकेगी, इसपर अभी बड़ा प्रश्न चिन्ह बना हुआ है।

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