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ठंड और गलन में नंगे पांव ही काशी की अंतर्गृही यात्रा पर निकले श्रद्धालु

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ठंड और गलन में नंगे पांव ही काशी की अंतर्गृही यात्रा पर निकले श्रद्धालु

जयचन्द वाराणसी





वाराणसी। काशी की पहचान यहां के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से भी है। अगहन मास की ठंड के बीच हर हर महादेव शंम्भु,काशी विश्वनाथ हर,हर गंगे के जयघोष के साथ सिर पर समान लिए नंगे पांव  महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु बड़े मनोयोग भाव पूर्वक काशी की परिक्रमा पर निकल चुके हैं। काशी की पुरानी परंपरा के अनुसार अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को काशी के अन्दर परिक्रमा यात्रा निकलती है, जिसे अंतरगृही यात्रा कहा जाता है। अंतरगृही यात्रा में काशी के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी नंगे पांव काशी की परिक्रमा करते हैं। पंचांग के अनुसार शनिवार को ही पूर्णिमा लग जाने के कारण यह यात्रा आज ही शुरू हो गयी है। अंतरगृही यात्रा मणिकर्णिका घाट से संकल्प लेकर शुरू होती है। मणिकर्णिका घाट से नाव द्वारा अस्सी घाट, से पैदल जगन्नाथ मंदिर, रामानुज कोट, संकटमोचन, साकेत नगर कॉलोनी, खोजवा, लहरतारा, मंडुवाडीह, कैंटोमेंट होते हुए  यात्रा मणिकर्णिका घाट पर संकल्प छुड़ाकर सम्पन्‍न होती है। शनिवार भोर में 4 बजे से ही यात्रा शुरू हो गयी है। यात्रा में शामिल ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और पुरुष नंगे पांव हर हर महादेव काशी विश्वनाथ गंगे का जयघोष करते हुए चल रहे हैं। शनिवार को ठंड  और शीतलहरी के करण बढ़ी गलन में भी उत्साह देखने लायक है।

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