इस तरह से वैरिएंट की होती है जांच, ओमिक्रॉन संक्रमण का पता लगाने का तरीका, - Ideal India News

Post Top Ad

इस तरह से वैरिएंट की होती है जांच, ओमिक्रॉन संक्रमण का पता लगाने का तरीका,

Share This
#IIN

इस तरह से वैरिएंट की होती है जांच, ओमिक्रॉन संक्रमण का पता लगाने का तरीका, 


डॉक्टर मिथिलेश श्रीवास्तव- स्वास्थ्य



-】शरीर में कैसे बनता है संक्रमण

इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंस के वाइस चांसलर डॉक्टर एसके सरीन के मुताबिक, जैसे शरीर डीएनए से मिलकर बनता है, वैसे ही संक्रमण भी डीएनए या आरएनए से मिलकर बनता है। कोरोना वायरस आरएनए से बना है। 

जीनोम सिक्वेंसिंग क्या है

जीनोम सीक्वेंसिंग एक तकनीक है, जिससे आरएनए की जेनेटिक जानकारी का पता चलता है। जीनोम सीक्वेंस ये बताता है कि वायरस कैसा है और कैसे हमला कर रहा है और कैसे बढ़ सकता है। 

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के मामले भारत में बढ़ने लगे हैं। ओमिक्रॉन को लेकर जो शोध या अध्ययन में दावे किए जा रहे हैं वे बेहद चिंताजनक हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए शोध के मुताबिक वैक्सीन के दो डोज से बनी कमजोर एंटीबॉडी के खिलाफ ओमिक्रॉन प्रभावशाली है। एक्सपर्ट कोरोना से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि जानने वाली बात है कि कोरोना वायरस के इस नए ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता कैसे लगाया जाए। ओमिक्रॉन वैरिएंट को पता लगाने के लिए एक तकनीक है जीनोम सिक्वेंसी। ये तकनीक कई दिनों से चर्चा में है, लेकिन जीनोम सीक्वेंस क्या है और कैसे पता चलता है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति ओमिक्रॉन वैरिएंट से ग्रसित है, इसका पता लगाने का एक प्रक्रिया है। कोरोना वैरिएंट का पता लगाकर उसके मुताबिक संक्रमण के खतरे से बचाव के लिए प्रयास किया जा सकता है। 

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad