उपभोक्ता परेशान, एक अरब का लेनदेन प्रभावित, - Ideal India News

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उपभोक्ता परेशान, एक अरब का लेनदेन प्रभावित,

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 उपभोक्ता परेशान, एक अरब का लेनदेन प्रभावित,


अम्बेडकरनगर Anil kumar Shukla,



-】धननिकासी समेत विभिन्न कार्यों के लिए उपभोक्ता संबंधित बैंक शाखाओं में पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। हड़ताल से लगभग एक अरब रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। उधर बैंक कर्मचारियों ने विभिन्न बैंक शाखाओं के समक्ष प्रदर्शन कर हक की आवाज बुलंद की। कहा गया कि यदि शीघ्र ही निजीकरण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

अंबेडकरनगर। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। जिले में 12 बैंकों की 100 शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल पर रहे तो बैंकों में ताला लटका रहा। इससे उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गईं। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ता जगह-जगह परेशान दिखे।

अकबरपुर नगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में धन जमा करने पहुंचे बेवाना के राजितराम व शहजादपुर के मोहम्मद अमीन ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बैंक में हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। जिम्मेदारों को चाहिए था कि उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करें। कहा कि हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को कई प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ीं।

अकबरपुर के शहाब परवेज व अनुराग ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अकबरपुर शाखा में धननिकासी के लिए गए थे। हड़ताल के चलते काम नहीं हुआ। एटीएम भी काम नहीं कर रहे। ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़। शहजादपुर की संगीता सिंह ने कहा कि फीस के लिए बेटे के खाते में राशि भेजनी थी, लेकिन हड़ताल के चलते फीस नहीं भर सकी।



निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के राष्ट्रीय आह्वान पर गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को भी 12 बैंकों की लगभग 100 शाखाओं में शुक्रवार को भी कार्य पूरी तरह से ठप रहा। बैंकों में ताला लटका होने के चलते शुक्रवार को उपभोक्ता विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित शाखाओं पर पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। बगैर काम हुए ही उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
उपभोक्ताओं का कहना था कि उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए बैंकों में जरूरी कार्य सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए जिम्मेदारों को वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।

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