वैज्ञानिकों कों कड़ी मेहनत के बाद मिली कामयाबी, संगम पर गंगा-यमुना के नीचे तीसरी नदी के निशान मिले, - Ideal India News

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वैज्ञानिकों कों कड़ी मेहनत के बाद मिली कामयाबी, संगम पर गंगा-यमुना के नीचे तीसरी नदी के निशान मिले,

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वैज्ञानिकों कों कड़ी मेहनत के बाद मिली कामयाबी, संगम पर गंगा-यमुना के नीचे तीसरी नदी के निशान मिले, 


Payagraj-》 Atpee Mishra,


-】इस खोज के पीछे नदी की वास्तविकता का पता करना नहीं था, बल्कि वैज्ञानिकों ने गंगा के गिरते जलस्तर के बारे में छानबीन शुरू की थी। दुनिया की कई नदियों में जलस्तर गिर रहा है। बड़ी नदियों के निचले स्तर पर एक्वीफर सिस्टम होता है। यह गंगा में भी है और इसके कारण ही बड़े पैमाने पर भारत के उत्तरी मैदान में जल आपूर्ति होती है। पिछले कई वर्षों में गंगा पर जलापूर्ति के लिए दबाव अत्यधिक बढ़ गया है, जिस कारण गंगा के जलस्तर में कमी हो रही है। यह सतह पर नहीं दिखती लेकिन नीचे स्थित एक्वीफर सिस्टम प्रभावित कर रही है।

गिरते जल स्तर के कारणों पर यह शोध गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में किया गया। इसमें सुभाष चंद्र, वीरेंद्र एम तिवारी, मुलावाडा विद्यासागर समेत कई वैज्ञानिक इसमें शामिल थे। इन वैज्ञानिकों ने हेलीकॉप्टर की सहायता से पूरे क्षेत्र की मैपिंग के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वे किया। कई उड़ानों के बाद अलग-अलग हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स सर्वे को एक साथ मिलाकर जब इस पूरे क्षेत्र का एक नक्शा बनाया गया तो यह आश्चर्यजनक तथ्य सामने

सीएसआईआर की की इस रिपोर्ट को एडवांस अर्थ एंड स्पेस साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट में यह बताया है कि प्रयाग क्षेत्र में संगम के निकट 45 किलोमीटर लंबी चार किलोमीटर चौड़ी और 15 मीटर गहरी नदी के प्रमाण मिले हैं, जो आज भी प्रवाहमान है। जब यह नदी पूरी तरह पानी से भर जाती है तो भूमि के ऊपर 1300 से 2000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाती है। इस नदी के पास 1000 डब्ड स्टोरेज की क्षमता है और किसी भी समय भूजल स्तर को बढ़ाने की अद्भुत क्षमता रखती है।


त्रिवेणी संगम पर गंगा-यमुना के के नीचे बहने वाली तीसरी प्राचीन नदी के प्रमाण मिले हैं। यह अध्ययन सीएसआईआर-एनजीआरआई के वैज्ञानिकों ने तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नदी का संबंध हिमालय से है, ऐसे में यह तीसरी नदी सरस्वती हो सकती है। फिलहाल सरस्वती नदी की धारा संगम पर लंबे समय से अदृश्य हो चुकी है। ऐसे में संगम के नीचे तीसरी नदी के सबूत चौंकाने वाले हैं।

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