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लाभार्थियों से पीएम नरेन्द्र मोदी ने पूछा रुपये तो नहीं देना पड़ा, भेदभाव तो नहीं हुआ

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डा यू एस भगत , भूपेन्द्र अग्रहरि     वाराणसी
लाभार्थियों से पीएम नरेन्द्र मोदी ने पूछा रुपये तो नहीं देना पड़ा, भेदभाव तो नहीं हुआ




वाराणसी । अपने संसदीय क्षेत्र बनारस दस दिन में दूसरी बार आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात दी तो विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात की। आवास व स्वनिधि योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की जानकारी ली। योजना क्रियान्वयन में शुचिता व पारदर्शिता के बारे में भी जाना समझा। उन्होने साफ शब्दों में पूछा, आवास के लिए किसी को पैसा तो नहीं देना पड़ा, सिफारिश तो नहीं करनी पड़ी। धर्म, जाति, अगड़ा, पिछड़ा या दलित के नाम पर भेद तो नहीं किया गया। उत्तर सकारात्मक तो मिला ही आशीष वर्षा भी हो गई। लाभार्थियों ने कहा आपकी वजह से हम गरीबों का घर बन गया। आपने जो किया पहले कभी न हुआ। इस पर पीएम के चेहरे पर संतोष के भाव उभरे। उन्होंने कहा कि, गरीबों का आशीर्वाद बना रहे, हम और भी काम करते रहेंगे।करखियांव में जनसभा से पहले मंच के पिछले हिस्से में पहुंचे। लाभार्थियों ने सामना होते ही पीएम को धन्यवाद दिया। पीएम ने पूछा, पहले कहां रहते थे। जवाब आया-कच्चे मकान में। पीएम ने पूछा- कितना समय हो गया, लाभार्थी ने बताया कि एक साल। बच्चों को कैसा लगता है के सवाल पर महिला लाभार्थी ने कहा कि बहुत ही अच्छा लगता है। एक अन्य महिला लाभार्थी ने बताया कि उनका परिवार झोपड़ी में रहता था। बारिश में झोपड़ी चूने लगती थी, जिससे बहुत परेशानी होती थी। जब आवास योजना का पता चला तो आवेदन किया और पक्का मकान बन गया। अब पूरा परिवार अच्छे से रहता है। इस पर पीएम ने पूछा कि कितने पैसे मिले, मकान बनाने में पैसा बचा या जोडऩा पड़ा। लाभार्थी ने कहा कि ढाई लाख मिले। मकान बनाने के लिए थोड़े पैसे लगाने पड़े। पीएम ने पूछा कि बिजली- पानी और गैस भी मिला? जवाब आया, सब मिल गया। साफ-सफाई के बारे में पीएम ने पूछा कि घर के कचरे का क्या करते हैं तो लोगों ने कहा कि उसे एकत्र कर कूड़ेदान में डालते हैं, जिसे सफाईकर्मी उठाकर ले जाते हैं।प्रधानमंत्री ने पूछा कि योजनाओं के लाभ के लिए रिश्वत देनी पड़ी, सिफारिश करनी पड़ी? यह बताना पड़ा कि हम इस जाति से हैं? हिदू-मुसलमान, अगड़ा-पिछड़ा, दलित का भेदभाव होता है क्या? इसे लाभार्थियों ने सिरे से नकार दिया। कहा कि पहले की अपेक्षा अब बहुत अच्छा हो गया है, कोई जातपात या धर्म का भेदभाव नहीं होता है। एक लाभार्थी ने कहा कि उनके कच्चे मकान में बारिश होने पर पानी जमा हो जाता था तो थाली से पानी बाहर निकालती थी तो लोग हंसते थे। कभी उम्मीद नहीं थी कि पक्के मकान में हम भी रहेंगे।पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों से पीएम ने पूछा कि योजना में कैसे और कितने पैसे मिले। लाभार्थी ने बताया कि पहले दस हजार लिए थे, समय पर जमा कर 20 हजार और लिए। इससे कारोबार अच्छा चल रहा है, इसके लिए उसने सरकार को धन्यवाद दिया। पीएम ने पूछा कि, पैसे का लेनदेन कैसे करते हैं तो लाभार्थियों ने बताया कि कैश भी करते हैं और मोबाइल से भी। प्रधानमंत्री ने आवास व स्वनिधि योजना के 22 लाभार्थियों से बात की।

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