378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, दिल्ली के बॉर्डर से जल्द घर वापसी करेंगे किसान, - Ideal India News

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378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, दिल्ली के बॉर्डर से जल्द घर वापसी करेंगे किसान,

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डा ए के गुप्ता नई दिल्ली
378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, दिल्ली के बॉर्डर से जल्द घर वापसी करेंगे किसान,




378 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसानों का आंदोलन ख़त्म हो गया। किसान संगठनों ने आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की है। किसान जल्दी ही दिल्ली के बॉर्डर से अपने घर की ओर वापसी करेंगे।
केंद्र सरकार की ओर भेजे गए प्रस्ताव को किसान संगठनों ने स्वीकार कर लिया है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की तरफ से जो प्रस्ताव आया है उसको लेकर हम सब के बीच सहमति बन गई है।  किसान मोर्चा ने कहा कि हम बड़ी जीत लेकर जा रहे हैं। 11 दिसंबर से किसानों की वापसी शुरू होगी। सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान 11 दिसंबर को पंजाब के लिए रवाना होंगे।
इसके बाद 13 दिसंबर को सभी किसान संगठनों के नेता अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब जाएंगे। इसके साथ ही 15 दिसंबर से पंजाब के अलग अलग जिलों में भी चल रहा मोर्चा खत्म हो जाएगा. इस दौरान किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि 15 जनवरी को फिर से किसान नेताओं की समीक्षा बैठक होगी।
गौरतलब है कि कल सरकार की तरफ से किसान नेताओं को आंदोलन ख़त्म करने के लिए एक ड्राफ्ट भेजा था। जिसे बाद में किसान नेताओं ने सुधार कर सरकार को भेजा था। गुरुवार को सरकार की तरफ से दोबारा किसान नेताओं को प्रस्ताव भेजा गया। जिसको लेकर किसान नेताओं में सहमति बन गई। सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में एमएसपी को लेकर एक कमेटी बनाने का आश्वासन दिया गया। जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक को शामिल करने की बात कही गई।
इसके अलावा आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों पर दर्ज किए गए सभी केस तुरंत वापस लेने का भी ऐलान किया गया। साथ ही मुआवजे को लेकर भी उत्तरप्रदेश और हरियाणा सरकार ने सहमति दे दी। इस प्रस्ताव में बिजली बिल को संसद में ले जाने से पहले किसान संगठनों से चर्चा करने की बात भी कही गई। साथ ही पराली को लेकर भी किसानों के ऊपर कैद और जुर्माने का प्रावधान हटाने का आश्वासन दिया गया।


●○ *__किसानों की मांगें पूरी और आंदोलन वापस, सत्याग्रही किसान की जीत : कांग्रेस_*


नई दिल्ली। कृषि कानूनों को वापस लेने और किसानों की ओर से आंदोलन वापस लिये जाने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्याग्रही किसान की जीत बताते हुए कहा कि सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं। गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा कृषि और किसानों से जुड़ी सभी मांगों पर सहमति देने के बाद एक सालभर से चल रहे किसान आंदोलन को किसानों ने गुरुवार को खत्म करने का ऐलान कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक अहम बैठक के बाद ऐलान किया कि वे 11 दिसंबर से दिल्ली की सीमाओं को खाली करना शुरू कर देंगे, वहीं इस मसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, "अपना देश महान है, यहां सत्याग्रही किसान हैं! सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं।"
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुरुवार को कहा, "इतिहास साक्षी है कि अहंकार हमेशा हारता है। चाहे वो इतिहास के पन्नों में अंकित रावण का अहंकार हो, या प्रचंड बहुमत की मोदी सरकार का।"
उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर 378 दिनों के सतत संघर्ष के बाद देश के अन्नदाताओं को मिली विजय के लिए करोड़ों किसानों व खेतिहर मजदूरों को हार्दिक बधाई। किसान आंदोलन ने महात्मा गांधी के सिद्धांत को अक्षरश: सही सिद्ध किया है कि 'जनतंत्र की असली शक्ति जनता में निहित है।'
सुरजेवाला ने कहा कि आज भारत के प्रजातंत्र ने समूचे विश्व को यह पाठ पढ़ाया है कि अगर मुट्ठी भर पूंजीपतियों के सहयोग से सत्ता हासिल भी कर लोगे तो भी उसके संचालन के सूत्र जनता के हाथ ही में रहते हैं। केंद्र सरकार की सदन की असंवैधानिक मनमानियों को सड़क पर कैसे ठीक किया जाता है, आज ये पाठ किसानों के आंदोलन ने देश को पढ़ाया है। आज हम कह सकते हैं कि प्रजातंत्र के नए युग की शुरूआत हुई है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उपज का केवल 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' नहीं, बल्कि 'लाभकारी मूल्य' दिलाने का दिन है। आज साल 2022 शुरू होने में मात्र 20 दिन शेष हैं, इसलिए किसान की आय साल 2022 तक दोगुनी करने का वादा निभाने का दिन है। भारत सरकार के एनएसओ के मुताबिक किसान की औसत आय तो 27 रुपये प्रतिदिन है, जो मनरेगा की मजदूरी से भी कम है। किसान-खेतिहर मजदूर को जानलेवा कर्ज मुक्ति के बंधन से आजाद करवाने का दिन है।

सुरजेवाला ने केंद्र से सवाल करते हुए कहा, "देश के हर किसान पर औसत 72 हजार रुपये का कर्ज है और मोदी सरकार यह कहती है कि किसान की कर्जमाफी के लिए उसके पास फूटी कौड़ी नहीं, तो यह सोचने का वक्त है कि फिर पूंजीपति मित्रों के सात साल में 10 लाख करोड़ माफ कैसे कर दिए? क्या किसान को 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का सालाना, जुमला है ?"
उन्होंने कहा कि केंद्र ने डीजल पर एक्साइज शुल्क 21.80 प्रति लीटर बढ़ाकर, खाद पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाकर, कीटनाशक दवाई पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर, ट्रैक्टर और खेती के उपकरणों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाकर किसानों के साथ कैसा न्याय किया है।

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