हाथ से लिखना पड़ता है फैसला- किराये के मकानों में चल रहीं अदालतें, जज भी किराये पर, - Ideal India News

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हाथ से लिखना पड़ता है फैसला- किराये के मकानों में चल रहीं अदालतें, जज भी किराये पर,

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हाथ से लिखना पड़ता है फैसला- किराये के मकानों में चल रहीं अदालतें, जज भी किराये पर, 


Monu Mahewa- prayagraj


-》 हाईकोर्ट समेत प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा तथा अधीनस्थ न्यायालयों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं को लेकर स्वत: कायम जनहित याचिका पर सुनाई का रही हाईकोर्ट के सात जजों की वृहदपीठ ने यह टिप्पणी महाधिवक्ता और सूबे के कई आला अधिकारियों की मौजूदगी में की। कोर्ट के आदेश के बावजूद समस्या का निदान करने में विफल सरकार व कोर्ट में उपस्थित हर विभाग के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में पीठ ने न्यायालयों की स्थिति और सरकार की नाकामी गिनाई।

उत्तर प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सात जजों की पीठ ने कहा कि प्रदेश की तमाम जिला अदालतें किराए के मकानों में चल रही हैं और जज भी किराए पर रह रहे हैं। हालात यह हैं कि जजों को फैसले अपने हाथ से लिखने पढ़ रहे हैं क्योंकि सरकार ने स्टेनो की नियुक्ति नहीं की है।


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