*अश्क चिरैयाकोटी द्वारा संपादित साझा ग़ज़ल संग्रह "शाख़-ए-ग़ज़ल" का हुआ वर्चुअल विमोचन* - Ideal India News

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*अश्क चिरैयाकोटी द्वारा संपादित साझा ग़ज़ल संग्रह "शाख़-ए-ग़ज़ल" का हुआ वर्चुअल विमोचन*

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Ashok Kumar Advocate Mau

*अश्क चिरैयाकोटी द्वारा संपादित साझा ग़ज़ल संग्रह "शाख़-ए-ग़ज़ल" का हुआ वर्चुअल विमोचन*

*खोलो कभी जुबान तो खोलो सँभालकर.....*







मऊ, जनपद मऊ के चिरैयाकोट नगर से संचालित *" बज़्म-ए-अंदाज़-ए-बयां "*(अखिल भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था) द्वारा संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार "अश्क चिरैयाकोटी" संपादन में प्रकाशित साझा ग़ज़ल संग्रह- शाख़-ए-ग़ज़ल का भव्य वर्चुअल लोकार्पण समारोह सह मुशायरा का आयोजन गुरुवार की रात को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ शायर माहिर निजामी झाँसवी, महाराष्ट्र तथा विशिष्ट अतिथि उस्ताद शायर दिलशाद अहमद उरूज कासगंजवी रहे एवं संचालन गीतकार दीपक दीप श्रीवास्तव, मुंबई ने किया। ऑनलाइन पुस्तक विमोचन समारोह का शुभारंभ अश्क चिरैयाकोटी की सरस्वती वंदना से हुआ। ततपश्चात अतिथियों , संपादक एवं सहभागी गजलकारों द्वारा पुस्तक का वर्चुअल विमोचन किया गया। उसके बाद साझा ग़ज़ल संग्रह के सम्पादक अश्क चिरैयाकोटी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी ग़ज़लकारों का स्वागत करते हुए पुस्तक के प्रकाशन से सम्बंधित सभी जानकारियों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पुस्तक में सहभागी ग़ज़लकारों की ग़ज़लों के साथ ग़ज़ल विधा की बुनियादी जानकारियों को भी समाहित किया गया है। ताकि नये ग़ज़लकारों को ग़ज़ल कहने में आसानी हो। हमारी बज़्म सीखें और सिखायें की अवधारणा को लेकर साहित्यिक क्षेत्र में सेवारत है। वहीं मुख्य अतिथियों ने भी अपने आशीर्वचनों से अभिसिंचित किया तथा संस्था के कार्यों की सराहना किया। उसके बाद
पटल पर उपस्थित शाख़-ए-ग़ज़ल के सहभागी गजलकारों ने अपनी प्रकाशित एक-एक गए प्रस्तुत कर समां बांध दिया। जिसमें प्रयागराज से सिम्पल काव्यधारा  ने कहा कि "जिसके अंदर जिगर नहीं होता, इश्क़ वो पुरअसर नहीं होता" ने सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके बाद कुशीनगर से कृष्ण कुमार श्रीवास्तव 'कृष्णा' ने  "रेत पर नाम लिखकर मिटाने लगे, इस तरह बात हमसे छुपाने लगे" सुनाकर दर्दे-दिल का इजहार किया तो छत्तीसगढ़ से मुकेश सिंघानिया ने- फिर ना उठ जाए मेरी ओर कहीं उंगली कोई, अब की आंखों में मेरे अश्क सम्भल कर आया, सुनाकर संजीदा शायरी का परिचय दिया। वहीं बहराइच से विनीता सिंह 'विनी' ने " ताने मुझको हज़ार दो साहिब, मेरी दुनिया संवार दो साहिब" ने सुनाकर माहौल को प्रेममय बना दिया। रामपुर से अनमोल रागिनी गर्ग "चुनमुन" की पंक्तियां - तुम्हे पूजा तुम्हें चाहा तुम्हीं से दिल लगाया है, हमें ठुकरा के तुमने पर हमारा दिल दुखाया है, ने लोगों को भावविभोर कर दिया। इनके बाद लखनऊ से जितेंदर पाल सिंह 'दीप'  ने - ग़म और ख़ुशी के साये में एहले जहां पले, ज़िंदा दिलों की जीस्त पे इसका असर नहीं ने सुनाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। वहीं झारखंड से राजमणि राज ने नसीहत भरे लहजे में कहा कि- नफ़रतों का न सौदा किया कीजिये, कीमतें प्यार की कुछ अदा तो करें"। अंत में अश्क चिरैयाकोटी  ने - रक्खो न तुम मलाल कोई दिल में पालकर, खोलो कभी ज़ुबान तो खोलो सँभालकर , सुनाकर वर्तमान हालात पर करारा प्रहार किया। तत्पश्चात उन्होंने सभी अतिथियों एवं रचनाकारों तथा आयोजन के सीधे प्रसारण से जुड़े सैकड़ों दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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