इस सरकार से न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग- जागरूक नहीं हुए तो न खुद बचेंगे और न देश, - Ideal India News

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इस सरकार से न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग- जागरूक नहीं हुए तो न खुद बचेंगे और न देश,

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इस सरकार से न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग- जागरूक नहीं हुए तो न खुद बचेंगे और न देश, 



Varanasi-》Bhupendra Agrahari, 



-》 कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश के गृह राज्यमंत्री के बेटे ने अपनी गाड़ी के नीचे छह किसानों को निर्ममता से कुचला। पीड़ितों के परिजनों ने मुझसे कहा, हमें मुआवजा नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए, लेकिन हमें न्याय दिलवाने वाला नहीं दिख रहा है। सरकार मंत्री और उसके बेटे को बचाने और विपक्षी नेताओं को रोकने में लगी है। मेरे लिए पुलिस लगा दी, लेकिन अपराधी को पकड़ने के लिए एक भी पुलिसवाला नहीं निकला। अपराधी को उन्होंने निमंत्रण भेजा।

-》 किसान न्याय रैली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि भाजपा की राजनीति में उलझेंगे तो देश नष्ट हो जाएगा। किसान देश की आत्मा है और मंच पर बैठे नेताओं को आपने बनाया है। जागरूक नहीं हुए तो न आप अपने आप को बचा पाएंगे और न देश को। उन्होंने कहा कि तीन कानून के जरिए किसान की जमीन, आमदनी, फसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खरबपति मित्रों के पास जाने वाली है। ये कानून लागू होते ही खेती और फसल सब छिन जाएगा।

सब मिले हैं, जनता किसके पास जाए

प्रियंका ने कहा, जब लखीमपुर में कुचले गए नक्षत्र सिंह के घर गई, तो पता चला कि उनका बेटा सीमा सुरक्षा बल में दाखिल हुआ है। जब मैं अगले परिवार से मिलने गई तो बताया गया कि उनके भाई-बहन सेना में देश की सेवा करते हैं। जब मैं पत्रकार रमन कश्यप के घर गई तो बताया गया कि वो वीडियो ले रहे थे, इसलिए उन्हें कुचल दिया गया। सभी परिवारों ने कहा कि सब मिले हैं, जनता किसके पास जाए।

इस सरकार में न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग
उन्होंने कहा कि देश आस्था व उम्मीद है और न्याय की उम्मीद पर इस देश को आजादी मिली। जब महात्मा गांधीजी आजादी की लड़ाई लड़ने गए तो उनके दिल में था कि सबको न्याय मिलना चाहिए। न्याय पर हमारा संविधान आधारित है, लेकिन इस सरकार में देश में न्याय की उम्मीद सब छोड़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं हो रहा है, कमाई और रोजगार नहीं है। किसान, नौजवान और नदियों के पास रहने वाला निषाद त्रस्त हैं। उन्होंने आह्वान किया कि मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई को मजबूत करिए, क्योंकि अब परिवर्तन तक मैं रुकूंगी नहीं।

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