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भा.ज.मो.पार्टी के तत्वधान मैं वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सहायक पुलिस बल के जवानों द्वारा मोराबादी मैदान में 3 दिनों से अनशन पर

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कमल कुमार कश्यप 
रांची झारखंड बिहार

 भा.ज.मो.पार्टी के तत्वधान मैं वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सहायक पुलिस बल के जवानों द्वारा मोराबादी मैदान में 3 दिनों से अनशन पर







            दिनांक 29.09.2021(बुधवार) को भारतीय जनतंत्र मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष श्री धर्मेंन्द्र तिवारी पार्टी महासचिव, श्री आशीष शीतल मुण्डा और राँची महानगर के  श्री नवेन्दु तिवारी  तीन दिनों से धरने पर बैठे झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों से आये सहायक पुलिस बल के जवानों  से मिलने मोरहाबादी मैदान गये। उन्होने अपनी माँगों का ज्ञापन सौपा और बताया कि पिछले बार धरना समाप्त करने के लिए उनकी माँगों पर कोई कार्यवाही नही हुई। वे पुनः विवश होकर धरना देने के लिए बाध्य होकर बैठे हैं। माँगों का व्यौरा  निम्नांकित हैः-
(क) सहायक पुलिस बल के जवान पुरे वर्ष 24ग्7 के हिसाब से कठिन परिस्थतियों में भी अपनी सेवा राज्यहित में करते आ रहें हैं। पुरे वर्ष में छुट्टी एक भी नहीं मिलती है। महिलाओं कर्मियों को मातृत्व अवकाश भी नहीं मिलता है। अस्वस्थ्य होने पर अगर कार्य में अनुपस्थित रहने पर उनका मानदेय में तुरन्त कटौती किया जाता है। सरकार का नारा हैै कि बुन्धुवा मजदूर मुक्त राज्य बनाने का परन्तु सहायक पुलिस कर्मीगण बन्धुवा मजदूर की तरह काम करने पर विवश हैं। सरकार इन्हें भी मानव समझे।
(ख) वर्ष 2017 में नियुक्ति के समय मानदेय रू. 10,000/- आज भी उतना ही मिलता है। जबकि राज्य में अन्य कर्मियों को प्रत्येक वर्ष महँगाई भत्ता की बढोतरी किया जाता है। किसी-किसी जिला में तो उक्त मानदेय से भी कटौती कर दिया जाता है। जैसे चाईबासा में कोविड-19 महामारी के दौरान जिन-जिन सहायक पुलिस ने ड्युटी दिया था उसका सभी का रू. 3000/- के हिसाब से  काटा गया। जो न्यायसंगत नही है यहाँ भ्रष्टाचार की बु आती है। उन्हें भयभीत कर उनका दोहन किया जाता है।
(ग) दूसरे जिलों में भी कार्य करवाया जाता है हमेशा परन्तु कोई टीए/डीए नहीं मिलता है न ही ओवर-टाईम का। रहने के बारे में तो आपसभी अनुमान ही लगा सकते है कि क्या हालत रहती होगी।
(घ) सभी सहायक पुलिस जवान अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आते हंै। जहाँ उनके सर पर हमेशा डर का साया बना रहता है क्योकि वे केवल लाठी के सहारे कार्य को अनजाम देते हैं। वे अग्रीम पंक्ति के सिपाही हैं। उन्हें अपने गाँव-घर जाने पर हमेशा डर बना रहता है। परिवार भी डर के साये में गाँवों में रहता है। कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। 
(ड) 12 जिलों में 2500 सहायक पुलिस बल कार्यरत है। जिसमें 200 के करीब नक्सलवाद को छोड़कर समपर्ण लिये लोग है। वे हमेशा जिला पुलिस बल के सशरीर उपस्थित होने से पहले ही घटनास्थल पर होते हैं वे भी एक लाठी के बल पर।  
(च) अबतक राज्य में कार्यरत सहायक पुलिस जवानों में से 5 (पांच) सहायक पुलिस जवान शहीद हो गये हैं। उन्हें कोई भी मुआवजा नही मिला और न कोई परिवारिक लाभ मिला पाया है। उनका परिवार आज भुखमरी केे कगार पर खड़ा है। सरकार को मानवता के दृष्टिकोण से देखना चाहिए कि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी से ना ग्रसित हो जाए। उन्हें उचित मुआवजा के साथ उनके परिवार के लागों को रोजगार दे भरण-पोषण का भार सरकार उठाए। बच्चों की शिक्षा हेतु उचित कदम उठाए क्योंकि कमाने वाला परिवार का मुखिया अब उनके साथ में जीवित है। यह मानवाधिकार हनन का मामला है।  
(छ) 50 के करीब सहायक पुलिस कर्मी को बेवजह बरखास्त किया गया है। हवलदार को खुश नहीं कर पाये तो अंजाम बरखास्त होना तय है।
(ज) नियुक्ति के समय जिस अधिसुचना गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग जिसकी संख्य महा/नि0-05/20161169/विभागीय अधिसूचना संख्या 5170 दिनांक 28.02.2026 द्वारा जिन शर्तों पर बहाली हुआ था उसकी कंडिका- 11 (अनुभव) में दिया गया है कि तदनुसरा झारखंड पुलिस संवर्ग के आरक्षी के पदों पर सीधी नियुक्ति हेतु अधिसूचित  नियुक्ति नियमावली-2014 (अधिसूचना संख्या-6992 दिनांक 20.10.2014) में यथोचित संशोधन कालांतर किया जाएगा। जिसका अनुपालन नही किया जा रहा है। 
(झ) वर्दी/दवा आदि के लिए कोई व्यवस्था नहीं किया गया है। जिन लोगों ने यह नियम आदि बनाया वे ही शायद इस मानदेय के योग्य हैं उनका भी वेतन या मानदेय इसी हिसाब से दिया जाए।
(ञ) सहायक पुलिस जवानों के आने के बाद ही राज्य से नक्सल की समस्या समाप्त के कगार पर है। क्योंकि वे अग्रीम पंक्ति के लडाके हैं। उनको तो औरों के वेतन से अधिक देना चाहिए।
(ट) राँची जिला में धरना स्थल में वे नारकीय स्थिति में है। मुलभूत सुविधाओं का घोर आभाव है। धरने पर महिलाए बैठी है उनको उनकी लज्जा को बचाने के लिए राँची नगर निगम को व्यवस्था करनी चाहिए। पीने का पानी का शौचालय का 22:00 सौ लोग जहां हैं वहां को समुचित व्यवस्था नगर निगम को करना चाहिए अभिलंब वहां की लाइन काट दी जाती हैं महिलाएं भी रहती हैं इसलिए बिजली विभाग को वहां लाइन की व्यवस्था करनी चाहिए और नगर निगम का जो पार्क है उसको भी खोलना चाहिए ताकि महिलाएं अपना कपड़ा वगैरह बदल सके बहुत दयनीय स्थिति है सरकार को अविलंब इन पर ध्यान देना चाहिए और और नियम बनाकर इनको जल्द से जल्द परमानेंट करना चाहिए और जो भी इनके रिक्वायरमेंट है चाहे वह छुट्टी का हो या दवा दारू का जो भी मांग लो इन्हें भी सरकार अपना समझे गैर न समझे चिकित्सा की व्यवस्था इनके साथ साथ परिवार की होनी चाहिए ₹10000 मासिक में वर्दी भी इनको खरीदना है ना किसी तरह का ta-da कोई भाता नहीं है और 5 साल के लिए इनका उम्र भी खत्म हो जाएगा इसलिए अविलंब सरकार को नियम बनाकर इनको स्थायीकरण करना चाहिए और सारी सुविधा जो पुलिस डिपार्टमेंट को और सिपाहियों को मिलती है यह भी पूरी ड्यूटी करते हैं इनको भी तत्काल प्रभाव से सारा सुविधा मिलना चाहिए सरकार इन पर विचार करें और जो पदाधिकारी विगत 4 सालों में गलत गलत आरोप  लगाकर जो सिपाही को निकाले हैं उनको तत्काल बहाल किया जाए और पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

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