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भगवान बिरसा मुंडा की तपोभूमि, झारखंड राज्य की राजधानी, राँची

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#IIN 

भगवान बिरसा मुंडा की तपोभूमि, झारखंड राज्य की राजधानी, राँची,

धर्मप्रेमी सज्जनों,
नमस्ते!  



-} आपको जानकर अतीव प्रसन्नता होगी कि भगवान बिरसा मुंडा की तपोभूमि, झारखंड राज्य की राजधानी, राँची में मारवाड़ी आरोग्य भवन संख्या-03(पानी टंकी के सामने)बरियातु रोड, राँची के विशाल, सौम्य एवं प्राकृतिक, नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर परिसर में'आर्य ज्ञान प्रचार समिति, राँची' पिछले 20 वर्षों से 'सीनियर सिटीजन होम(वृद्धाश्रम) का संचालन कर बुजुर्गों की सेवा का पुण्य  कार्य कर रही है।वृद्धाश्रम का भवन सुंदर एवं तिमंजिला है।जिसमें लगभग 50 हवादार एवं सूर्य की रोशनी से युक्त आवास कक्ष हैं।प्रत्येक कक्ष में दो बुजुर्गों के रहने की उत्तम व्यवस्था है। लगभग 40 बुजुर्ग अभी आश्रम में रह रहे हैं ,जिन्हें आश्रम द्वारा शुद्ध शाकाहारी बिना लहसुन-प्याज के सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन, ऋतु अनुकूल चार प्रहरों में अलग-अलग  मेन्यू  (Food Committee) के निर्धारण के अनुसार अनुभवी रसोईयों(Cook) के द्वारा तैयार कर परोसा जाता है।
     आप सभी सुधिजनों से प्रार्थना है कि आप अपने परिजनों, इष्ट-मित्रों,संस्था के सदस्यों के साथ यहाँ आएँ और अपना तथा उनका जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगाँठ,त्योहार या कोई और खुशी के पल आकर बुजुर्गों के साथ मनाएँ।खुद खुश रहें और बुजुर्गों के चहरे पर खुशियाँ लाएँ।क्योंकि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं और दुख बाँटने से घटता है।यही वह दर्शन है जो हमें स्व से पर-कल्याण यानी परोपकारी बनने की ओर अग्रसर करता है। जीवन के चौराहे पर खड़े होकर यह सोचने को विवश करता है कि सबके लिए जीने का क्या सुख है? मनुष्य के समाज के प्रति उसके कुछ कर्तव्य भी होते हैं। सबसे बड़ा कर्तव्य है एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना और यथाशक्ति सहायता करना। संतों ने इसकी अलग-अलग प्रकार से व्याख्या की है। नीतिकारों का कहना है-धन कमाने में इन हाथों से कई तरह के पाप करने पड़ते हैं, परंतु यदि इन हाथों से दान कर दिया जाए या वृद्धजनों की सेवा की जाए तो वह पाप धुल जाता है। हाथ की शोभा गहनों और कीमती हीरे की घड़ियों से नहीं है, परंतु दान एवं सेवा से मानी गई है। हाथ का आभूषण कंगन नहीं दान तथा बुजुर्गों की सेवा है। कंठ का आभूषण हार नहीं सत्य है। कानों के आभूषण कुंडल नहीं शास्त्र हैं। 

नोट-(1)अगर आप वृद्धाश्रमवासियों के साथ खुशी के पल बाँटना चाहते हैं और उनके लिए एक प्रहर के भोजन का प्रबंध करना चाहते हैं,तो एक दिन पूर्व प्रंबधन को सूचित कर मेन्यू प्राप्त कर लें।
(2)वृद्धाश्रम में एक मनोरंजन कक्ष भी है, जहाँ आप अपना जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगाँठ आदि खुशी के पल वृद्धाश्रमवासियों के साथ मना सकते हैं।
(3)आप उपहार स्वरूप वृद्धाश्रमवासियों के लिए राशन,फल, (ऋतुअनुकूल)वस्त्र, चादर, तौलिया, शॉल, कम्बल,टूथपेस्ट, साबुन आदि दैनिक उपयोग की वस्तु दे सकते हैं।
(4)वृद्धाश्रम को भारत सरकार के आयकर विभाग द्वारा आयकर की धारा 80-G के अंतर्गत छूट दी गई है।आप दान देकर पुण्य के भागी बन सकते हैं। 

निवेदक-:
श्रीमती सुशीला एस एल गुप्ता
सीनियर सिटीजन होम, राँची। 

सम्पर्कसूत्र-7739458520/9431114380/9431188170

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