झोली में हैं तमाम उपलब्धियां- सरिता दोनों हाथ और एक पैर गंवाने के बाद भी करती हैं चित्रकारी, - Ideal India News

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झोली में हैं तमाम उपलब्धियां- सरिता दोनों हाथ और एक पैर गंवाने के बाद भी करती हैं चित्रकारी,

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झोली में हैं तमाम उपलब्धियां- सरिता दोनों हाथ और एक पैर गंवाने के बाद भी करती हैं चित्रकारी, 

Atpee Mishra 



 -》 चार वर्ष की उम्र में ही दोनों हाथ तथा एक पैर गंवा चुकी सरिता ने जिंदगी की जंग में हार नहीं मानी। मुंह में ब्रश को दबाकर दाहिने पैर की अंगुलियों के सहारे कैनवास पर रंग भरना शुरू किया तो उनके हुनर को देख लोगों ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली। एक ओर पैरालंपिक में तमाम दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपने हुनर और हौसले से अपनी झोली में तमाम पदक अर्जित करके देश का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी ओर प्रयागराज में पली-बढ़ी ऊर्जा तथा उम्मीदों से भरी दिव्यांग सरिता ने भी अपने हुनर और हौसले से ‘पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है’ को साबित करते हुए अपनी झोली में तमाम उपलब्धियां अर्जित की।

मूलरूप से फतेहपुर की रहने वाली सरिता के पिता विजयकांत द्विवेदी भूतपूर्व सैनिक और मां विमला द्विवेदी ने सरिता के हौसलों को हमेशा उड़ान दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएफए की डिग्री हासिल कर चुकी सरिता शिक्षा से लेकर कला क्षेत्र में कई राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार अर्जित कर चुकी हैं।


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