संविधान ने कैसे बदली हिंदी की हैसियत, अंग्रेजी कैसे हावी हुई, नेहरू से लेकर इंदिरा तक- - Ideal India News

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संविधान ने कैसे बदली हिंदी की हैसियत, अंग्रेजी कैसे हावी हुई, नेहरू से लेकर इंदिरा तक-

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संविधान ने कैसे बदली हिंदी की हैसियत, अंग्रेजी कैसे हावी हुई, नेहरू से लेकर इंदिरा तक- 

Adarsh pandey- Education



-》 2001 की जनगणना के अनुसार, लगभग 25.79 करोड़ भारतीय अपनी मातृभाषा के रूप में हिंदी का उपयोग करते हैं, जबकि लगभग 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक का उपयोग करते हैं। हिंदी की प्रमुख बोलियों में अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा, छत्तीसगढ़ी, गढ़वाली, हरियाणवी, कुमाउनी, मगधी और मारवाड़ी भाषाएं शामिल हैं।
 आज के दौर में विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और अपने आप में एक समर्थ भाषा है। इंटरनेट सर्च से लेकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदी का दबदबा बढ़ा है। 


14 सितंबर को पूरा भारत एक बार फिर राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाने जा रहा है। इस मौके पर याद दिला दें कि जिस देश के संविधान ने देवनागरी लिपि यानी हिंदी को तरजीह देते हुए आधिकारिक राजभाषा का दर्जा देकर उसका उत्थान किया। हिंदी को एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए वह एक क्रांतिकारी कदम था, लेकिन फिर भी देश में अंग्रेजी का वर्चस्व बढ़ता गया। 15 अगस्त, 1947 के दिन जब देश गुलामी की जंजीरों से आजाद हुआ था, तब इस देश में कई भाषाएं और सैकड़ों बोलियां बोलीं जाती थीं। इनमें हिंदी सबसे प्रमुख और ज्यादा बोली जाने वाली भाषा थी। 

■ पंडित नेहरू ने दिए थे ये तर्क

भारत के हित में, भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के हित में, ऐसा राष्ट्र बनाने के हित में जो अपनी आत्मा को पहचाने, जिसे आत्मविश्वास हो, जो संसार के साथ सहयोग कर सके, हमें हिंदी को अपनाना चाहिए। 13 सितंबर, 1949 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद में चर्चा के दौरान तीन प्रमुख बातें कही थीं-
किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान नहीं हो सकता।
कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती।

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