नाम बदलने से जिले का विकास होगा तो हम अपने बेटे का नाम अंबानी और अदाणी क्यों न रखें : ओमप्रकाश राजभर - Ideal India News

Post Top Ad

नाम बदलने से जिले का विकास होगा तो हम अपने बेटे का नाम अंबानी और अदाणी क्यों न रखें : ओमप्रकाश राजभर

Share This
#IIN 

नाम बदलने से जिले का विकास होगा तो हम अपने बेटे का नाम अंबानी और अदाणी क्यों न रखें : ओमप्रकाश राजभर, 

Dr. U.S Bhagat



वाराणसी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जिले का नाम बदलने से विकास होता है तो हम अपने बेटे का नाम क्यों अंबानी और अदाणी रखे। उनका भी विकास हो जाएगा। भाजपा एक ओर अल्पसंख्यक समुदाय को जोडऩे की बात कर रही है तो दूसरी ओर उनके नाम से जिले का नाम बदल रही है। फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या रखने की क्या जरूरत थी। फैजाबाद नाम से उस जिले की पहचान है। वह रविवार को सर्किट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।उन्होंने कहा कि भाजपा अब दूसरे पार्टी का नकल कर रही है। पहले बहुजन समाज पार्टी ने प्रबुद्धजन सम्मेलन किया, अब भाजपा कर रही है। प्रबुद्धजन सम्मेलन में कोई प्रबुद्ध नहीं जा रहा है, वहां अबुद्ध जा रहे हैं। भाजपा की नीतियों को लोग समझ चुके हैं, अब उनके कार्यक्रम में कोई नहीं जा रहा है। सभा और सम्मेलन में लोगों को पैसा देकर भीड़ जुटाई जा रही है। कुछ लोग तो पैसा लेने के बाद भी नहीं जा रहे हैं।किसान महापंचायत का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के लोग किसानों की बातों को मानने को तैयार नहीं है लेकिन किसान अपनी बात बनवाना जानते हैं। यही किसान इन्हें सत्ता से बेदखल करके मानेंगे। दूसरी तरफ, मढ़वा सोएपुर में विश्वकर्मा जागरूकता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि भाजपा ने भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवकाश को रद किया है। वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने सुखी लकडिय़ों पर पाबंद लगाकर विश्वकर्मा समाज का रोजगार छीनने का काम किया है। यदि हम सरकार में आते हैं तो विश्वकर्मा समाज को रोजगार के अवसर मुहैया कराएंगे। सुभासपा के प्रदेश महासचिव शशि प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वकर्मा समाज की लड़ाई लडऩे के लिए हम कटिबद्ध है। महासचिव चंदन विश्वकर्मा ने कहा कि समाज का अधिकार हम सत्ता में आकर की पा सकते हैं, ऐसे में समाज को एकजुट होने की जरूरत है। संगोष्ठी में रंगीराम विश्वकर्मा, गोपाल विश्वकर्मा, प्रमोद, मिथिलेश, आनंद, अविनाश आदि मौजूद थे।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad