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समाज में चेतना जागृत करने में एन एस एस व पत्रकारिता का अमूल्य योगदान है- प्रो संजय द्विवेदी

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समाज में चेतना जागृत करने में एन एस एस व पत्रकारिता का अमूल्य योगदान है- प्रो संजय द्विवेदी

Dr. Pramod vachaspati 




आजादी का अमृत महोत्सव इंडिया @75 के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना, उत्तर प्रदेश ने  स्वतंत्रता  संग्राम की शानदार  विरासत को आत्मसात करने के लिए पांच दिवसीय  विशेष कार्यक्रम आरंभ किया।  महोत्सव के प्रथम दिन "आजादी की कहानी, हिंदी पत्रकारिता की जुबानी " विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन रहे।  श्री सुभाष चंद्र शर्मा का परिचय एवं स्वागत एन एस एस, राज्य संपर्क अधिकारी एनएसएस यू पी, डॉ अंशुमलि शर्मा द्वारा किया गया।

आजादी में पत्रकारिता के योगदान के बारे में बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि समाचार पत्रों द्वारा लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को बढ़ाने का और समाजिक कुरीतियों के खिलाफ अलख जगाने का कार्य समाचार पत्रों, पत्रिकाओं द्वारा किया गया।  उस समय पत्रकार अपनी बातों को बड़ी बेबाकी से रखते थे । कानपुर के निकट बिठूर स्थित संग्रहालय में संग्रहित  गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रतिष्ठित समाचार पत्र प्रताप के पुराने अंको में स्वयं सेवकों को आजादी के संघर्ष की गाथा देखने को मिलेगी। उल्लेखनीय है कि भगतसिंह के कांतिकारी जीवन की शुरुआत प्रताप से हुई थी। आज का दौर सोशल मीडिया का है। हम सभी को सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग  करना चाहिए । हमें अपने संविधान प्रदत्त अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी ध्यान रखना चाहिए और अपनी आजादी का सम्मान करना सीखना चाहिए।

 कार्यक्रम का शुभारंभ एन एस एस उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अशोक श्रोती के उद्बोधन से हुआ । उन्होंने भारत की आजादी के 75 वर्ष  के अवसर पर अमृत उत्सव के पर्व पर संकल्प लेने का आह्वान किया और भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम "फ्रीडम रन फॉर फिट इंडिया " को सफल बनाने को प्रेरित किया।

 भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी का संक्षिप्त परिचय एवं स्वागत डॉ एकता चौहान द्वारा किया गया ।  प्रोफ़ेसर द्विवेदी ने आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता के आदर्शो का उल्लेख करते हुएं बंगाल गजट से आरंभ कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रकाशित पत्रों की भूमिका को रेखांकित किया।  राम मोहन राय, भारतेंदु हरिश्चंद्र, से लेकर गणेश शंकर विद्यार्थी, माधव  सप्रे के साथ साथ राष्ट्रीय नायकों गांधी, लोकमान्य तिलक आदि का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में इनके योगदान पर अपना व्यक्तव्य रखा। आज के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव का यह क्षण बहुत ऐतिहासिक है । राष्ट्रीय सेवा योजना और पत्रकारिता के उद्देश्य में काफी समानता है । दोनों का उद्देश्य समाज की सेवा करना, चेतना जगाना व मार्गदर्शन करना है। अब हम सभी को आजाद भारत के 75 साल के बाद आगे आने वाले वर्षों को स्वर्णिम बनाना है।
 प्रश्नोत्तर सत्र में एनएसएस वॉलिंटियर्स मुस्कान,   सनोवर खान, दिग्विजय कुमार ने आज के समय में पत्रकारिता की प्रासंगिकता, प्रिंट मीडिया बनाम सोशल मीडिया ,आजादी से पहले पत्रकारिता की स्थिति आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जिनके प्रोफेसर द्विवेदी ने बड़े ही प्रभावशाली व सारगर्भित उत्तर देकर संतुष्ट किया। 
महोत्सव की श्रंखला के क्रम में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा डॉ संध्या द्विवेदी ने रखी , इसके अंतर्गत क्विज, वेशभूषा प्रतियोगिता एवं अनकही कहानी प्रतियोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।
कार्यक्रम के अंत में डॉ प्रकाश चौधरी ने सभी आगंतुकों ,प्रोग्राम अफसर व वॉलिंटियर्स को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।

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