वही जंगल लुप्त होने के कगार पर- जिस खैर से खीरी की पहचान, - Ideal India News

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वही जंगल लुप्त होने के कगार पर- जिस खैर से खीरी की पहचान,

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वही जंगल लुप्त होने के कगार पर- जिस खैर से खीरी की पहचान, 

Sitapur-》》 Sharad Kapoor and Rajeev Bajpeyi,



-} भारत नेपाल से सटे इस जिले में कभी खैर के घने जंगल हुआ करते थे। इसी खैर के कारण ही जिले का नाम पहले खैरी और फिर खीरी पड़ा। जिले की सबसे पुरानी रियासत का नाम भी खैरीगढ़ स्टेट था। आज भी तहसील निघासन का एक परगना खैरीगढ़ है। इस तरह खीरी जिले की पहचान ही खैर से थी। कत्था बनाने और चमड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने के कारण आजादी के पहले और आजादी के बाद भी कुछ दशकों तक खैर का जबरदस्त दोहन हुआ। इस कारण इसका विस्तार लगातार सिमटता चला गया। 

 जिस खैर के जंगल के कारण जिले का नाम खीरी पड़ा वह खैर अपने मूल स्थान से ही लुप्त होता जा रहा है। खैर के औषधीय गुणों, कत्था बनाने और चमड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने की वजह इसका व्यवसायिक महत्व है। अत्याधिक दोहन के कारण खैर के जंगल सिमटकर सीमित दायरे में रह गए हैं। हालांकि अब वन विभाग ने इस लुप्त हो रही पहचान को जिंदा बनाए रखने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

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