झारखंड राज्य में ललित कलाओं के कलाकारों के प्रति 20 वर्षों से उदासीन रवैया कलाकारों में रोष : धर्मेंद्र तिवारी - Ideal India News

Post Top Ad

झारखंड राज्य में ललित कलाओं के कलाकारों के प्रति 20 वर्षों से उदासीन रवैया कलाकारों में रोष : धर्मेंद्र तिवारी

Share This
#IIN 

कमल कुमार कश्यप 
रांची झारखंड

 झारखंड राज्य में ललित कलाओं के कलाकारों के प्रति 20 वर्षों से उदासीन रवैया कलाकारों में रोष  : धर्मेंद्र तिवारी

 भारतीय जनतंत्र मोर्चा के अध्यक्ष, श्री धर्मेंन्द्र तिवारी ने आज कहा कि झारखंड राज्य में ललित कलाओं के कलाकारों की तरफ सरकार का ध्यान अब तक नहीं गया है। एक ओर जहाँ सरकार खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही हैं वहीं दूसरी ओर राज्य के मूर्ति कला, पेंटिंग ग्राफिक्स, सिरामिक्स, डिजाइन आदि कलाकारों के प्रति उदासीन रवैया अपना रही है। झारखण्ड गठन हुए 20 वर्ष से अधिक हो गया है, पर इन कलाकारों को अबतक कोई मंच नहीं उपलब्ध कराया गया है, जिसके कारण इनमें निराशा की भावना घर कर गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कलाप्रेमियों की भी कमी नहीं है, यदि कहीं कमी है तो बस सरकार की सोच और उसकी दूरदर्शिता में। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य के लोगों में कला एवं संस्कृति समरसता, आपसी प्रेम का भाव उत्पन्न करती है, उन्हें सामाजिक दायित्वों का ज्ञान का बोध कराती है। समाज एवं प्रदेश को नई सोच, नई दिशा दिखाते हुए उन्हें उन्नत बनाने में महती भूमिका अदा करती है। 
श्री तिवारी ने बताया कि राज्य के कई युवा ललित विद्या में एमएफए की डिग्री हासिल कर के भी बेरोजगार बैठे हुए है, उनके पास रोजगार नहीं है। संयुक्त बिहार के समय प्रत्येक सरकारी स्कूलों में ललित कला के शिक्षक हुआ करते थे, जो बच्चों की रूचि के अनुसार मूर्तिकला, पेटिंग इत्यादि की शिक्षा प्रदान कर उनका सर्वांगीन विकास करते थे। कला एवं संस्कृति की शिक्षा के अभाव में आजकल के बच्चे सार्थक कार्यों से मुँह मोड़कर स्मार्ट मोबाईल के माध्यम से सोशल मिडिया, काल्पनिक दुनिया में अपना बहुमूल्य समय व्यर्थ कर रहे है। राज्य के प्रत्येक सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों में ललित कला शिक्षक की नियुक्ति होने से बच्चे आत्मनिर्भर बन पायेंगे और उनमें स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर उनकी ऊर्जा का सार्थक प्रयोग होगा जिससे देश एवं झारखण्ड को काफी नौतिक लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में अनगिनत पर्यटन स्थल है, यदि राज्य सरकार चाहे तो कलाकारों का सहयोग प्राप्त कर उनका सौन्दर्यीकरण कर सकती है। जिससे पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा, रोजगार बढ़ेगी और सरकार एवं स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। राज्य के हर जिले में आर्ट गैलरी का निर्माण होना चाहिए। जिसमें राज्य के सभी कलाकार अपनी बनाई हुए कलाकृतियों का प्रदर्शन कर सके व उन्हें बेच सके। राज्य सरकार को समय-समय पर स्थानीय कलाकारों को सम्मान के साथ स्कॉलरशिप भी दिया जाना चाहिए। राज्य में ललित कला अकादमी का गठन करते हुए आड्रे हाउस जैसे धरोहर का संरक्षण करते हुए वहाँ पर समय-समय पर कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका निःशुल्क दिया जाना चाहिए।
श्री धर्मेंन्द्र तिवारी ने हेमंत सरकार से मांग की है कि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों में ललित कला के शिक्षक की नियुक्ति करें। राज्य के हर जिले में आर्ट गैलरी का निर्माण करे। राज्य के वरिष्ठ कलाकारों को उचित सम्मान के साथ मानेदय दें। श्री तिवारी के साथ डा. ओम प्रकाश पांडेय, श्री आशीष शीतल मुण्डा,  श्री अशोक कुमार सिन्हा, श्री संजय द्विवेदी, श्री दीपांकर कर्मकार, श्री शफीक अंसारी, श्री श्यामबिहारी नायक, उदय मंडल, हीरा यादव आदि उपस्थित थे।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad