मासूम फुटबॉलरों का भविष्य तरासने में जुटे हैं अंतरराष्ट्रीय कोच भैरव दत्त। - Ideal India News

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मासूम फुटबॉलरों का भविष्य तरासने में जुटे हैं अंतरराष्ट्रीय कोच भैरव दत्त।

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मासूम फुटबॉलरों का भविष्य तरासने में जुटे हैं अंतरराष्ट्रीय कोच भैरव दत्त।

जयचन्द जलाली पट्टी वाराणसी




वाराणसी- अगर सच्चे लगन और मेहनत से जिस ओर कदम बढ़ाया जाए तो निश्चित तौर पर उसे हासिल किया जा सकता है । यह सिर्फ संदेश नहीं अपितु सच कर दिखाने वाले अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कोच (एनआइएस) भैरव दत्त की सच्ची दास्ता है । जिसने अपने तमाम बाधाओं के बीच संघर्ष कर न सिर्फ अपना स्तर उपर उठाया बल्कि अपने फुटबॉल नर्सरी ब0रे0का0 वाराणसी के मासूम फुटबॉल प्रशिक्षुओं को भी सम्मानजनक मुकाम तक पहुंचाया । 
फुटबॉल में एनआइएस प्रशिक्षक भैरव दत्त का जीवन अत्यन्त कठिनाइयों से भरा था । इनका जन्म 05 नवम्बर 1962 को उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के बकरकटिया नामक अत्यन्त अभावग्रस्त छोटे से गांव में हुआ I झ्नका बच्चपन कठिनाइयों से भरा रहा । तीन भाई और एक बहन में सबसे बड़े भैरव दत्त जब नौ साल के थे तो तभी पिता का साया उनके सर से उठ गया था । हरिबल्लभ के निधन के बाद पूरा परिवार संकटग्रस्त हो गया था । पसंदीदा खेल फुटबॉल खेलने में कई बाधा भैरव दत्त के अविकसित बालक मन को उध्देलित करती रही । पर न तो इस बालक के मन को एक फुटबॉलर बनने की दृढ़ इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं आई और। जीवन को चलाने के लिए  छोटी सी उम्र में होटल में काम करने तक का हर मुश्किल काम इस छोटे उम्र के बालक का न तो रास्ता रोक पाई और न ही इसके इच्छाशक्ति को कम कर पाई । तमाम मुश्किल का दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर सामना करते हुए बालक भौरव दत्त ने 8वीं तक की पाढ़ाई पूरी कर ली । उन्ही दिनों स्पोट्स कालेज लखनऊ में फुटबॉल चयन प्रक्रिया हो रही थी पर भैरव दत्त के पास इतना भी पैसा नहीं था कि लखनऊ जाकर चयन प्रक्रिया का हिस्सा बन सके । ऐसे में उनके गांव के बच्चपन के एक मित्र जो उन्ही के साथ फुटबॉल खेलते थे और उनके आर्थिक सहयोग से भैरव दत्त ने फुटबॉल चयन प्रक्रिया में भाग लिया  कुल 165 प्रतिभागियों में तीन लोगों का चयन हुआ और उन तीन लोगों   भैरव दत्त का नाम सबसे उपर था पर चयन हो जाना ही काफी नहीं था। उनके जीवन में मुश्किल कम नहीं था पर वो उन कठिनाइयों का सामना करते हुए स्पोट्स कालेज लखनऊ से 12 वीं तक की शिक्षा प्राप्त की । भैरव दत्त ब0रे0का0 वाराणसी में नौकरी पाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने खेल से जहां ब0रे0का0 का नाम रोशन किया । वही 10 बार संतोष ट्राफी में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और बतौर कप्तान के रूप में फुटबॉल का झण्डा लगातार बुलंद रखा । वहीं लगातार 22 बार इण्टर रेलवे फुटबॉल चैम्पियनशिप में ब0रे0का0 का प्रतिनिधित्व भी किया । भैरव दत्त एनआइएस प्रशिक्षक के अलावा सी लाइसेंस कोर्स (एएफसीसी) यूथ डेवलपमेंट कोर्स तथा योग में डिप्लोमा व अन्य उपलब्धियों में से  उत्तर प्रदेश गौरव से सम्मानित भैरव दत्त इण्डियन रेलवे के रेफरी और फिर चयनकर्ता का दायुत्व भी निभा रहे हैं । जबकि फुटबॉल नर्सरी की स्थापना कर मासूम बच्चों का भविष्य बनाने के लिए लगभग 15 वर्षों से निःशुल्क फुटबॉल का प्रशिक्षण देने का वीणा उठा रखा है । पिछले एक दशक से गणेशपुर पहाड़ी  वाराणसी मैदान पर खिलाड़ियों को तरासने का काम बखुबी किया । मौजूदा समय में पिछले पांच वर्षों से ब0रे0का0 इण्टर कालेज के मैदान पर लगभग 300 से अधिक बालक,बालिकाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं और इन मासूम खिलाड़ियों का भविष्य बनाने के लिए भैरव दत्त प्रति दिन तीन घंटा फुटबॉल की बारीकियां सीखाने में अपना पसीना बहा रहे हैं । देश के आस,पास के प्रदेशों में किसी भी फुटबॉल प्रशिक्षण सेंटर पर इतनी बड़ी संख्या में देखने को नहीं मिलेगा । भैरव दत्त को इस पसीने की कीमत के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर 52 बालिकाएं और एक दर्जन से अधिक बालक राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं । इतना ही नहीं भारत में होने वाले अण्डर-17 विश्व कप महिला फुटबॉल चैम्पियनशिप में भाग लेने वाली भारतीय महिला फुटबॉल टीम में ज्योति पटेल का गोवा में बतौर प्रशिक्षण शिविर में चयन हुआ है । इससे पहले ज्योति पटेल भूटान , तुर्की और मंगोलिया में अन्तरराष्ट्रीय महिला फुटबॉल चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं हैं । वहीं अण्डर-17 में तीन खिलाड़ी पूजा पटेल , भारती कुमारी व काजल पटेल भारतीय फुटबॉल टीम के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले चुकीं हैं । इस सफलता को देखते हुए ब0रे0का0 प्रशासन ने महिला खिलाड़ियों के लिए एक चेंज रूम के साथ शानदार फुटबॉल मैदान खिलाड़ियों को दे रखा है । इसी मैदान पर भैरव दत्त से फुटबॉल का प्रशिक्षण दिलाने के लिए आस,पास के सैकड़े लोग अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए फुटबॉल नर्सरी ब0रे0का0 के प्रशिक्षण शिविर में भेजने लगे हैं। और जब तक बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं तब तक अधिकांश लोग अपने बच्चों को घर ले जाने के लिए मैदान के आस-पास बैठे रहते हैं और  प्रशिक्षण खत्म होने पर अभिभावक अपने बच्चो ं को घर ले जाते है। ब0रे0का0 के फुटबॉल मैदान पर खिलाड़ियों का हुजुम देख कर ऐसा लगता  है कि अब भारत में फुटबॉल का जुनून देखने को मिल रहा है I

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